यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 21, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Lok Sabha Election 2024: चुनावी मौसम में बढ़ी उड़नखटोले की मांग, किराया छू रहा आसमान
Lok Sabha Election 2024 चुनावो में प्रचार के लिए पार्टियां चार्टर्ड हेलिकॉप्टर या विमानों की सेवा लेना ही पसंद करती ...और पढ़ें

गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। चुनाव प्रचार के दौरान जम्मू-कश्मीर से तमिलनाडु और मेघालय से गुजरात की दूरी तय करने के लिए नेता उड़नखटोले का इस्तेमाल करेंगे। लोकसभा चुनाव को देखते हुए इन दिनों आलम यह है कि हर छोटी-बड़ी राजनीतिक पार्टियां चार्टर्ड हेलीकाप्टर या विमानों की सेवा लेने के लिए इन्हें उपलब्ध कराने वाले आपरेटरों से संपर्क साध रही हैं।
सबसे अधिक मांग हेलीकाप्टरों की है, लेकिन समस्या यह है कि देश में नॉन-शेडयूल आपरेटरों के पास सीमित संख्या में ही हेलीकाप्टर हैं। ऐसे में मांग और आपूर्ति में संतुलन बनाना इस क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनलों के लिए एक बड़ी चुनौती है। चार्टर्ड हेलीकाप्टर व विमान उपलब्ध कराने से जुड़ी कंपनी फ्लाइंग बर्ड्स एविएशन के सीईओ आशीष कुमार बताते हैं कि समस्या यह है कि देश में हेलीकाप्टर बड़ी सीमित संख्या में हैं।
सरकारी व अर्ध सरकारी विभागों की बात छोड़ दें तो निजी क्षेत्र के पास करीब 160 हेलीकाप्टर ही हैं। इस संख्या का अधिकांश भाग बड़े कारपोरेट घरानों के पास है। ऐसे में बाजार के पास हेलीकाप्टरों की संख्या बेहद सीमित है। देखा जाए तो करीब 40 हेलीकाप्टर ही निजी आपरेटरों के पास बाजार के लिए बचते हैं। नेता यदि अपने निजी संबंधों के बल पर कारपोरेट घरानों से हेलीकाप्टर उपलब्ध करा लें तो बात दूसरी है, लेकिन यदि निजी आपरेटरों के पास जाएंगे तो आपके पास बेहद सीमित विकल्प रहता है।
कमाने का मौसम
हेलीकाप्टर उपलब्ध कराने वाली कंपनियों से जुड़े लोगों का कहना है कि यह कमाने का मौसम है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि मांग और आपूर्ति में काफी असंतुलन की चुनावी मौसम में स्थिति रहती है। सामान्य मौसम के मुकाबले इस मौसम में हेलीकाप्टर का भाड़ा कम से कम दो गुना तो बढ़ ही जाता है। मांग करने वालों को इस मौसम में यह कीमत भी कम नजर आती है। भाड़े के तौर पर मुंहमांगी कीमत देने को लोग तैयार रहते हैं।
आमतौर पर हेलिकाप्टर का भाड़ा घंटे के हिसाब से तय होता है। चुनाव के मौसम में यह रकम करीब पांच लाख तक पहुंच जाती है। ज्यादातर मांग डबल इंजन वाले हेलीकाप्टर की होती है। ऐसे में भाड़े की रकम डेढ़ से दो गुना अधिक भी वसूल की जा सकती है।
हेलीकाप्टर की मांग क्यों होती है अधिक
हवाई जहाज के उतरने या उड़ान भरने के लिए एयरपोर्ट जरूरी है। चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं को अनेक ऐसे दूरदराज के इलाके में जाना पड़ता है, जहां एयरपोर्ट तो दूर सड़क की भी सुविधा सही तरीके से नहीं होती। ऐसी जगहों के लिए हेलीकाप्टर काफी उपयोगी साबित होते हैं। इसकी लैंडिंग कहीं भी की जा सकती है।
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आमतौर पर नेता यदि दिल्ली से किसी दूरदराज के क्षेत्र की यात्रा पर निकलते हैं तो उनकी कोशिश होती है कि संबंधित राज्य की राजधानी वे हवाई जहाज से जाएं और वहां से हेलीकाप्टर से संबंधित प्रचार स्थल के लिए रवाना हों।
यह खर्चे भी वहन करते हैं नेताजी
चुनाव प्रचार में इस्तेमाल हेलीकाप्टर के किराए में क्रू के सदस्यों का खर्चा शामिल नहीं होता है। इन खर्चों में क्रू के खानपान, होटल में ठहरने, पार्किंग का खर्च शामिल है। पार्किंग का खर्च अलग अलग एयरपोर्ट की व्यस्तता के हिसाब से अलग अलग होता है।
