गाजियाबाद [मनीष शर्मा]। Lok Sabha Election 2019: दिल्ली से सटी उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने सबसे पहले प्रत्याशी घोषित कर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। ब्राह्मण कार्ड खेलकर सपा ने एक तरह से कांग्रेस की तलाश को झटका दे दिया है। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो कांग्रेस भी गाजियाबाद सीट से ब्राह्मण चेहरे पर ही दांव खेलने की फिराक में थी। ऐसे में कांग्रेस से टिकट की आस लगाए बैठे ब्राह्मणों की अरमान भी फिलहाल झुलसते दिख रहे हैं।

वहीं ब्राह्मण मतों की बहुलता और बसपा के परंपरागत वोटबैंक के साथ के बूते सपा ने लोकसभा के चुनावी रण में रोचक मुकाबले के आसार बढ़ा दिए हैं। सपा और बसपा के अप्रत्याशित गठबंधन के बाद जिले के बसपाई सीट को अपने खाते में आने की उम्मीद लगाए बैठे थे। कयासबाजी का दौर भी जारी था, लेकिन पार्टी जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार उर्फ मुन्नी शर्मा को प्रत्याशी घोषित कर समाजवादी पार्टी ने अटकलों पर विराम लगा दिया। ऐसे में माना जा रहा है कि ब्राह्मण व बसपा के परंपरागत दलित वोट बैंक के कास्ट कांबिनेशन के साथ-साथ मुस्लिम मतों के सपा के प्रति रूझान से सियासी सूरमाओं में मुकाबला दिलचस्प होगा।

पूर्व विधायक पिता की हत्या के बाद पहली बार निर्दलीय विस पहुंचे थे मुन्नी

सपा के उम्मीदवार बनाए गए सुरेंद्र कुमार मुन्नी के पिता प्यारे लाल गाजियाबाद सीट से तीन बार विधायक रहे। मुन्नी खुद भी तीन बार विधायक रह चुके हैं। सुरेंद्र कुमार मुन्नी के पूर्व विधायक पिता प्यारे लाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

पिता की हत्या के बाद वर्ष 1980 के विधानसभा चुनाव में माना जा रहा था कि कांग्रेस मुन्नी को उम्मीदवार बनाएगी, लेकिन पार्टी ने टिकट सतीश शर्मा को थमा दिया। सुरेंद्र कुमार मुन्नी निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत दर्ज की।

क्या तीन का तिलिस्म तोड़ पाएंगे मुन्नी?

तीन बार विधायक रह चुके सुरेंद्र कुमार मुन्नी विगत कई चुनाव परिणामों में नंबर-तीन रहे हैं। 2002 में सपा व 2007 में कांग्रेस के सिंबल पर गाजियाबाद विधानसभा चुनाव लड़े सुरेंद्र कुमार मुन्नी को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। 2012 में मुरादनगर सीट से विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मुन्नी नंबर तीन रहे। 2017 के विधानसभा चुनाव में मुन्नी को सपा ने मुरादनगर से लड़ाया, लेकिन बाद में कांग्रेस से गठबंधन के चलते मुन्नी के हाथ से टिकट फिसल गया था। ऐसे में यह देखना भी दिलचस्प होगा कि वह इस बार नंबर-तीन का तिलिस्म तोड़ पाएंगे? 

Posted By: JP Yadav

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