सोनीपत [संजय निधि]। Lok Sabha Election 2019: सोनीपत संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं ने कई बार चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। कई दिग्गजों को जबरदस्त पटखनी दी, कई बार एकदम हवा के विपरीत परिणाम भी दिए हैं। कुछ दिग्गज तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने हार के बाद यहां से अपना बोरिया-बिस्तर ही समेट लिया। इनमें मुख्य नाम हैं चौधरी देवीलाल और पंडित चिरंजीलाल। सोनीपत से हारने के बाद इन नेताओं ने फिर यहां से कभी दोबारा चुनाव नहीं लड़ा।

उम्मीद के विपरीत दिया परिणाम

1980 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा के सबसे कद्दावर नेता चौ. देवीलाल जनता पार्टी की टिकट पर सोनीपत से चुनावी मैदान में थे। उस समय भी यह सीट काफी चर्चित हो गई थी। सोनीपत के लोगों ने भी उन्हें भरपूर प्यार दिया और कांग्रेस के उम्मीदवार रणधीर सिंह को डेढ़ लाख से अधिक वोटों के अंतर से हराया।

इससे उत्साहित होकर देवीलाल ने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में हुए लोस चुनाव में भी सोनीपत से पर्चा दाखिल कर दिया। उनके मुकाबले में कांग्रेस से बिल्कुल नए चेहरे धर्मपाल मलिक मैदान में थे, जो पहली बार बड़ा चुनाव लड़ रहे थे। तब उन्हें कमजोर प्रत्याशी माना जा रहा था, लेकिन उस वक्त यहां की जनता का मूड बदल चुका था। सब देवीलाल की जीत पक्की मान रहे थे, लेकिन उन्हें नये-नवेले धर्मपाल मलिक से मात खानी पड़ी।

चार बार सांसद रहे चिरंजीलाल का भी सफर किया खत्म

करनाल संसदीय क्षेत्र से 1980 से 1996 तक चार बार सांसद रहे गन्नौर के पंडित चिरंजीलाल का राजनीतिक सफर भी यहां आकर समाप्त हो गया था। वर्ष 1999 में 11वीं लोकसभा चुनाव में उन्होंने सोनीपत से कांग्रेस के टिकट पर पर्चा दाखिल कर दिया। उनके सामने भाजपा के टिकट पर किशन सिंह सांगवान मैदान में थे।

रिकॉर्ड चार बार सांसद रहने वाले चिरंजीलाल को यहां से बड़ी हार का मुंह देखना पड़ा। दूसरी बार लोस चुनाव लड़ रहे सांगवान ने उन्हें करीब पौने तीन लाख वोटों से हराया था। इसके बाद उन्होंने भी यहां से चुनाव नहीं लड़ा।

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Posted By: Mangal Yadav

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