नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। राष्ट्रीय स्तर की सियासी सरगर्मियों के बीच बृहस्पतिवार को मतगणना के दौरान दिल्ली-एनसीआर पर भी सभी की निगाहें रहेंगी। यहां की 13 में से 11 लोकसभा सीटों पर तो राजनीति ही नहीं, खेल एवं संस्कृति जगत के भी कई धुरंधर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बहुतों की सियासी प्रतिष्ठा तो कई का राजनीतिक करियर भी दांव पर लगा है। देखना दिलचस्प होगा कि इन धुरंधरों में से कितने संसद के अंदर जा पाते हैं।

दिल्ली से पूर्व सीएम शीला दीक्षित भी लड़ रही हैं चुनाव
दिल्ली-एनसीआर की सबसे हॉट सीट उत्तर-पूर्वी दिल्ली की है जहां कांग्रेस और भाजपा दोनों के ही प्रदेश अध्यक्ष यानी शीला दीक्षित और मनोज तिवारी आमने-सामने हैं। एक 15 साल दिल्ली की सीएम रह चुकी हैं तो एक इसी सीट से मौजूदा सांसद हैं। दोनों की अध्यक्षीय कुर्सी का अस्तित्व भी चुनाव में हार-जीत पर ही निर्भर है। चांदनी चौक से भाजपा प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन एवं नई दिल्ली से कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। दक्षिणी दिल्ली से कांग्रेस ने ओलंपियन विजेंदर सिंह, पूर्वी दिल्ली से भाजपा ने क्रिकेटर गौतम गंभीर और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से भाजपा ने ही सूफी गायक हंसराज हंस को प्रत्याशी बनाया हुआ है। इस चुनाव में मिलने वाली हार-जीत ही इन तीनों का राजनीतिक भविष्य तय करेगी।

एनसीआर की बात करें तो सोनीपत से दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके वरिष्ठ कांग्रेसी भूपेंद्र ¨सह हुड्डा की प्रतिष्ठा दांव पर है। उनकी हार-जीत की हरियाणा की राजनीति में उनका कद तय करेगी। उनके मुकाबले में मौजूदा भाजपा सांसद रमेश कौशिक खड़े हैं।

इसी तरह फरीदाबाद से बतौर भाजपा प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर और गुड़गांव से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की जीत भी उनकी नाक का सवाल बन गया है। वैसे फरीदाबाद से आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता नवीन जयहिंद भी मैदान में हैं और इस चुनाव में जीत-हार उनकी भी इज्जत से जुड़ी है।

गाजियाबाद से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर रक्षा राज्यमंत्री वीके सिंह और नोएडा से केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री महेश शर्मा भाग्य आजमा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो देश की राजनीति में दिल्ली-एनसीआर का अपना अलग ही महत्व है। यही वजह है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी यहां से एक दो नहीं बल्कि कई को प्रतिनिधित्व दिया जाता रहा है। अगर भाजपा की सरकार बनी तो इस बार भी यहां से ज्यादा कैबिनेट मंत्री बनना लगभग तय है। दिल्ली में शीला दीक्षित और हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा का हार-जीत भी दोनों ही प्रदेशों में कांग्रेस की सियासत में बड़े बदलाव का परिचायक बनेगी।

ये हैं दिल्ली-एनसीआर की 13 लोकसभा सीटें

1. उत्तर पूर्वी दिल्ली

2. पूर्वी दिल्ली

3. नई दिल्ली

4. दक्षिणी दिल्ली

5. उत्तर-पश्चिमी दिल्ली

6. पश्चिमी दिल्ली

7. चांदनी चौक

8. गुरुग्राम

9. फरीदाबाद

10. सोनीपत

11. नोएडा

12. गाजियाबाद

13. भिवानी-महेंद्रगढ़

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