नई दिल्ली, जेएनएन। लोकसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के पूर्व विधायकों और पूर्व एवं मौजूदा पार्षदों का रिपोर्ट कार्ड भी देंगे। इसमें प्राप्तांकों का आधार यही रहेगा कि दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर इन नेताओं ने कितनी मेहनत और ईमानदारी से काम किया। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें विधानसभा टिकट की दौड़ में रखा जाएगा अन्यथा इस दौड़ से बाहर कर दिया जाएगा।

इससे साफ है कि लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद प्रदेश कांग्रेस कई कड़े फैसले लेने की तैयारी में है। जो पूर्व विधायक करीब छह महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में टिकट पाने के इंतजार में है, लेकिन लोकसभा चुनाव में कोई मेहनत नहीं की, वह टिकट भूल ही जाएं। प्रदेश कांग्रेस ने ऐसे लगभग दो दर्जन पूर्व विधायकों को चिह्नित भी कर लिया है, लेकिन उन नामों को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि ये वो पूर्व विधायक हैं जिनके बारे में गाहे-बगाहे यह बताया गया कि उनका सहयोग नहीं मिल रहा। इनके बारे में संबंधित लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशियों के साथ साथ ब्लॉक अध्यक्षों ने भी शिकायत की है। बहुत से मौजूदा और पूर्व निगम पार्षद भी विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। उनकी छवि और क्षमता के आधार पर पार्टी उनके टिकट को लेकर भी गंभीर है। आम आदमी पार्टी और भाजपा के भी कई मौजूदा एवं पूर्व विधायक कांग्रेस के संपर्क में हैं। पार्टी उनके लिए भी जगह बनाने में लगी है।

संभवत: यह रिपोर्ट कार्ड प्रदेश कांग्रेस विधानसभा चुनावों से पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को भी सौंप देगी। यही वजह है कि कई पूर्व विधायकों ने तो पहले ही अपना रास्ता बदल लिया है, जबकि बहुत से पूर्व विधायक अब भी आस में हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस 2014 के बाद से ही प्रदेश में वनवास काट रही है। वह किसी भी ऐसे नेता को टिकट नहीं देगी, जिसकी छवि खराब हो चुकी है या फिर कार्यकर्ताओं से व्यवहार ठीक नहीं है। 

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Posted By: Krishna Bihari Singh