नई दिल्ली, जेएनएन। गठबंधन पर अंतिम निर्णय में लगातार हो रही देरी से कांग्रेस में टिकट के दावेदार और कार्यकर्ता दोनों ही गफलत में हैं। दावेदार जहां आलाकमान के स्पष्ट रुख का इंतजार करते नजर आते हैं वहीं कार्यकर्ता समझ ही नहीं पा रहे कि क्या करें। आलम यह है कि प्रदेश कार्यालय में भी छोटी मोटी बैठकें भले ही हो रही हों, इससे इतर कुछ नहीं हो रहा।

विडंबना यह है कि अभी तक न तो पार्टी का कोई चुनावी एजेंडा तैयार हुआ है और न ही प्रचार अभियान का प्रारूप। दरअसल, गठबंधन की संभावनाओं के मद्देनजर सभी इस सोच के साथ फिलहाल हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं कि पहले कुछ फाइनल हो जाए, उसके बाद ही आगे की रूपरेखा तैयार की जाए।

लोकसभा चुनाव से संबद्ध एक समिति के अध्यक्ष ने बताया कि पहले यह तो तय हो जाए कि चुनाव कितनी सीटों पर लड़ा जाना है? चुनाव अकेले लड़ा जाना है या गठबंधन में? तस्वीर साफ होने पर ही पार्टी आगे कोई कदम बढ़ाएगी। यही वजह है कि नई दिल्ली सीट से संभावित प्रत्याशी अजय माकन को छोड़कर किसी सीट पर कोई संभावित प्रत्याशी अपना प्रचार भी नहीं कर रहा।

उधर, बुधवार को भी प्रदेश प्रभारी पीसी चाको आलाकमान के फोन कॉल का इंतजार करते रहे। उन्होंने राहुल गांधी को उनका फैसला जानने के लिए एसएमएस भी भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी के लिए भी गठबंधन पर फैसला लेना खासी पेचीदगी भरा है। प्रदेश कांग्रेस जहां इसे लेकर दो गुटों में बंट गई है वहीं महागठबंधन के कुछ साथी जैसे ममता बनर्जी, फारूक अब्दुल्ला, शरद पवार और शरद यादव राहुल पर दिल्ली में आम आदमी पार्टी से गठबंधन के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं।

महागठबंधन के नेताओं कहना है कि देश भर में गठबंधन करके और दिल्ली में न करके संदेश भी गलत जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक राहुल संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) अध्यक्ष सोनिया गांधी और बहन प्रियंका गांधी से भी इस बाबत सलाह करना चाह रहे हैं। दूसरी तरफ चर्चा इस बात की भी है कि आप और कांग्रेस के बीच गुपगुच ढंग से सीटों के बंटवारे पर विचार हो रहा है। सारी स्थिति स्पष्ट होने पर ही गठबंधन की घोषणा की जाएगी, उससे पहले नहीं।

Posted By: Mangal Yadav

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप