एलेप्पी एक्स्प्रेस से भादो माझी। Lok  Sabha Election 2019 टाटा-एलेप्पी एक्सप्रेस की जनरल बोगी। पसीने से नहाए लोगों की रंग-बिरंगी खुशबू। बदबू कहें तो ज्यादा ठीक, लेकिन शिष्टाचार भी कोई चीज होती है। है कि नहीं...! खैर, मशक्कत के बाद धकियाते हुए किसी तरह बोगी में चढ़ तो गया, लेकिन यह मशक्कत किसी जंग जीतने से कम नहीं। चढऩे पर भी शुकून नहीं, क्योंकि अब बारी दूसरों की थी, जो मुझे धकियाते हुए जगह तक पहुंचा गए। किसी तरह बैठकर एडजस्ट हो ही रहा था कि 'रुमाल छापÓ यात्री ने नजरें टेढ़ी कर ली।

इससे पहले कुछ कहता, अपन ने ही शिष्टाचार में पूछ लिया-आपकी सीट है क्या? कुछ बोला नहीं, बस सीट कब्जिया लिया। कोने में अपन भी एडस्ट हो लिए। ट्रेन चलने लगी तो बोगी में खड़े होने तक की जगह नहीं बची। बोगी में इतनी भीड़ थी, लेकिन बावजूद वहां गजब का सन्नाटा पसरा रहा। चुनावी चर्चा तो दूर भला-बुरा तक कोई बतिया नहीं रहा था। सब के चेहरे से थकान पसीना बन टपक रही थी। सन्नाटे को चीरते किसी ने बात छेड़ी, और आवाज आई-'दू गो कंपूटर का सामान लिए हैं, दुन्नो में अलग-अलग जीएसटी काट लिया। एगो सेंटर जीएसटी और एगो स्टेट जीएसटी।

गजबे है भाई...।Ó पता चला भाईसाब अपने साथ आए साथी से बतिया रहे थे, लेकिन सामने से उनका साथी बात आगे बढ़ाए तब तो चर्चा चुनाव तक पहुंचे। सबने पांच मिनट का पॉस (चुप्पी) मार दिया तो, अपन ने ही चर्चा को आगे बढ़ा दिया। बोले-'का बोले भाईसाब...?Ó पहले तो सामने वाला समझा नहीं, समझा तो बोला-'अरे जीएसटी जंजाल बन गया। पहले सरकार बोली, अब पूरे देश में एगो टैक्स लगेगा, लेकिन ईहो दो भाग में बांट दिया।Ó

बातचीत व साथ ले जा रहे सामान के कार्टून देख लगा कि बंदा छोटा-मंझला व्यवसायी होगा। खैर, इसके बाद तो चर्चा चल पड़ी। उसका साथी बोला-'चुनाव आइये गया है। पता चलेगा मोदी को...?Ó उसका इतना बोलना था कि माथे पर टीका लगाए, गले में गमछा बांधे व्हाइट शर्ट-पैंट पर चप्पल पहने एक भाईसाब, मुंह के अंदर ही पान को किनारे करते चेहरा ऊपर कर गड़...गड़... (जैसे पान खाकर बोलने पर आवाज आती है) करते हुए बोले-'भैया मोदी नहीं मोदी जी बोलिए।Ó पान वाले भाईसाब का एग्र्रेशन देख लगा माहौल गड़बड़ाएगा, चर्चा गरम होगी

वे आगे बोले-'सबकुछ चकाचको चाहिए, पैसो नहीं देना, ऐसा थोड़े होता है। सरकार टैक्स से ही न पैसे लेकर ट्रेन साफ करेगी, सड़क साफ करेगी। ई तो बहुते साफ-सुथरी सरकार है। कोई दाग नहीं। स्वच्छता...स्किल इंडिया...स्टार्टअप...बालाकोट...सर्जिकल स्ट्राइक किया। किसी में दम था।Ó अब तो कंपूटर वाले भाइसाब भी बमक पड़े-'बोले सब ब्रांडि़ंग है भैया। स्वच्छता...कहां है। खाली पीएम के पैर धोने से हो जाएगा का..? स्टार्टअप...धोखा...। स्किल इंडिया...बड़का धोखा।

...हां ई ठीक है कि सर्जिकल स्ट्राइक किए। ईहे एगो ठीक काम किए। ईहो नहीं किए होते तो इस बार तो मोदी जी की नैया फंस जाती। किस्मत उनका ठीक है।Ó इसी बीच भात-सब्जी प्लास्टिक में लपेट उसकी निगरानी में काफी देर से मेहनत करते दिख रहे एक दुबले पतले महानुभाव ने भी वन लाइनर बोल दिया-'हां भैया, पाकिस्तान को औकात बताकर मोदी जी ने बहुते मरद वाला काम किया है।Ó पास में बैठे अन्य लोग भी सिर हिला समर्थन करने लगे।

मुद्दा इतने पर फंसता दिख अपन ने सवाल दागा-'ई सब से हमको-आपको का फायदा?Ó इतना बोलना था कि सफेद कुर्ते व बढ़ी दाढ़ी वाले बुजुर्ग से व्यक्ति ने कहा-'कौनो फायदा नहीं। सब झूठे बड़का-बड़का बात बतिया रहा है। मोदी जी खाली बिदेश घूमते हैं। पाकिस्तान बिन बुलाए चाय पी आते हैं। लाखों का सूट पहनते हैं। 15 लाख देने की बात बोल जुमलेबाजी करते हैं।Ó इतने में 18-19 साल का छात्र लग रहा युवक टोक देता है-'हां तो आपके राहुल बाबा भी तो 72 हजार खाते में भेजेंगे बोल रहे हैं...ई जुमलेबाजी नहीं है का?Ó दाढ़ी वाले बुजुर्ग को यह टोकना पसंद न आया, बाले-'मेरा राहुल..., का मतलब है।Ó बात गरमाने की ओर जाती, इससे पहले फिर हमने मुद्दा उछाला-'जमशेदपुर-सिंहभूम से के जीतेगा, क्या लगता है...?Ó इसपर चांडिल के दिलीप राय (बोगी में चढ़ते ही परिचय हुआ था) बोले-'दुन्नो जगह बीजेपी से थोड़े न गिलुआ-बिधुत लड़ रहा है। इहां तो बीजेपी से मोदिए साहेब लड़ रहे हैं।

इंहा ही नहीं, सब्बे जगह, जहां बीजेपी लड़ रहा, उहां मोदिए साहेब तो लड़ रहे। राहुल तो दू ही जगह से लड़ रहे, अमेठी औउर वायनाड।Ó हमारा अगला सवाल था-'काहे? विद्युत-गिलुआ तो वर्तमान सांसद हैं, उन्हें उनके काम पर वोट नहीं मिलेगा क्या?Ó जवाब-'उनके काम से जादा मोदी जी का नाम न है...! मोदी जी ब्रांड हैं। बड़का ब्रांड।Ó इसपर बुजुर्ग ने फिर जवाब दिया। बोले-'हां तो...ब्रांडे से सब काम चल रहा है। काम-धाम होना नहीं...बड़का ब्रांड बने बैठे हैं...। इतने में टीका वाले भाईसाब की आंखे फिर चढ़ गई, लेकिन कुछ बोले नहीं। ट्रेन पूरे रफ्तार भी थी और चर्चा भी।

इतने में सीनी स्टेशन पहुंच गया। ट्रेन यहां कुछ खाली हुई। मन तो था चर्चा को आगे बढ़ाते हुए राजखरसावां स्टेशन तक ले जाने की, लेकिन सीनी स्टेशन में छपने लायक फोटो-वोटो लेकर अपन उतर गए। चलते-चलते सबको बता भी आए कि आप लोगों की चर्चा दैनिक जागरण के इलेक्शन एक्सप्रेस में रिकॉर्ड हो चुकी है और आपलोग कल अखबार में होंगे। इतना सुन कुछ चौंके तो कुछ नंबर मांगने लगे। वहीं कुछ ऐसे भी थे जो बड़ा सा प्रश्नवाचक चिन्ह वाली नजर से मुझे टुकुर-टुकुर देखते रहे। सबको जोहार कहकर अपन ट्रेन से उतर गए और जेहन में चुनाव...चर्चा...मुद्दे...ब्रांडिंग...जुमले जैसे शब्दों पर मंद-मंद मुस्काते वापस टाटा आने की जुगत में लग गए...।

परिचय : 

कंपूटर वाले भाईसाब : महेश साहू (चक्रधरपुर)

कंपूटर वाले के साथी : अजय साहू (चक्रधरपुर)

दाढ़ी वाले बुजुर्ग : नामजन कोंगाड़ी  (मनोहरपुर)

टीका वाले भाईसाब : नरसिम्हा सिंह (खरसावां)

18-19 साल का छात्र : नारायण राय

चांडिल वाले भाईसाब : दिलीप राय (चांडिल) 

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Posted By: Rakesh Ranjan

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