नैनीताल, जेएनएन। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को एक बार फिर हार का मुंह देखना पड़ा। उन्‍हें 433099 ही वोट मिले। लोकसभा चुनाव में नैनीताल सीट से कांग्रेस के प्रत्‍याशी हरीश रावत को भाजपा के प्रत्‍याशी अजय भट्ट ने इतने 339096 वोटों से मात दी। बता दें कि 2017 में हुए उत्‍तराखंड विधानसभा चुनाव में हरीश रावत ने हरिद्वार और किच्‍छा विधानसभा से चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा था।   

राजनीतिक रूप से गिरना और गिरकर फिर से उठ खड़े होना पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की  फितरत है। उन्होंने अपने 40 साल के राजनीतिक जीवन में इसे कई बार दोहराया है। 27 अप्रैल 1948 को मनोहर मनोहर नारी गांव अल्मोड़ा के राजपूत परिवार में जन्मे हरीश रावत की गिनती जमीन से जुड़े नेताओं में होती है। उन्होंने 1980 में स्वर्गीय संजय गांधी की टीम के सदस्य के रूप में संसद में कदम रखने से पहले गांव से लेकर जिला स्तर की राजनीति में काफी सक्रियता दिखाई। उन्होंने इस दौरान कई श्रमिक संगठनों में महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी भी निभाई और 1980 में भाजपा के बड़े नाम मुरली मनोहर जोशी को अल्मोड़ा से पटखनी देकर तहलका मचा दिया। यह उनकी पहली संसद यात्रा थी। इसके बाद उन्होंने आठवीं लोकसभा 1984, नवीं लोकसभा 1989 में भी मुरली मनोहर जोशी को हराया। 1989 वह दौर था जब भाजपा लालकृष्ण आडवाणी के राम मंदिर आंदोलन की रथयात्रा के साए में चुनाव लड़ रही थी। इसके बाद रावत की राजनीतिक किस्मत में पलटा खाया और 1991 से लेकर 1999 तक लगातार 4 चुनाव भाजपा प्रत्याशी से हारे। 1991 में उन्हें भाजपा के जीवन शर्मा और इसके बाद 1996, 1998, 1999 में बच्ची सिंह रावत ने लोकसभा चुनाव में उन्हें हराया।

लगातार हो रही इन हारों ने हरीश रावत को राज के साथ साथ केंद्र की कांग्रेस राजनीति में भी हाशिए पर ला दिया। उनकी किस्मत ने 2000 में उत्तराखंड के उत्तर प्रदेश से अलग होने पर पलटा खाया और पार्टी संगठन ने उन्हें पार्टी प्रदेश पार्टी अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया। रावत ने इस दौरान अपने जुझारू पन से उत्तराखंड में पार्टी संगठन को खड़ा किया और उस में नई जान फूंक दी। 2002 में वह यशपाल आर्य की जगह राज्य सभा में बतौर सांसद पहुंचे।

यह चौथी बार था जब उन्होंने संसद में जगह बनाई। 2009 में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र में परिवर्तन करते हुए हरिद्वार से दांव आजमाया और भाजपा के स्वामी यतींद्रानंद तीन लाख तीस हजार से अधिक मतों से हराकर पांचवी दफे संसद में जगह बनाई। पार्टी ने उनकी जीत को सम्मान दिया और पहले 2009 से 2011 तक श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री और 2012 से 2014 तक जल संसाधन कैबिनेट मंत्री का पद दिया। 

2013 में केदारनाथ में आई आपदा के बाद कांग्रेस संगठन ने 2014 में विजय बहुगुणा को हटाते हुए उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री का दायित्व सौंपा। हालांकि, इसे लेकर कांग्रेस के भीतर जमकर विद्रोह हुआ पर पार्टी संगठन ने किसी की एक न सुनी। रावत 2017 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे, रावत ने धारचूला से भाजपा विधायक की सीट खाली करा उपचुनाव जीत 2014 में राज्य विधानसभा में अपनी जगह बनाई थी।

 इस दौरान 2016 में पार्टी के 9 विधायकों द्वारा भाजपा के पक्ष में पाला बदलकर लेने से वह कई महीने तक संकट में रहे। भाजपा ने उनकी सरकार गिरा दी, लेकिन नैनीताल हाई कोर्ट के माध्यम से दोबारा मुख्यमंत्री बने। विद्रोह करने वाले सभी नौ विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया और 2017 में रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। रावत ने 2017 विधानसभा चुनाव में दो जगह हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा से अपनी किस्मत आजमाइ परवाह दोनों ही जगह भाजपा प्रत्याशियों के हाथों पराजित हुए। हरिद्वार ग्रामीण में भाजपा के स्वामी यतीश्वानंद ने और किच्छा से भाजपा के राजेश शुक्ला ने उन्हें हराया। दोनों ही जगह हरीश रावत विधानसभा चुनाव मतों के हिसाब से भारी अंतर से हारे। इसके बाद कुछ समय वह राजनीतिक तौर पर नेपथ्य में चले गए पर पार्टी संगठन ने उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर उन्हें फिर से सक्रिय कर दिया।

हरीश रावत बोले

कांगेस प्रत्याशी हरीश रावत ने मोदी है तो सब संभव है का दिया बयान। उन्‍होंने कहा कि मोदी ईवीएम टेम्परिंग करना जानते हैं। चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए हरीश रावत ने कहा कि मोदी है तो सब संभव है।

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Posted By: Sunil Negi

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