अंकुर अग्निहोत्री। समाजवादी पार्टी भारत का एक राजनीतिक दल है। इस दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह यादव हैं। समाजवादी पार्टी मुख्यत: उत्तर प्रदेश का दल है। इसकी स्थापना 4 अक्टूबर 1992 को मुलायम सिंह यादव ने की थी। मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के रक्षामंत्री रह चुके हैं। समाजवादी पार्टी ने लोकसभा सहित देश के अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़े हैं।

गठन

1989 से 1992 तक चले राजनीतिक भूचाल से मुलायम उलझन में थे। मंडल और मंदिर मामलों में उन्होंने सख्त रुख अपनाया था। पहले वो वीपी सिंह की जनता दल से नाता तोड़ कर चंद्रशेखर की सजपा में शामिल हुए।कांग्रेस का समर्थन ले उत्तर प्रदेश में सरकार बचाई। लेकिन चंद्रशेखर से मतभेदों के चलते उन्होंने अपना अलग रास्ता ढूंढ़ने का फैसला किया। सितंबर 1992 में मुलायम ने सजपा से नाता तोड़ ही दिया और चार अक्टूबर को लखनऊ में उन्होंने समाजवादी पार्टी बनाने की घोषणा की। चार और पांच नवंबर को बेगम हजरत महल पार्क में उन्होंने पार्टी का पहला राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया।

पहली बार आई सत्ता में

1993 में उत्तर प्रदेश की 422 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव हुए थे। इनमें बसपा और सपा ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। बसपा ने 164 प्रत्याशी उतारे थे, जिनमें से 67 प्रत्याशी जीते थे। सपा ने इन चुनावों में अपने 256 प्रत्याशी उतारे थे। इनमें से उसके 109 जीते थे। भाजपा 177 सीटों तक ही पहुंच सकी। मामला विधानसभा में संख्या बल की कुश्ती तक खिंचा तो यहां सपा और बसपा ने भाजपा को हर तरफ से मात देते हुए जोड़तोड़ कर सरकार बना ली। मुलायम सिंह दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हुए। सपा-बसपा गठबंधन ने चार दिसंबर 1993 को सत्ता की बागडोर संभाल ली

क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीति में स्थिति

समाजवादी पार्टी ने 16वें आम चुनाव तक संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार को बाहरी समर्थन प्रदान किया, पार्टी ने बिहार की राष्ट्रीय जनता दल और लोक जनशक्ति पार्टी के साथ गठबंधन में 2009 का आम चुनाव लड़ा। यह वर्तमान में संसद में तेरहवीं सबसे बड़ी पार्टी है। 2014 के आम चुनावों में पार्टी को केवल 5 सीटों पर जीत मिली। पश्चिम बंगाल में, किरणमय नंदा की पश्चिम बंगाल सोशलिस्ट पार्टी का सपा में विलय हो गया। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में सपा के एक-एक विधायक हैं।

पारिवारिक झगड़ा

अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद यादव परिवार दो गुटों में बंट गया है। उनमें से एक समूह का नेतृत्व उनके पिता के चचेरे भाई राम गोपाल यादव के सहयोग से किया जाता है। प्रतिद्वंद्वी समूह का नेतृत्व शिवपाल सिंह यादव कर रहे हैं। हालांकि शिवपाल सिंह यादव ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देकर एक नई पार्टी का गठन किया है और 2019 के आम चुनाव में उन्होंने अपने उम्मीदवारों को लड़ाने का फैसला किया है।

 

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