राज्य ब्यूरो, मुंबई। कभी कांग्रेस का अभेद्य गढ़ रहे महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना-रिपब्लिकन गठबंधन ने अपना 2014 का प्रदर्शन दोहराते हुए प्रचंड जीत दर्ज की है। अब इस गठबंधन के सामने कुछ ही माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव एक बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं।

अब तक आए महाराष्ट्र के रुझानों व परिणामों में भाजपा-शिवसेना को 41 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं। 2014 में भी इस गठबंधन को 41 सीटें ही मिली थीं। तब शिवसेना-भाजपा के साथ रहे किसान नेता राजू शेट्टी को मिलाकर गठबंधन 42 सीटों तक पहुंचा था। इस बार भाजपा-शिवसेना का साथ छोड़कर कांग्रेस-राकांपा के सहयोग से लड़े राजू शेट्टी भी चुनाव हार गए हैं।

शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को पांच एवं कांग्रेस को सिर्फ एक सीट प्राप्त हुई है। कांग्रेस पिछले चुनाव में मिली दो सीटें भी अपने पास कायम नहीं रख सकी। उसके प्रदेश अध्यक्ष अशोक चह्वाण भी अपने गढ़ नांदेड़ से चुनाव हार गए हैं। राकांपा के भी कई दिग्गजों को हार का मुंह देखना पड़ा है। लेकिन राजग गठबंधन के भी दो महत्त्वपूर्ण सीटों पर करारा झटका लगा है। इनमें से एक केंद्रीय उद्योगमंत्री अनंत गीते रायगढ़ से हार गए हैं, तो केंद्रीय गृहराज्यमंत्री हंसराज अहीर अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार सुरेश धानोरकर से पीछे चल रहे हैं।

महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन एवं मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के लिए ये परिणाम बड़े सकारात्मक मायने रखते हैं। क्योंकि छह माह बाद ही महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव होनेवाले हैं। यदि भाजपा-शिवसेना लोकसभा चुनाव के इन्हीं परिणामों को आगे बढ़ाने की इच्छाशक्ति रखते हुए विधानसभा चुनाव में भी समय रहते गठबंधन कर पाती हैं, तो देश में संख्या की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा राज्य विधानसभा चुनाव में भी भाजपा-शिवसेना गठबंधन की झोली में आ सकता है।

चुनाव परिणाम आने के बाद मिठाई लेकर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के निवास मातोश्री पहुंचकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने इसके संकेत दे भी दिए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना-भाजपा का 25 साल पुराना गठबंधन टूट गया था, जिसका ज्यादा नुकसान शिवसेना को उठाना पड़ा था।

 

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Posted By: Sachin Mishra

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