भोपाल, नईदुनिया। मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। पिछले लोकसभा चुनाव में 26 सीटें मिलने के बाद अब भाजपा के लिए माहौल बदला-बदला है। प्रदेश में उसकी सरकार जा चुकी है और मौजूदा सांसदों के प्रति जगह-जगह गुस्सा सामने आया है।

भाजपा को मध्यप्रदेश से फिर ज्यादा से ज्यादा सीटें जिताने के लिए संघ ने अपनी कोशिशें शुरू कर दी हैं। संघ ने हाल ही में एक सर्वे रिपोर्ट भाजपा को सौंपी है। इसमें मप्र के 26 में से करीब 16 सांसदों के टिकट काटने की सिफारिश की गई है। संघ ने कहा है कि इन सांसदों के खिलाफ जनता के बीच गुस्सा बहुत ज्यादा है, यदि इन्हें फिर से टिकट दिया गया तो हालात मुश्किल हो सकते हैं।

संघ ने कहा है कि एक दर्जन सांसद पिछले पांच साल में अपने क्षेत्र में बहुत कम सक्रिय रहे हैं। क्षेत्र में लोगों से उनका जुड़ाव नहीं है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है, जब संघ जनप्रतिनिधियों के टिकट काटने की सिफारिश कर रहा है। 2018 के विधानसभा चुनावों में भी संघ ने आधे से ज्यादा विधायकों के टिकट काटने की सलाह दी थी, हालांकि भाजपा ने इसे नहीं माना और उसे हार का सामना करना पड़ा।

संघ नाराज था
लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति तय करेगी। राज्य चुनाव समिति प्रत्याशियों का पैनल केंद्र के पास भेजेगी। इसके लिए प्रदेश में रायशुमारी भी हो सकती है। विधानसभा चुनाव में अपने मुताबिक टिकट नहीं बंटने से संघ नाराज भी था। संघ के कई पदाधिकारियों ने चुनाव में भाजपा के लिए काम करने की बजाय चुपचाप घर बैठने का मन बनाया था। बाद में कांग्रेस के वचन पत्र में सरकारी परिसर में संघ शाखाओं पर बैन लगाने की घोषणा से संघ हरकत में आया और भाजपा को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। 

कई सांसदों के खिलाफ लापता के लग चुके हैं पोस्टर
मप्र में भाजपा के कई सांसदों के खिलाफ समय-समय पर लापता होने के पोस्टर लग चुके हैं। इसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से लेकर खजुराहो से सांसद नागेंद्र सिंह, खरगोन सांसद सुभाष पटेल, मुरैना सांसद अनूप मिश्र सहित अन्य शामिल हैं। नागेंद्र सिंह विधानसभा चुनाव लड़े थे और नागौद से विधायक चुने गए हैं। इसलिए अब उनके चुनाव लड़ने की उम्मीदें न के बराबर है। प्रह्लाद पटेल सहित कुछ केंद्रीय मंत्री भी अपनी लोकसभा सीट बदलना चाहते हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बीमार होने से कयास लगाए जा रहे हैं कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगी।

Posted By: Vikas Jangra