नई दिल्ली, जेएनएन। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए मतदान प्रक्रिया खत्म होने के साथ ही टीवी चैनलों पर EXIT POll आने का शुरू हो जाएगा। वोटर्स की राय के आधार पर तैयार किए गए एग्जिट पोल यह तस्वीर दिखाने की कोशिश करेंगे कि आखिर इस बार देश में किस की सरकार बनने जा रही है? इसकी सत्यता पर भले ही कई सवाल उठ चुके हो, लेकिन फिर भी हर किसी को इन एग्जिट पोल का इंतजार है। ऐसे में जागरण डॉट कॉम ने उन एजेंसियों के डायरेक्टर से बातचीत की, जो एग्जिट पोल करवाते हैं और अपने आंकड़े जारी करते हैं। आप भी जान लीजिए- आखिर कैसे एग्जिट पोल करवाए जाते हैं और किस तरह लोगों से बात कर सीटों का आकलन किया जाता है...

जागरण डॉट कॉम के साथ खास बातचीत में C-Voter के यशवंत देशमुख ने एग्जिट पोल करवाने और उसकी सत्यता को लेकर बातचीत की। उन्होंने एग्जिट पोल, उसके सैंपलर साइज, सीटों के निर्धारण को लेकर बात की।ज्यादा से ज्यादा लोग तक पहुंचना हमारा उद्देश्य होता है। साढे पांच लाख से अधिक मतदाताओं से बात करके देश का रुझान तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि सटीक रुझान हासिल करने के लिए हर वर्ग के आधार पर साक्षात्कार किए जाते हैं।

वहीं सीएनएक्स के निदेशक भावेश झा ने बताया कि 'भले ही सैंपल साइज छोटा हो, लेकिन उसका डिस्ट्रीब्यूशन ज्यादा अहम होता है। दरअसल, हर क्षेत्र में जाति, धर्म, क्षेत्र के लोगों के आधार पर उसका डिस्ट्रीब्यूशन करना होता है। हमारा सैंपल साइज 15 हजार होता है, लेकिन कई इससे ज्यादा का सैंपल साइज रखते हैं। वहीं संसदीय सीट में जो फैक्टर होते हैं उनके आधार पर इंटरव्यू किए जाते हैं।' साथ ही उन्होंने कहा, 'वोट प्रतिशत के आधार पर सीटों को आंकड़ा निकलना काफी मुश्किल होता है। हर राज्य के आधार पर इसका निर्धारण किया जाता है। वोट शेयर को सीट में कंवर्ट करने का सबका अलग-अलग मैथड है।' वीडियो में देखें पूरी बातचीत।

इसी क्रम में Cicero के धनंजय जोशी ने बताया कि एग्जिट पोल के लिए कितनी तैयारी करनी होती है। इसके लिए किन बातों का विशेष ध्‍यान रखता होता है? सर्वे करने के लिए सैम्‍पल साइज कितना बड़ा होता है। किसी क्षेत्र में जाति और वर्ग का क्लासिफिकेशन कैसे होता है। अंत में जब डाटा आ जाता तो लोगों को रुझान कैसे दिखाया जाता है। इस दौरान उन्होंने सैंपल साइज, डाटा फील्ड, डाटा की क्वालिटी चेक को लेकर विस्तार से बातचीत की। वीडियो में देखें पूरी बातचीत-

क्या होते हैं एग्जिट पोल?
चुनावी सर्वे से होकर ही एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आते हैं। एग्जिट पोल में एक सर्वे के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि आखिर चुनाव परिणाम किसके पक्ष में आ रहे हैं। एग्जिट पोल हमेशा वोटिंग पूरी होने के बाद ही दिखाए जाते हैं। इसका मतलब यह है कि सभी चरण के चुनाव होने के बाद ही इसके आंकड़े दिखाए जाते हैं। ऐसा नहीं है कि हर चरण के बाद एक्जिट पोल दिखा दिया जाए। वोटिंग के दिन जब मतदाता वोट डालकर निकल रहा होता है, तब उससे पूछा जाता है कि उसने किसे वोट दिया। इस आधार पर किए गए सर्वेक्षण से जो व्यापक नतीजे निकाले जाते हैं, इसे ही एग्जिट पोल कहते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 15 फरवरी 1967 को पहली बार नीदरलैंड में इसका इस्तेमाल किया था।

कितने होते हैं सच?
एग्जिट पोल के रिजल्ट और वोटिंग के असली रिजल्ट कभी कभी समानांतर चलते हैं तो कभी बिल्कुल अलग हो जाते हैं। तमिलनाडु चुनाव 2015, बिहार विधानसभा 2015 में यग गलत साबित हुए थे। वहीं साल 2004 लोकसभा चुनाव में सभी एग्जिट पोल फेल हुए और कांग्रेस ने सरकार बनाई। उसके बाद साल 2014 में सही साबित हुए, क्योंकि लोक सभा चुनाव में मोदी लहर का अनुमान एग्जिट पोल्स में दिखा था। 

लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Mohit Pareek

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप