लखनऊ, जेएनएन। राजनीति की खादी अब उतनी सफेद नहीं रह गई है। बड़े-बड़े माफिया से लेकर दबंग सियासत में हैं। इन्हीं परिस्थितियों ने 'दागी नेता' जैसी संज्ञा को राजनीतिक दलों की एक श्रेणी जैसा बना दिया है। मगर, निर्वाचन आयोग ने ऐसे दागियों पर शिकंजा और मजबूती से कसा है। लोकसभा प्रत्याशियों को खुद अपने आपराधिक इतिहास का प्रचार करना होगा।

राजनीति में शुचिता लाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन नामांकन पत्र में आपराधिक रिकॉर्ड के उल्लेख का नियम तो पहले से बना रखा है। मगर, इस बार नियम को पहले से सख्त किया गया है। अब लोकसभा प्रत्याशियों को समाचार पत्र और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अलग-अलग तारीखों में तीन बार विज्ञापन देने होंगे। उसमें अपने आपराधिक रिकॉर्ड का पूरा उल्लेख करना होगा।

इसके साथ ही राजनीतिक दलों को भी अपने ऐसे प्रत्याशियों का विज्ञापन तीन बार प्रकाशित करना होगा। आयोग की मंशा यही है कि इस प्रक्रिया के बाद मतदाता अपने प्रत्याशी के आचरण के बारे में भी जान सकेगा। 

Posted By: Umesh Tiwari

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