लखनऊ, जेएनएन। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने आज जारी अपनी 21वीं सूची में उत्तर प्रदेश से सात प्रत्याशियों का नाम घोषित किया है। भाजपा ने संतकबीर नगर में विधायक पर जूतों की बौछार करने वाले शरद त्रिपाठी का टिकट काट दिया है। उनके पिता तथा उत्तर प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी को भाजपा ने देवरिया से प्रत्याशी बनाया है।

भाजपा ने पांच सांसदों का टिकट फिर काटा है। अब सिर्फ घोसी सीट पर प्रत्याशी की घोषणा बाकी है। पार्टी ने योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा को अम्बेडकरनगर से प्रत्याशी बनाया है। भाजपा ने प्रतापगढ़ अपना दल सांसद हरिवंश सिंह का टिकट काटा है। यहां से पार्टी ने अपना दल विधायक संगम लाल गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है।  

जौनपुर से पार्टी के सांसद केपी सिंह टिकट बचाने में कामयाब रहे हैं। देवरिया से सांसद कलराज मिश्रा चुनाव लड़ने से मना कर चुके हैं। संतकबीरनगर से सांसद शरद त्रिपाठी को अनुशासनहीनता का खामियाजा उठाना पड़ा है। भदोही से सांसद वीरेन्द्र सिंह मस्त को बलिया से टिकट दिया गया है। पार्टी ने संतकबीर नगर से प्रवीण निषाद को प्रत्याशी बनाया है। प्रवीण निषाद फिलहाल गोरखपुर से सांसद हैं।

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प्रवीण निषाद ने गोरखपुर सीट पर हुए उपचुनाव में सपा के टिकट पर बसपा के समर्थन से भाजपा प्रत्याशी को हराया था। उनकी यह जीत पूरे देश में चर्चा का विषय बनी थी। हाल ही में प्रवीण निषाद ने अपने पिता के साथ भाजपा से गठजोड़ कर लिया था, जिसके बाद अब उन्हें शरद त्रिपाठी की जगह संतकबीरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाया गया है।

भोजपुरी फिल्म के अभिनेता रवि किशन को पार्टी ने गोरखपुर से प्रत्याशी बनाया है। घोसी लोकसभा सीट को छोड़कर पूर्वांचल में सभी सीटों पर प्रत्याशियों की सूची तय हो चुकी है। चर्चा है कि घोसी लोकसभा सीट भाजपा सुभासपा को देना चाह रही थी मगर सीटों के बंटवारे से असंतुष्ट सुभासपा ने अलग राह चुन ली है।   

पार्टी ने प्रतापगढ़ से अपना दल के विधायक संगम लाल गुप्ता, भदोही से रमेश बिंद, संतकबीर नगर से निषाद पार्टी के प्रवीण निषाद, देवरिया से डॉ. रमापति राम त्रिपाठी, जौनपुर से डॉ. केपी सिंह, गोरखपुर से रवि किशन व अम्बेडकरनगर से मुकुट बिहारी वर्मा को प्रत्याशी बनाया है। 

भाजपा ने सांसद केपी पर जताया भरोसा

भाजपा ने जौनपुर लोकसभा से प्रत्याशी को लेकर चल रही सभी अटकलों पर विराम लगा दिया। सांसद कृष्ण प्रताप सिंह (केपी सिंह) को पार्टी ने उम्मीदवार घोषित कर दिया।  छात्र जीवन से विद्यार्थी परिषद फिर भाजपा में सक्रिय केपी सिंह प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री स्व उमानाथ सिंह के पुत्र हैं। 2014 में ये 38 साल की अवस्था मे जौनपुर से सांसद चुने गए।

पार्टी ने इन्हें विचार मंथन के बाद दोबारा मौका दिया है। जनसंघ और भाजपा के पुराने नेता रहे इनके पिता उमानाथ सिंह 1967 में पहली बार बयालसी से जनसंघ से विधायक चुने गए। इसके बाद वे 1971 फिर 1989 और 91 में भाजपा से जीते। कल्याण सिंह की सरकार में जेल मंत्री रहे उमानाथ सिंह की भाजपा के बड़े नेताओं और संघ के पदाधिकारियों से मधुर रिश्ते थे। केपी सिंह मूलतः जफराबाद के महरुपुर और शहर में नखास मोहले के निवासी हैं।

संघर्ष भरा जीवन है भाजपा प्रत्याशी संगम लाल का

प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर सदर विधायक संगम लाल गुप्ता का जीवन संघर्षों से भरा रहा है । कहते हैं कि इनके परिवार में कोई भी बच्चा जीवित नहीं रहता था, तो उनकी माता ने संगम जाना शुरू कर दिया। बहुत दिनों बाद बेटे का जन्म हुआ, उसका नाम संगम लाल गुप्ता रखा गया। सदर विकास खंड के कटरा मेदनीगंज निवासी स्वर्गीय कड़ेदीन गुप्ता के पुत्र संगम लाल ने जब प्रतापगढ़ में एयरटेल फैक्ट्री खुली तो वहां अनाज सप्लाई करने का काम शुरू किया। आर्थिक तंगी के चलते वह मुंबई गए और वहां पर प्राइवेट नौकरी की। इसके बाद स्लम एरिया में काम करने वाले फिल्मी जगत के लोगों से उनकी मुलाकात हुई। कड़ी मेहनत से उन्होंने वहां काम करना शुरू कर दिया। आज वह मुंबई के बहुत बड़े बिल्डर हैं। आर्थिक तंगी की वजह से इनकी पढ़ाई अधिक नहीं हो सकी । वह कक्षा 8 पास हैं ।

शुरू से ही भाजपा से जुड़े रहे संगम लाल ने वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के लिए प्रयास किया, लेकिन टिकट नहीं मिल सका। इसके बाद वर्ष 2017 में भी इन्होंने भारतीय जनता पार्टी से विधानसभा सदस्य का चुनाव लड़ने की जोर आजमाइश की। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के माध्यम से इन्हें भाजपा समर्थित अपना दल एस से सदर क्षेत्र से टिकट मिला और संगम लाल ने समाजवादी पार्टी के विधायक रहे नागेंद्र सिंह यादव मुन्ना को हरा कर विजय हासिल की। अब भारतीय जनता पार्टी ने संगम लाल को प्रतापगढ़ संसदीय सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है।

भाजपा के 21 सांसदों की जगह दूसरे उम्मीदवार

भाजपा मछलीशहर के सांसद रामचरित निषाद, कानपुर के सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी, बलिया के सांसद भरत सिंह, कुशीनगर के राजेश पांडेय, बाराबंकी की प्रियंका रावत, रामपुर के नैपाल सिंह, इटावा के अशोक दोहरे, हाथरस के राजेश कुमार दिवाकर, संभल के सत्यपाल सैनी, शाहजहांपुर में केंद्रीय मंत्री कृष्णा राज, मिश्रिख में अंजू बाला, हरदोई में अंशुल वर्मा और फतेहपुर सीकरी के सांसद चौधरी बाबूलाल, बांदा के सांसद भैरो मिश्रा, अंबेडकरनगर के हरिओम पांडेय, संतकबीरनगर के शरद त्रिपाठी, राबर्ट्सगंज के सांसद छोटेलाल खरवार का अब तक टिकट काट चुकी है। झांसी की सांसद उमा भारती व देवरिया के सांसद कलराज मिश्र दोनों चुनाव लड़ने से मना कर चुके थे। बहराइच की सांसद सावित्री बाई फुले भाजपा छोड़कर पहले ही कांग्रेस से, जबकि इलाहाबाद के सांसद श्यामाचरण गुप्ता बांदा से सपा का टिकट हासिल कर चुके हैं।

जातीय संतुलन बनाने की कोशिश

भाजपा ने 17 आरक्षित सीटों पर दलितों की विभिन्न उप जातियों को मौका दिया है, जबकि ब्राह्मण-क्षत्रिय मिलाकर 32 सवर्ण और 28 पिछड़ी जाति के उम्मीदवार दिये हैं। पिछड़ी जाति के उम्मीदवारों में सर्वाधिक कुर्मी बिरादरी के सात उम्मीदवार दिये हैं, जबकि पांच जाट, चार मौर्य व सैनी, चार मल्लाह और तीन लोध उम्मीदवार भी दिये हैं।

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Posted By: Dharmendra Pandey

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