नई दिल्ली, प्रेट्र । अंतिम चरण के 19 मई को होनेवाले मतदान के लिए पश्चिम बंगाल में आठ प्रमुख राजनीतिक दलों ने शुक्रवार को 16 आयोजन करने की तैयारी की थी। लेकिन चुनाव प्रचार का समय कम किए जाने के साथ ही इन सभी कार्यक्रमों पर पानी फिर गया।

विगत बुधवार को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के नौ संसदीय क्षेत्रों में चुनाव प्रचार के समय में कटौती करते हुए इसे गुरुवार को ही रात दस बजे तक खत्म करने का आदेश दिया था। निर्धारित समय से एक दिन पहले ही प्रचार खत्म करने का कारण कोलकाता में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, कांग्रेस, माकपा, भाकपा, बसपा, ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक और रेव्यूल्यूशनरी सोशलिस्ट फ्रंट ने कुल 16 कार्यक्रमों का आयोजन किया था। इन आयोजनों में जुलूस और बैठकें शामिल हैं। गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, भाजपा, बसपा, भाकपा और माकपा ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रशासन से कम से कम बीस चुनावी आयोजनों की अनुमति मांगी है। इसमें जुलूस, बैठकें और नुक्कड़ सभाएं शामिल हैं।

सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग ने योजनाबद्ध कार्यक्रमों को देखते हुए गुरुवार को बारीकी से फैसला लिया। पश्चिम बंगाल में सुबह के बजाय गुरुवार की रात से चुनाव प्रचार पर रोक लगाई ताकि राजनीतिक दलों के वोट मांगने के अधिकारों का पूर्णत: हनन न हो।

कई राजनीतिक दलों ने राज्य की नौ लोकसभा सीटों पर गुरुवार की सुबह से चुनाव प्रचार नहीं रोकने पर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि आयोग ने राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों को अप्रभावित रखने के लिए ऐसा कदम उठाया है। ध्यान रहे कि अब पश्चिम बंगाल में गुरुवार को रात दस बजे चुनाव प्रचार खत्म होगा। अन्यथा यह प्रचार शुक्रवार को शाम छह बजे ही खत्म होना था। बंगाल के जिन संसदीय क्षेत्रों में चुनाव प्रचार की अवधि कम हुई है, उनके नाम हैं-दमदम, बरासात, बसीरहाट, जयानगर, मथुरापुर, डायमंड हार्बर, जादवपुर, कोलकाता दक्षिण और कोलकाता उत्तर हैं।

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