लाखनऊ, जेएनएन। लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर मंगलवार को तीसरे चरण का मतदान है। इन सभी सीटों पर राजनीति के दिग्गज चुनाव मैदान में हैं। आइए जानते हैं क्या कहता है इन सीटों पर राजनीति का गणित।

मुरादाबाद

मुरादाबाद सीट को मुस्लिम मतदाता प्रभावित करते हैं। इस सीट से भाजपा ने एक बार फिर मौजूदा सांसद सर्वेश कुमार सिंह पर भरोसा जताया है, वहीं समाजवादी पार्टी से डॉ एसटी हसन मैदान में हैं। कांग्रेस की ओर से युवा शायर इमरान प्रतापगढ़ी चुनाव लड़ रहे हैं। 2014 की मोदी लहर में भाजपा ने पहली बार इस सीट को फतह किया था। उस वक्त भाजपा के सर्वेश सिंह ने सपा के एसटी हसन को करीब 87 हजार वोटों से हराया था। बसपा के हाजी मोहम्मद याकूब को 1 लाख 60 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। इस सीट पर करीब 45 फीसद मुस्लिम मतदाता हैं।

रामपुर

रामपुर सीट पर सियासी अदावत की जंग लड़ी जा रही है। समाजवादी पार्टी से आजम खां हैं तो भाजपा ने जयाप्रदा को मैदान में उतारा है। इस सीट से कांग्रेस ने संजय कपूर को टिकट दिया है। इस सीट पर मुस्लिम मतदाता 50 फीसद से ज्यादा है। 2014 के चुनाव में भाजपा महज 23 हजार वोटों से जीत पाई थी। उस वक्त कांग्रेस के नबाब नाजि़म अली को करीब डेढ़ लाख और बसपा के अकबर हुसैन को 81 हजार वोट मिले थे।

बदायूं

बदायूं सीट यादव परिवार और समाजवादी पार्टी का गढ़ है। इस सीट से धर्मेंद्र यादव सांसद हैं और एक बार फिर से उनको मौका दिया गया है। धर्मेंद्र यादव के सामने स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य को भाजपा ने टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस की ओर से सलीम इकबाल शेरवानी मैदान में हैं। इस सीट पर समाजवादी पार्टी के परंपरागत वोटर यादव और मुस्लिमों की बहुलता है। संघमित्रा इससे पहले 2014 में बीएसपी के टिकट पर मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनाव लड़ चुकी हैं।

संभल

संभल लोकसभा सीट को भी यादव परिवार का गढ़ माना जाता है। इस सीट पर एसपी के शफीकुर्रहमान वर्क का मुकाबला भाजपा के परमेश्वर लाल सैनी से है। कांग्रेस की ओर से फजले मसूद यहां पर किस्मत आजमा रहे हैं। संभल से मुलायम सिंह यादव 2 बार सांसद चुने गए हैं। 2014 में पहली बार भाजपा यहां से जीत दर्ज की। पिछली बार सपा-बसपा में वोट बंटवारे का फायदा भाजपा को मिला था। इस बार मुकाबला कड़ा माना जा रहा है। 2014 के चुनाव में इस सीट पर भाजपा करीब 5000 वोटों से जीत पाई थी।

मैनपुरी

मैनपुरी लोकसभा सीट से एक बार फिर मुलायम सिंह यादव चुनाव मैदान मे हैं। भाजपा ने प्रेम सिंह शाक्य को मैदान में उतारा है। प्रेम सिंह शाक्य पिछले चुनाव में भी मुलायम सिंह यादव से शिकस्त खा चुके हैं। भाजपा सवर्ण वोटर के सहारे इस सीट को जीतने की आशा कर रही हैं, लेकिन फिलहाल मुलायम सिंह को इस सीट पर कोई चुनौती मिलती दिखाई नहीं दे रही हैं।

पीलीभीत

पीलीभीत से भाजपा के वरुण गांधी चुनाव मैदान में हैं। इस सीट पर उनका मुकाबला एसपी के हेमराज वर्मा से है। आंकड़ों पर अगर गौर करें तो 1989 से यह सीट मेनका गांधी या वरुण गांधी के पास रही है। इस सीट पर हिंदू वोटर के साथ मुसलमान वोटर का भी असर देखा जाता है। करीब 17 लाख मतदातओं वाली इस सीट पर 30 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं।

बरेली

बरेली भाजपा के प्रभाव वाली सीट रही है। इस सीट पर लगातार संतोष गंगवार का कब्जा रहा है। संतोष गंगवार यहां से 1989 से जीतते आ रहे हैं। एसपी ने यहां से भगवत शरण गंगवार को और कांग्रेस ने प्रवीण सिंह को टिकट देकर मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश की है। इस सीट पर 40 फीसद से ज्यादा ओबीसी वोटर हैं और 21 फीसद आबादी एससी मतदाता की है वहीं मुस्लिम और सवर्ण वोटर करीब 20-20 फीसदी हैं।

फिरोजाबाद

फिरोजाबाद में इस बार पार्टी से ज्यादा परिवारवाद की लड़ाई देखने को मिल रही है। इस सीट पर यादव परिवार की जंग दिखने को मिल रही है। समाजवादी पार्टी की ओर से अक्षय यादव मैदान में हैं तो उनके चाचा शिवपाल यादव उनके खिलाफ खड़े हुए हैं। वहीं भाजपा ने इस सीट से चन्द्रसेन को उम्मीदवार बनाया है। 16 लाख से ज्यादा वोटर वाली इस सीट पर करीब 5 लाख वोटर यादव हैं और 3 लाख लोध हैं।

आंवला

आंवला लोकसभा सीट से भाजपा ने एक बार फिर मौजूदा सांसद धर्मेन्द्र कुमार पर भरोसा जताया है। पिछले चुनाव की यदि बात करें तो धर्मेन्द्र कुमार ने इस सीट से एसपी के कुंवर सर्वराज सिंह को 2 लाख 38 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। फिलहाल उनका मुकाबला बीएसपी की रुची वर्मा से है। वहीं कांग्रेस ने आवलां से सर्वराज सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। 2009 में इस सीट पर मेनका गांधी जीती थी।

एटा

एटा सीट को यादव परिवार का गढ़ माना जाता है, लेकिन पिछले दो चुनाव की यदि बात करें तो इस सीट पर कल्याण सिंह परिवार का कब्जा है। 2009 में कल्याण सिंह भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़े थे और लोकसभा पहुंचे थे। 2014 में उनके बेटे राजवीर भाजपा के टिकट पर यहां से सांसद चुने गए। करीब 16 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर सबसे ज्यादा ढाई लाख वोटर लोध राजपूत हैं और करीब इतने ही शाक्य मतदाता हैं। जबकि ढाई लाख मतदाता यादव जाति के हैं, जिसके दम पर एसपी यहां लगातार दो लोकसभा चुनाव जीती थी। 

Posted By: Umesh Tiwari

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