नई दिल्‍ली, जेएनएन। लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम सामने आ गए हैं और मोदी की सुनामी में विपक्ष बह गया है। नतीजों के बाद साफ हो गया है कि अब भी देश में मोदी मैजिक बरकरार है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने 2014 में मिली जीत को भी कहीं पीछे छोड़ दिया, तब भाजपा को 282 सीटें मिली थीं। इस बार भी भाजपा ने अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। भाजपा ने 542 में से 290 सीटें जीत ली हैं और 13 पर वह आगे चल रही है। इस तरह अकेले भाजपा के खाते में 303 सीटें आ रही हैं। उधर, कांग्रेस ने 50 सीटों पर दर्ज की है और वो 2 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, कई राज्यों जैसे दिल्ली, हिमाचल, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मुंबई सहित कई राज्यों में कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई है।

चुनाव आयोग के मुताबिक शुक्रवार सुबह 7.30 बजे लोकसभा की 542 सीटों में से 511 सीटों की घोषणा हो चुकी है। भाजपा अब तक 290 सीटों पर जीत चुकी है और 13 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस 50 सीटें जीत चुकी है। 2 सीटें पर आगे चल रही है। तृणमूल कांग्रेस 19 सीटें चुकी है और 3 सीटों पर आगे चल रही है। जनता दल यूनाइटेड 16 सीटें जीत चुकी है। डीएमके 22 सीटें जीत चुकी है और एक सीट पर आगे चल रही है। शिवसेना 18 सीट जीत चुकी है। आंध्र प्रदेश की वाईएसआरसीपी 21 सीटें जीत चुकी है और 1 सीट पर आगे चल रही है। तेलंगाना राष्‍ट्र समिति नौ सीटें जीत चुकी है। बहुजन समाज पार्टी नौ सीटें जीत चुकी है और एक पर आगे चल रही है।

मोदी बोले- जीवन का हर पल देश के लोगों के लिए समर्पित

लोकसभा चुनाव में भाजपा और राजग की प्रचंड जीत के बाद भाजपा कार्यालय पर लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनके जीवन का हर पल देश के लोगों के लिए समर्पित होगा। उन्होंने कहा कि देश में अब सिर्फ दो जाति हैं- गरीब और गरीबी को दूर करने की इच्छा रखने वाले लोग। दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 130 करोड़ हिंदुस्तानियों ने आज फकीर की झोली भर दी। लगातार दूसरी बार बहुमत मिलने को बड़ी और बढ़ी हुई जिम्मेदारी बताते हुए मोदी ने कहा कि वह बद इरादे और बदनीयत से कोई काम नहीं करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह खुद अपने लिए कभी भी कुछ नहीं करेंगे। मोदी ने कहा कि बीजेपी कभी दो सीटों तक सीमित थी और आज लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत से सत्ता में आ रही है लेकिन पार्टी ने न कभी संस्कार छोड़ा, न आदशरें को छोड़ा।

इन राज्‍यों में नहीं खुला कांग्रेस का खाता

लोकसभा चुनावों में 18 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश ऐसे हैं जहां पर कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला है। जिन बड़े राज्यों से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हुआ है उनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और ओडिशा हैं। छोटे राज्यों में पार्टी के प्रदर्शन की बात करें तो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड में भी पार्टी को निराशा हाथ लगी है। इतना ही नहीं अंडमान और निकोबार, दादरा नगर हवेली, दमन-दीव, लक्षद्वीप, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम और त्रिपुरा से भी पार्टी का कोई प्रत्याशी नहीं जीता है। लोकसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि केरल को छोड़कर पार्टी के किसी भी राज्य में दो अंकों में सांसद नहीं जीत सके। पंजाब और तमिलनाडु में पार्टी को आठ-आठ सीटें मिली हैं। बिहार, झारखंड, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में पार्टी के दो या उससे कम सांसद जीते हैं। चल रही मतगणना के ट्रेंड को मानें तो कांग्रेस को 50 या 49 सीटें मिलेंगी। अगर ऐसा होता है तो यह दूसरी बार होगा जब पार्टी को 50 से कम सीटें मिलेंगी। 2014 के चुनाव में पार्टी ने 44 सीटें जीती थीं।

'मोदी है तो मुमकिन है' की आंधी में उड़ गया 'चौकीदार चोर है' का नारा

भाजपा के 'मोदी है तो मुमकिन' नारे की आंधी में कांग्रेस का 'चौकीदार चोर है' का नारा उड़ गया। लोकसभा चुनावों के दौरान विपक्ष ने समय-समय पर अलग-अलग नारे गढ़ने की कोशिश की। लेकिन भाजपा का 'हम सब चौकीदार' का सकारात्मक नारा विपक्ष के तमाम नकारात्मक नारों पर भारी पड़ा। भाजपा ने शुरू से ही अपने चुनावी अभियान को विकास और राष्ट्रवाद पर केंद्रित रखा और इसी हिसाब से उसके रणनीतिकारों ने नारों की रचना की।

पश्चिम बंगाल और ओडिशा के अभेद्य किलों में खिला कमल

पश्चिम बंगाल और ओडिशा के अभेद्य के किले में कमल खिलाने की भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति सफल रही। पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत इसीलिए भी ऐतिहासिक है कि वहां भाजपा न तो कोई चेहरा था और न ही पार्टी की विचारधारा का कोई इतिहास था, उसके ऊपर ममता बनर्जी ने उसे रोकने के लिए सारी सीमाएं पार कर दी थी। इसी तरह भाजपा ओडिशा में भी विपक्ष की भूमिका में आ गई है। शाह की रणनीति का नतीजा है कि भाजपा को ओडिशा में 38 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 40 फीसद वोट मिले, जबकि 2014 में क्रमश: 21 और 17 फीसद वोट मिले थे।

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Posted By: Tilak Raj

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