श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। मतदान केंद्रों पर ग्रेनेड हमले, हिंसक झड़पें, अलगाववादियों के बंद और विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जम्मू कश्मीर में सोमवार को लद्दाख व अनंतनाग सीटों पर मतदान के साथ ही चुनाव भी संपन्न हो गए। राज्य के छह संसदीय क्षेत्रों में पांच चरणों में कुल 44.51 फीसद मतदान हुआ। मतदाताओं के इस जोश ने फिर साबित कर दिया कि जम्मू कश्मीर के लोगों की लोकतंत्र में पूर्ण आस्था है। यही कारण रहा कि लाख धमकियों के बावजूद मतदान केंद्रों पर कतारें रहीं और आतंकी व अलगाववादी को मुंह की खानी पड़ी। अब सभी को 23 मई को परिणाम का इंतजार है।

लद्दाख संसदीय क्षेत्र में 63.70 फीसद और शोपियां व पुलवामा जिलों (अनंतनाग-पुलवामा सीट) पर 2.81 फीसद मतदान हुआ। दोनों सीटों पर कुल मतदान फीसद 11.08 रहा। इस दौरान पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और कांग्रेस के पोलिंग एजेंटों के बीच मारपीट भी हुई। प्रशासन ने मतदान को शांतिपूर्ण कराने के लिए पूरे लद्दाख संभाग और दक्षिण कश्मीर के पुलवामा व शोपियां में सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त कर रखा था। इसके बावजूद शोपियां गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल और डाडसर त्रल में बने मतदान केंद्रों पर संदिग्ध आतंकियों ने पेट्रोल बम फेंके।

पुलवामा के टिकन गांव, चटपोरा स्थित स्कूल में बने मतदान केंद्र के अलावा रोहमू पुलवामा में भी आतंकियों ने मतदान केंद्रों पर ग्रेनेड हमले किए। इन हमलों में जानी नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन मतदान के लिए मतदाता नहीं पहुंचे। इसके अलावा कई जगह हिंसा हुई। प्रशासन ने एहितयातन बनिहाल-श्रीनगर रेल सेवा व मोबाइल इंटरनेट सेवा को बंद रखा।

यहीं हुआ था पुलवामा हमला : लिथपोरा, जहां 14 फरवरी को जैश के आत्मघाती आतंकी के हमले में 40 सीआरपीएफ कर्मी शहीद हुए थे, वहां से मात्र 150 मीटर की दूरी पर स्थित लिथपोरा हाईस्कूल में मतदान केंद्र बनाया गया था। वहां भी मतदाता पहुंचे।

जम्मू आगे, अनंतनाग पीछे: तीन चरणों में संपन्न हुई अनंतनाग-पुलवामा संसदीय सीट की मतदान प्रक्रिया में मतदान का कुल फीसद 8.76 रिकार्ड किया गया, जो पूरी रियासत के छह संसदीय क्षेत्रों में सबसे कम है। सबसे ज्यादा मतदान जम्मू-पुंछ संसदीय सीट पर 72.16 फीसद रिकॉर्ड किया गया।

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Posted By: Rahul Sharma