राजकुमार श्रीवास्तव, प्रयागराज : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव अपनी बिंदास कार्यशैली के लिए हमेशा सुर्खियों में रहे हैं। करीब 28 वर्ष पहले वह यहां एक चुनावी सभा को संबोधित करने आए थे। संबोधन के पहले ही उन्हें भूख लग गई। कुछ न मिलने पर चूड़ा और दही मंगाकर खिलाने का सुझाव दिया। एजी ब्रदरहुड के कर्मचारी नेताओं ने एक पाव चूड़ा और एक पाव दही सिविल लाइंस से मंगाया। लालू ने हजारों की भीड़ में मंच पर ही बैठकर बेझिझक चूड़ा और दही से क्षुधा (भूख) शांत की। इसके बाद उन्होंने चुनावी सभा को संबोधित किया था।

बात 1991 की है, जद प्रत्याशी सरोज दुबे थीं

1991 के लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद संसदीय सीट से जनता दल ने सरोज दुबे को अपना प्रत्याशी बनाया था। भाजपा की तरफ से श्यामाचरण गुप्ता मुकाबिल थे। सरोज दुबे का यह दूसरा चुनाव था। वह यशलोक हॉस्पिटल चौराहा के समीप अपने निजी आवास में रहती थीं। उनके पति जेएन दुबे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति थे।

पति ने सरोज दुबे को घर से चुनाव कार्यालय संचालित करने से मना किया था

जद प्रत्याशी सरोज दुबे के पति जेएन दुबे ने घर से चुनाव कार्यालय संचालित करने से मना कर दिया था। लिहाजा, केंद्रीय चुनाव कार्यालय पार्क रोड स्थित एक प्राइवेट मकान में दो कमरे के किराए पर खोला गया। टिकट पाने के लिए सरोज दुबे को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा था। तत्कालीन राष्ट्रीय नेताओं जार्ज फर्नांडिस, पूर्व स्पीकर रवि रे ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी में वीटो लगाकर उन्हें टिकट दिलवाया था।

लालू यादव के अंदाज ने सबको चौंका दिया

मतदान के तीन दिन पहले एजी ऑफिस और शिक्षा निदेशालय के गेट पर जनता दल प्रत्याशी के समर्थन में राज्य और केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सभा आयोजित की गई थी। सभा के मुख्य वक्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव थे। मंच पर आते ही लालू ने सभा की अध्यक्षता कर रहे कर्मचारी नेता कृपाशंकर श्रीवास्तव से कहा कि 'मैं चंदौली, मीरजापुर से होते हुए सीधे आमसभा में आया हूं, पेट में कुछ डाल दीजिए तो मैं माइक पकड़ू'। पूछा गया कि नाश्ते में क्या व्यवस्था की जाए, तो लालू ने कहा कि 'कुछ बिहारी नाश्ते की व्यवस्था करा दो'। यह भी कहा कि 'अरे भाई सुनो तोहका कुछ न मिलै तो एक पाव दही-एक पाव चूड़ा मंगा दो, यही मय हमार काम चल जाई, ओके बाद हम माइक पकड़ी'। ब्रदरहुड के नेता धरमवीर पारासरी करीब 15 मिनट में सिविल लाइंस से दही-चूड़ा लेकर लौटे।

हम खाय मय नाही सरमाइत...

वरिष्ठ कर्मचारी नेता कृपाशंकर बताते हैं कि कर्मचारी नेताओं ने उनसे ब्रदरहुड के कमरे में चलकर नाश्ता करने के लिए आग्रह किया। लालू का जवाब था कि हम खाय मेय नाही सरमाइत, मंचवै पर लिवाय देय दही-चूड़े का कटोरा। उन्हें कटोरे में दही-चूड़ा दिया गया और चम्मच से  वह वहीं खाने लगे। इसके बाद उन्होंने माइक संभाला और चुटीले अंदाज में सरोज को जिताने की अपील की। जद प्रत्याशी ने अपने घर पर चुनाव कार्यालय न खोलने की वजह भी मंच से बताईं।

...और कांटे की टक्‍कर में सरोज जीत गईं चुनाव

मंच पर सरोज दुबे बोलीं 'मेरे पतिदेव उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति हैं, इसलिए चुनाव लडऩे और कार्यालय खोलने से भी मना किया।' लेकिन इलाहाबाद के कर्मचारी नेताओं के जबर्दस्त आग्रह पर मैनें यह चुनाव लडऩे का फैसला किया। उम्मीद है कि 70-80 हजार राज्य और केंद्रीय कर्मचारी अपने परिवार की इस बड़ी बहन को चुनाव में विजयी बनाएंगे। कांटे के मुकाबले में सरोज दुबे चुनाव जीत गईं। उन्हें 1.14 लाख और श्यामा चरण को 1.09 लाख वोट मिले थे।

Posted By: Brijesh Srivastava

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