बोकारो, बीके पाण्डेय। गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के भीतर जरीडीह प्रखंड। 1.10 लाख आबादी के लिए एक कॉलेज तक नहीं है। इंटरमीडिएट के बाद बोकारो, रांची, हजारीबाग में रोजाना जाने की हैसियत नहीं हैं तो पढ़ाई बंद। जरीडीह में शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई का भी इंतजाम नहीं हो सका है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर सुध ही नहीं है।

गिरिडीह लोकसभा के भीतर बेरमो विधानसभा में बसे जरीडीह प्रखंड में 15 पंचायत है। आठ आदिवासी बहु, पांच में पुनर्वासित किए गए विस्थापित और दो पंचायत में सामान्य एवं पिछड़े वर्ग की आबादी की बहुतायत है। शिक्षा और स्वास्थ्य का सही इंतजाम नहीं होना सबको दर्द देता है। लोकसभा चुनाव आया है तो फिर अस्पताल और कॉलेज बनाने की जगह अनुमंडल, पावर ग्र्रिड और हाई स्पीड रोड बनाने के वायदे किए जा रहे हैं।

बिना डाक्टर का अस्पताल और बिना मास्टर का स्कूलः जरीडीह में राजकीय पॉलिटेकनिक है। यहां तीन स्थाई शिक्षक 400 विद्यार्थी को तकनीक की पढ़ाई करा रहे हैं। प्लस टू हाई स्कूल भी है। वहां सभी विषय के शिक्षक नहीं है। बांधडीह उच्च विद्यालय में स्वीकृत पद से आधे भी शिक्षक नहीं है। जरीडीह रेफरल अस्पताल में चिकित्सकीय उपकरण हैं, दवा है, डाक्टर नहीं हैं। 50 बेड का अस्पताल मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूरी पर पांच साल पहले बनना शुरू हुआ था। आज तक पूरा नहीं हुआ है। आठ उप स्वास्थ्य केन्द्र हैं। जब जाइए, ताला लटका मिलेगा।

खेतों में नहीं दिखती हरियाली क्योंकि पानी नहींः जरीडीह के अधिकतर गांवों के खेतों में हरियाली नहीं दिखती क्योंकि सिंचाई के लिए समय पर पानी नहीं मिल पाता। खांजो व गोवाई नदी पर डैम बना कर खेतों को पानी उपलब्ध कराने का चुनावी वायदा सुन सुन कर किसान थक और पक चुके हैं।

धान की फसल पकती है तो खाने आ जाते हैं गजराजः बरसात के मौसम में जरीडीह के किसान धान की खेती करते हैं। फसल पकती है तो उसे खाने के लिए गजराज आ जाते हैं। पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे तीन पंचायत में यह बड़ी समस्या है। फसल बर्बाद होती है, कई लोगों की जान जा चुकी है।

भौगोलिक स्थिति

पूर्व में पश्चिम बंगाल का जयपुर प्रखंड

दक्षिण में कसमार एवं पेटरवार प्रखंड

पश्चिम में बेरमो प्रखंड 

उत्तर में चास प्रखंड

क्षेत्रफल : 2118 हेक्टेयर

आबादी : 1.10 लाख

कृषि पर आधारित आबादी : 23 प्रतिशत

औद्योगिक मजदूर : 4 प्रतिशत

दिहाड़ी मजदूर : 52 प्रतिशत

पहली बार गांव  में अच्छी सड़क तो बन गई लेकिन सड़क से पेट तो नहीं चलेगा।

-राम माझी, चिलगड्ढा गांव

सब सीख देते हैं कि बच्चों को शिक्षा दो। कॉलेज खोलेंगे तब तो पढ़ाएंगे।

-भागीरथ महतो, तिलका चौक

Posted By: mritunjay

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस