नई दिल्ली, जेएनएन। Kanker Lok Sabha Election Result 2019 Liveछत्तीसगढ़ राज्य के कांकेर संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के मोहन मण्डावी ने 546233 वोट प्राप्त कर विजय हासिल की है। 

वर्ष 2014 में छत्‍तीसगढ़ राज्य में कांकेर लोकसभा क्षेत्र से विक्रम उसेंडी का निर्वाचन हुआ। उन्हें 465215 वोट मिले। उनकी पार्टी बीजेपी है। उन्होंने फुलोदेवी नेताम को 35158 वोटों से हराया। निकटतम प्रतिद्वंद्वी की पार्टी कांग्रेस थी। 2014 में कुल 70.22 प्रतिशत वोट पड़े।

चित्रोतपला यानी महानदी के तट से लगे हुए विशाल भूभाग का काफी हिस्सा कांकेर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। वर्तमान में यहां भारतीय जनता पार्टी के सांसद विक्रम उसेंडी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसके पहले भी यहां भारतीय जनता पार्टी का कब्जा रहा है, लेकिन पहले सोहन पोटाई लगातार चार बार यहां से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। पिछले पांच चुनावों से यह सीट भारतीय जनता पार्टी के खाते में जा रही है। उससे भी पहले वरिष्ठ आदिवासी नेता और केंद्रीय कृषि मंत्री अरविंद नेताम इस सीट से लगातार सांसद रहे हैं। सुरक्षित सीट होने के कारण यहां से आदिवासी नेता ही चुनाव लड़ते रहे हैं। भाजपा के सोहन पोटाई की टिकट काटकर विक्रम उसेंडी को मैदान में उतारा गया था और नरेंद्र मोदी लहर में पहली बार लड़ने वाले विक्रम इस चुनाव में सांसद बन गए। मगर सांसद बनने के बाद अभी नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में विधायक का चुनाव हार चुके हैं। यहां की कुल जनसंख्या करीब 26 लाख है और आदिवासियों का प्रतिशत यहां करीब 42 है।

आठ विधानसभा सीटें

कांकेर लोकसभा क्षेत्र के तहत आठ विधानसभा सीटें आती हैं। यहां की सभी विधानसभा सीटें कांग्रेस के कब्जे में हैं इनमें कांकेर जिले का अंतागढ़, भानुप्रताप व कांकेर, कोंडागांव जिले का केशकाल, धमतरी जिले का नगरी सिहावा और बालोद जिले का संजारी बालोद, डौंडीलोहारा व गुंडरदेही शामिल हैं।

कांकेर की खास बातें

कांकेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र छत्तीसगढ़ के 11 संसदीय क्षेत्रों में से एक है। बस्तर संभाग में आने वाले इस क्षेत्र में जिला मुख्यालय भी है। इस क्षेत्र में महानदी बहती है तो गढ़िया पहाड़ यहां की प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। प्राचीन काल में कंक ऋषि ने यहां पर आश्रम स्थापित किया और यहीं पर तपस्या की। इस क्षेत्र को कौकर्य, कंकण और कंकारय के नाम से भी जाना जाता था। पहाड़ी पर स्थित किला यहां के इतिहास की गवाही देता है। यहां महाशिवरात्रि पर मेला लगता है। जिसमेंशामिल होने दूर-दूर से पर्यटक आते है। नवरात्रि में पहाडि़यों पर स्थित योगमाया मां कांकेश्वरी देवी के मंदिर में ज्योति कलश की स्थापना और मेला उत्सव होता है। इसी क्षेत्र में पहाड़ पर नील गोंदी नामक जगह से दूध की नदी निकलती है। यहां का मलांजकुडुम झरना पर्यटकों में बेहद लोकप्रिय है।

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Posted By: Gaurav Tiwari