रांची, [जागरण स्‍पेशल]। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की कैबिनेट में अर्जुन मुंडा (Arjun Munda) को बतौर केंद्रीय मंत्री शामिल कर भाजपा (BJP) ने झारखंड (Jharkhand) में एक साथ कई मोर्चों को साधने की कोशिश की है। अर्जुन मुंडा (Arjun Munda) लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता हैं, जनजातीय समाज (Popular Tribal Leader Arjun Munda)  का तो वे प्रतिनिधित्व करते ही हैं।

  • सत्ता से संगठन तक निशाने पर ही लगे हैं अर्जुन के तीर
  • दूसरी बार विधायक बने तो राज्य में मंत्री बने और दूसरी बार सांसद बने तो केंद्र में जगह
  • तीन बार के मुख्यमंत्री रहे अर्जुन मुंडा को अब केंद्रीय मंत्री का दायित्व
  • एनडीए में यशवंत सिन्हा के बाद राज्य का दूसरा चेहरा जिसे मिला कैबिनेट का दर्जा 

सियासत में वक्त बदलते देर नहीं लगती। लगभग साढ़े चार वर्ष से अधिक समय तक तक सक्रिय राजनीति से तकरीबन अलग-थलग रहे अर्जुन मुंडा ने लोकसभा चुनाव में जब वापसी की तो केंद्रीय नेतृत्व ने भी उन्हें हाथों-हाथ लिया। मंत्री पद के लिए झारखंड से आधा दर्जन दावेदारों में से जब चयन की स्थिति आई तो बिना किसी सोच विचार के उनका नाम तय कर दिया गया। अर्जुन मुंडा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में 14वें मंत्री के रूप में शपथ ली। इससे भाजपा में उनके कद का अंदाजा स्वयं हो जाता है।

अर्जुन मुंडा एनडीए में यशवंत सिन्हा के बाद झारखंड के दूसरे ऐसे नेता हैं जिन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभाल चुके मुंडा ने राष्ट्रीय स्तर पर संगठन से जुड़े दायित्व को भी बखूबी निभाया है। बतौर राष्ट्रीय महासचिव मुंडा ने पूरे देश का दौरा कर संगठन के कार्यों को बखूबी निभाया। झारखंड में बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने सत्ता और संगठन में बराबर समन्वय बनाकर रखा।

मोदी सरकार में पहली बार शामिल होने वाले अर्जुन मुंडा राष्ट्रीय राजनीति में पहचान के मोहताज नहीं हैं। मुंडा महज 27 साल की उम्र में विधायक और 35 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने। वह 2003, 2005 और 2010 में झारखंड के मुख्यमंत्री रहे हैं। झारखंड आंदोलन की उपज अर्जुन मुंडा 1995 में खरसावां विधानसभा सीट से पहली बार चुने गए थे। 2000 में अर्जुन मुंडा भाजपा में शामिल हो गए और 35 साल की उम्र में 2003 में पहली बार मुख्यमंत्री बने। तब वे सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री थे। बाद में मधु कोड़ा ने उनका यह रिकार्ड तोड़ा। अर्जुन मुंडा 2009 में जमशेदपुर से सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भी रहे।

पांच मई 1968 में जन्मे मुंडा गणेश और साइरा मुंडा की संतान हैं। परिवार के पांच बच्चों में अर्जुन मुंडा सबसे छोटे हैं। उन्होंने भालूबासा के हरिजन मध्य व उच्च विद्यालय से स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से ग्र्रेजुएशन किया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय ओपन विश्वविद्यालय से सोशल साइंस में पीजी डिप्लोमा किया। अर्जुन मुंडा ने मीरा मुंडा से शादी की और उनके तीन बेटे हैं।

अर्जुन मुंडा का राजनीतिक जीवन 1980 से शुरू हुआ। उस वक्त अलग झारखंड आंदोलन का दौर चरम पर था। अर्जुन मुंडा ने राजनीतिक पारी की शुरूआत 1995 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से की। बतौर भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी 2000 और 2005 के चुनावों में भी उन्होंने खरसावां से जीत हासिल की। वर्ष 2000 में अलग झारखंड राज्य का गठन होने के बाद अर्जुन मुंडा बाबूलाल मरांडी की कैबिनेट में समाज कल्याण मंत्री बनाये गए। वर्ष 2003 में विरोध के कारण बाबूलाल मरांडी को मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा और राज्य की कमान 18 मार्च 2003 को अर्जुन मुंडा को पहली बार सौंपी गई।

12 मार्च 2005 को दोबारा उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन निर्दलीयों से समर्थन नहीं जुटा पाने के कारण उन्हें 14 मार्च 2006 को त्यागपत्र देना पड़ा। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। लगभग दो लाख मतों के अंतर से उन्होंने जीत हासिल की। 11 सितम्बर 2010 को वे तीसरी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने। अर्जुन 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में खरसावां सीट से झामुमो के दशरथ गगराई से हार गए।

कोल्हान का बढ़ा दबदबा
झारखंड की राजनीति में शुरू से ही कोल्हान प्रमंडल का दबदबा रहा है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में बतौर केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के शामिल होने से कोल्हान का पलड़ा राज्य के अन्य प्रमंडलों से कहीं भारी हो गया है। मुख्यमंत्री रघुवर दास और राज्य सरकार के मंत्री सरयू राय इसी क्षेत्र से आते हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा भी कोल्हान से ही हैं।

विधानसभा चुनाव की दृष्टिकोण से यह माना जा रहा था कि इस बार प्रधानमंत्री की कैबिनेट में संताल को प्रतिनिधित्व अवश्य मिलेगा। झामुमो के शीर्ष नेता शिबू सोरेन को हारने वाले सुनील सोरेन और जीत की हैट्रिक लगाने वाले निशिकांत दुबे का नाम चर्चा में भी था। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। संताल प्रमंडल में 18 विधानसभा सीटें आती हैं और यह सीटें एनडीए के लिए अहम हैं।

पिछली केंद्रीय कैबिनेट में उत्तरी और दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल को जयंत सिन्हा और सुदर्शन भगत के रूप में प्रतिनिधित्व मिला था। केंद्रीय मंत्रीमंडल में झारखंड से सीमित लोगों को ही जगह दी जा सकती थी, ऐसे में सभी प्रमंडलों को अपेक्षित नेतृत्व मिलना मुश्किल है।

मेरा अर्जुन अब नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर करेगा देश सेवा
मेरा बेटा आ गया, वह अब मंत्री बनकर देश सेवा करेगा। यह कहना था अर्जुन मुंडा की मां सायरा मुंडा का। गुरुवार की शाम वह अपने घोड़ाबांधा स्थित आवास पर टीवी देख रही थीं। जैसे ही उनका बेटा दिल्ली से लाइव प्रसारण पर दिखा, वह खिल उठीं। बेटे को कैबिनेट मंत्री के लिए शपथ ग्रहण लेते देख मां भाव विह्वल हो गई। कहा, मेरा बेटा अर्जुन अब नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर देशसेवा करेगा। घोड़ाबांधा आवास पर सायरा मुंडा के साथ उनके बड़े पुत्र भीम सिंह मुंडा, बहु पुतुल मुंडा, अमित संगी, भाजपा नेता शिखा राय चौधरी मौजूद थी। सभी की नजर टीवी की स्क्रीन पर टिकी हुई थी।

लक्ष्मण गिलुवा समेत अन्य भाजपा नेताओं ने दी बधाई
प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। गिलुवा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह सहित मंत्रिमंडल के सभी मंत्रियों को बधाई दी है। उन्होंने खूंटी सांसद सह पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को भी बधाई देते हुए कहा कि उनके मंत्री बनने से झारखंड में विकास कार्यों को गति मिलेगी।

बधाई देने वालों में प्रदेश उपाध्यक्ष आदित्य साहू, प्रदीप वर्मा, प्रिया सिंह, सांसद समीर उरांव, सत्येंद्र तिवारी, महामंत्री दीपक प्रकाश, सांसद सुनील सिंह, अनंत ओझा, मनोज सिंह, सुबोध गुड्डू, मुनेश्वर साहू, सरिता श्रीवास्तव, गणेश मिश्रा, महेश पोद्दार, हेमंत दास, जेबी तुबिद, राजेश शुक्ला, दीनदयाल वर्णवाल, प्रतुल शाहदेव, मिस्फिका हसन, प्रवीण प्रभाकर, अनिल सिन्हा, शिवपूजन पाठक, संजय जायसवाल सहित अन्य शामिल है। प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सरकार अंत्योदय के साथ सर्वोदय के लक्ष्य को साकार करेगी।

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Posted By: Alok Shahi