मेहरमा, अनिल आनंद। बिहार के कहलगांव स्थित उत्तरवाहिनी गंगा नदी के पानी को बटेश्वर गंगा पंप नहर योजना में गोड्डा लाने का प्रयास 6 साल से खटाई में पड़ा है। योजना के तहत करोड़ों रुपये बह गए लेकिन यहां एक बूंद भी गंगाजल नहीं आ पाया। अब चुनाव में यह मुद्दा फिर से गरमा रहा है।

सत्ता पक्ष जहां योजना को पूर्ण कराने की दिशा में जनता से आशीर्वाद मांग रहा है वहीं विपक्ष इस मसले पर हमलावर है। 2012-13 में हरदेव कंस्ट्रक्शन की ओर से करीब 48 करोड़ रुपये की लागत से 29 किमी लंबी बटेश्वर गंगा पंप नहर योजना के तहत खुदाई शुरू हुई। उद्देश्य किसानों को ङ्क्षसचाई सुविधा का लाभ पहुंचाना था। यह योजना अब तक विभागीय उपेक्षा व जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैये के कारण अधर में लटकी हुई है। योजना में अलग से करीब 3 करोड़ की राशि से 24 ब्रिज बनाए जाने थे। सभी ब्रिज आधे अधूरे हैं। इस योजना के अधिकतर जमीन दाताओं को मुआवजा भी नहीं मिला है। इससे जमीन दाताओं के बीच रोष व्याप्त है।

1980 में एकीकृत बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद की पहल पर बटेश्वर गंगा पंप नहर योजना की स्वीकृति दी गई थी। कहलगांव स्थित गंगा घाट से मेहरमा प्रखंड होते हुए पुन: कहलगांव क्षेत्र में नहर का निर्माण होना था। इसकी लंबाई करीब 29 किमी है। कुछ दिनों तक खुदाई होने के बाद यह काम बंद हो गया। 2012 में सांसद निशिकांत दुबे की पहल पर फिर से इस योजना का टेंडर निकाला गया। काम हरदेव कंस्ट्रक्शन ने शुरू कराया जो आज तक पूरा नहीं हो पाया।

भाजपा सरकार उक्त महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर गंभीर है। आने वाले दिनों में यह योजना गोड्डा जिले के किसानों के लिए क्रांतिकारी योजना बनेगी। नहर निर्माण में बचे हुए काम के लिए अलग से 16 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। टेंडर कराकर जल्द ही काम पूरा किया जाएगा।

- अशोक कुमार, विधायक महागामा।

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Posted By: mritunjay

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