मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

रायपुर,राज्य ब्यूरो। छत्तीसगढ़ के जिन बड़े संगठनों ने आंदोलन करके भाजपा की सरकार को गिराया और कांग्रेस को सरकार बनाने की ताकत दी, अब उन्हीं संगठनों के चार लाख लोगों में कांग्रेस सरकार के खिलाफ आंदोलन की चिंगारी सुलगने लगी है। किसान, आंगनबाड़ी, पुलिस परिवार और अनियमित कर्मचारियों के संगठन सड़क पर फिर से उतरने की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि इन्हें डर है कि अगर, लोकसभा चुनाव के पहले अपनी मांग सरकार से नहीं मनवा पाए, तो आगे मामला लटक सकता है। इन संगठनों के लोग आंदोलन की राह पर निकल पड़े, तो कांग्रेस का 16 लाख वोट प्रभावित हो सकता है। आंदोलनों का उठता धुआं कांग्रेस सरकार को भी दिखने लगा है, इसलिए उसने पुलिस को सतर्क रहने के लिए कहा है। 

कांग्रेस सरकार का दावा है कि उसने 20 लाख किसानों का 10 हजार करोड़ कर्जमाफ कर दिया है, लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि उनका कर्जमाफ नहीं हुआ है। उन्हें बैंक से नोटिस मिल रहा है। इस कारण किसान संगठन एकजुट होने लगे हैं। अंदर ही अंदर आंदोलन की रूपरेखा बन रही है। पता चला है कि किसान संगठनों की जल्द ही संयुक्त बैठक होने वाली है, जिसमें आंदोलन का अंतिम फैसला लिया जाएगा। किसान संगठनों की मानें तो उनका आंदोलन शुरू हुआ, तो एक लाख किसान अभी उससे जुड़ने को तैयार हैं। यह संख्या और बढ़ेगी। एक लाख किसान भी आंदोलन करने उतरे, तो उनके परिवार का औसत चार लाख वोट मान लिया जाए, तो कांग्रेस का चार लाख वोट प्रभावित हो सकता है। 

1.80 लाख अनियमित कर्मचारी 14 से आंदोलन पर 
संयुक्त प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी संघ के बैनर तले 54 सरकारी विभागों के 72 अनियमित कर्मचारी संघ एकजुट हो चुके हैं। संयुक्त संघ 14 फरवरी से राजधानी के ईदगाहभाठा मैदान से आंदोलन का आगाज करने जा रहा है। संघ के प्रांतीय प्रवक्ता अभिषेक ठाकुर का दावा है कि प्रदेश में एक लाख 80 हजार अनियमित कर्मचारी हैं। 

अनियमित कर्मचारियों ने विधानसभा चुनाव के पहले नियमितीकरण समेत चार मांगों को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ लगातार आंदोलन किया था, तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने वादा किया था कि उनकी पार्टी की सरकार बनने पर मांगों को पूरा किया जाएगा। वादे याद दिलाने के लिए अनियमित कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल दो बार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और एक बार मंत्री टीएस सिंहदेव से मिल चुका है, लेकिन उनके जवाबों से अनियमित कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं। अनियमित कर्मचारियों के परिवारों का वोट गिन लिया जाए, तो यह लगभग 7.20 लाख होता है।  

पुलिस परिवार फिर दिख सकता है सड़कों पर 
विधानसभा चुनाव के पहले छत्तीसगढ़ के पुलिस परिवारों ने आंदोलन करके न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश को चौंका दिया था। पुलिस परिवार ने साप्ताहिक अवकाश से लेकर वेतनभत्तों में बढ़ोत्तरी समेत कई मांगें थीं। भाजपा सरकार ने दबाव बनाकर पुलिस परिवार के आंदोलन को दबा दिया था, तब कांग्रेस ने कहा था कि उसकी सरकार बनने पर पुलिस परिवारों के साथ न्याय होगा। कांग्रेस सरकार ने रिस्पांस भत्ता शुरू करने की घोषणा की है, लेकिन साप्ताहिक अवकाश समेत पुलिस परिवारों की दूसरें मांगें पूरी नहीं हो सकी है। पुलिस परिवारों के फिर से आंदोलन पर जाने की भनक पुलिस मुख्यालय को लग चुकी है। इस कारण सभी जिलों के एसपी को अलर्ट रहने के लिए कहा है। पुलिस परिवार आंदोलन पर निकले तो 72 हजार जवान हैं, तो उनके परिवार के 2.80 लाख वोट चुनाप पर असर डाल सकते हैं। 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका भी नाराज 
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका लंबे समय से आंदोलन करते रहे हैं। प्रदेश में नई सरकार बनने पर उनकी उम्मीद जागी थी, लेकिन कांग्रेस सरकार के पहले बजट में उनकी मांगों पर कोई घोषणा नहीं हुई। इस कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका फिर से नाराज हैं। इनके संगठन से 50 हजार महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इस कारण इनका आंदोलन लगभग दो लाख वोट प्रभावित कर सकता है। 

Posted By: Tanisk

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