नई दिल्ली, जेएनएन। 17वीं लोकसभा चुनाव परिणाम के आते ही देश की सबसे पुरानी पार्टी के पैरो तले जमीन खिसक गई है। पीएम मोदी की ऐसी आंधी चली कि कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी परंपरागत सीट को भी बचाने में कामयाब नहीं हो पाए। कांग्रेस के कई दिग्गज इस मोदी सुनामी में उड़ गए हालांकि कांग्रेस ने अपनी सीटों की संख्या में इजाफा किया है। आइए जानते हैं कांग्रेस को किन पांच कारणों के कारण नुकसान उठाना पड़ा।

1. चौकीदार चोर है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भ्रष्‍टाचार विरोधी छवि को नुकसान पहुंचाने के चक्‍कर में कांग्रेस की ओर से गढ़े गए चाैकीदार चोर है के नारे ने उसे चुनावों में सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया। राफेल सौदे में मोदी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर वह जनता के बीच में अपनी विश्‍वसनीयता नहीं बनाए रख सकी। इस मुद्दे पर पब्लिक में कुछ और बाद में सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी के लिखित माफी मांगने से जनता में खासी किरकिरी हुई।

2. सॉफ्ट हिंदुत्व
इन चुनावों में कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मंदिरों में जाकर हिंदुत्‍व के प्रति अपने लगाव को दिखाने की भरपूर कोशिश की। लेकिन मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर बनी हुई अपनी छवि से नहीं निकल सकी। सॉफ्ट हिंदुत्व की राह में मंदिरों की दौड़ कांग्रेस के काम नहीं आई।

3. प्रियंका गांधी को लाने में जल्‍दबाजी
कांग्रेस के लिए ट्रंप कार्ड कही जाने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा को लाने में पार्टी ने काफी देर कर दी। चुनाव की घोषणा के बाद जिस तरह जल्‍दबाजी में प्रियंका को महासचिव बनाकर उन्‍हें उत्‍तर प्रदेश की कमान सौंपी गई इससे जनता में यह मैसेज गया कि बस यह चुनावी पैंतरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से उनके चुनाव लड़ने को लेकर भ्रम की स्थिति से कांग्रेस को नुकसान हुआ।

4. 'न्याय' पर नहीं रहा भरोसा
गरीबों के लिए मोदी सरकार की तमाम योजनाओं को सिरे से खारिज करने वाली कांग्रेस पार्टी ने न्याय करने की वकालत की। साल भर में 72 हजार रुपये देने के वादे पर लोगों ने भरोसा नहीं जताया। इसका कमजोर प्रचार-प्रसार भी लोगों में यही मैसेज दे गया कि यह बस चुनावी स्‍टंट भर है।

5. देशद्रोह के मुकदमे, सैम पित्रोदा और मणिशंकर अय्यर
कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में देशद्रोह के मुकदमे में जेल में बंद लोगों को छोड़ने के वादे ने जनता में यह संदेश दिया कि आंतरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। सैम पित्रोदा के हुआ तो हुआ और मणिशंकर अय्यर के एक बार फिर नीच प्रकरण को तूल देने से भी कांग्रेस को नुकसान हुआ।

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Posted By: Prateek Kumar