रायपुर, जेएनएन। लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ के गांव और शहर में अलग-अलग मुद्दों को लेकर कैंपेन चल रहा है। वोटरों के मिजाज को देखते हुए राजनीतिक दलों ने प्रचार की रणनीति बनाई है। कांग्रेस अपने प्रचार अभियान में जहां 'न्याय योजना' की बात कर रही है। वहीं, भाजपा किसानों को सम्मान निधि की याद दिलाने में पीछे नहीं हट रही है। शहर और गांव के वोटरों की पसंद और उनको मिले फायदे को खासा ध्यान में रखा जा रहा है। भाजपा गांव में किसान सम्मान निधि से लेकर उज्‍ज्‍वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और शौचालय निर्माण की बात कर रही है। उधर, कांग्रेस का पूरा फोकस प्रदेश में सरकार बनने के बाद किसानों की कर्जमाफी के किये वादे की याद दिलाने में है।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनने के बाद किसानों का अल्पकालीक कर्ज माफ कर दिया गया। इसके बाद राहुल गांधी ने न्याय योजना को मास्टर स्ट्रोक बताया। इस योजना से लाभ लेने वाला बड़ा वोटबैंक ग्रामीण क्षेत्र में रहता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लेकर कांग्रेस के प्रचारक गांवों में इन योजनाओं का जिक्र करने में पीछे नहीं है।

शहरी क्षेत्र के वोटरों को लुभाने के लिए कांग्रेस राफेल का मुद्दा उठा रही है। इससे केंद्र की मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही स्टार्ट-अप योजना का फेल होना, मुद्रा योजना का लाभ नहीं मिलना भी चुनावी मुद्दा बना हुआ है। कांग्रेस को उम्‍मीद है कि इन मुद्दों के जरिए मतदाताओं को अपनी ओर खींचा जा सकता है। हालांकि, ये तो वक्‍त ही बताएगा कि आखिर ऊंट किस करवट बैठता है।

भाजपा को ग्रामीण क्षेत्र में केंद्र की मोदी सरकार की सफल योजनाओं पर भरोसा है। यही कारण है कि भाजपा के स्टार प्रचारक आंकड़ों के साथ उज्‍ज्‍वला योजना, पीएम आवास योजना, शौचालय निर्माण का जिक्र कर रहे हैं। वहीं, शहरी वोटरों के बीच राष्ट्रवाद, एयर स्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक, जीएसटी और नोटबंदी का जिक्र किया जा रहा है। हालांकि प्रचार मोर्चे पर जीएसटी और नोटबंदी का भाजपा के नेता कम ही प्रचार कर रहे हैं। दरअसल, भाजपा का एक बड़ा वर्ग यह मानता है कि जीएसटी और नोटबंदी से वोटरों के बीच नकारात्मक छवि जाती है। ऐसे में कम ही मौके आते हैं, जब इनका जिक्र किया जाता है।

Posted By: Tilak Raj

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