राजनीतिक दावे-प्रतिदावे के बीच कांग्रेस अध्यक्ष के चुनावी दौरे की रफ्तार भी तेज हो गई है। अपने धुआंधार चुनावी दौरे के क्रम में उनका पड़ाव शनिवार को मध्य प्रदेश रहा। दिल्ली से इंदौर की करीब सवा घंटे की उड़ान के दौरान अपनी रणनीतिक टीम को जरूरी दिशा-निर्देश देने के बाद अपने विशेष विमान में राहुल गांधी ने ‘दैनिक जागरण’ के सहायक संपादक संजय मिश्र से लंबी बातचीत की। पेश है इस बातचीत के अंश :

कांग्रेस ने सबसे बड़ा सियासी गेम चेंजर ‘न्याय’ को बनाया है। क्या आपको लगता है कि ‘न्याय’ की आपकी बात जमीन तक पहुंच पाई है?
-मेरा मानना है कि नरेंद्र मोदीजी ने पांच साल पहले देश की जनता से अनेक वादे किए थे जिन्हें वह पूरा नहीं कर पाए। हम पिछले छह-सात महीने से हिंदुस्तान की जनता से बात कर रहे हैं- किसानों से, मजदूरों से, दुकानदारों से, मीडियम साइज बिजनेस वालों से, सबसे हमने बात की। लाखों लोगों से बात की। न्याय योजना का जो बेसिक आइडिया है वह हिंदुस्तान की जनता ने हमें दिया। हिंदुस्तान की जनता ने हमसे कहा कि नरेंद्र मोदीजी ने 5.55 लाख करोड़ रुपये अमीर लोगों के बैंक अकाउंट में डाले तो फिर हमारे बैंक अकाउंट में भी कुछ पैसा क्यों नहीं डाला जा सकता? इसलिए कांग्रेस ने न्याय योजना की प्लानिंग की।

न्याय योजना क्या है? सिर्फ गरीबों को फायदा नहीं पहुंचेगा!
-गरीबों को जरूर बैंक अकाउंट में 72 हजार रुपये सालाना, मतलब 3.60 लाख रुपये पांच साल में मिलेंगे। नोटबंदी और गब्बर सिंह टैक्स से भारतीय अर्थव्यवस्था को जो नुकसान हुआ, लोगों की जो खरीदारी की क्षमता अर्थात परचेजिंग पावर कमजोर हुई थी, उसको रीमोनेटाइज अर्थात ‘पुनर्मुद्रीकरण’ करने का तरीका है न्याय योजना। नरेंद्र मोदीजी ने डिमॉनेटाइज किया, हम रीमोनेटाइज कर रहे हैं। इस न्याय योजना से सभी को फायदा होगा। गरीब लोगों को जैसे ही पैसा मिलेगा, वे अपनी जरूरत की चीजें खरीदनी शुरू करेंगे। दुकानों में माल बिकेगा, जैसे ही दुकानें चालू होंगी, हिंदुस्तान की फैक्ट्रियां दौड़ने लगेंगी। छोटे और मझोले व्यापारियों, उद्योगों को फायदा होगा। फैक्ट्रियों में युवाओं को रोजगार मिलेगा। जैसे इंजन में ईंधन डालकर स्टार्ट किया जाता है, उसी तरह न्याय योजना हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था में ईंधन की तरह होगी। जैसे ही वह ईंधन अंदर जाएगा, हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था दौड़ने लग जाएगी। नरेंद्र मोदीजी ने सिर्फ नोटबंदी से और गब्बर सिंह टैक्स से हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से क्षति पहुंचाई है। हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था का कांफिडेंस तोड़ दिया है। उसको रिपेयर करना हमारे लिए बहुत जरूरी है। हम उसमें एक्सपर्ट हैं। मनमोहन सिंहजी का रिपोर्ट कार्ड आप देखिए, हमने अपनी पिछली सरकारों में अर्थव्यवस्था को हमेशा मजबूत बनाए रखा।

आपका एक बहुत बड़ा वादा है, एक साल के अंदर 22 लाख सरकारी नौकरियां देने का। क्या आपको लगता है कि सिर्फ इतनी नौकरियों से बात बन जाएगी या आपके पास इतनी बड़ी आबादी के लिए कोई और भी योजना है?
-हम सच्चाई बता रहे हैं, हम झूठ नहीं बोलेंगे। हमने चेक किया है कि 22 लाख सरकारी नौकरियां हैं जो खाली पड़ी हैं। ये युवाओं को दी जा सकती थीं। हमने प्लान कर लिया है कि ये नौकरियां कैसे दी जाएंगी। 10 लाख युवाओं को पंचायतों में रोजगार मिलेगा, यह आसानी से किया जा सकता है। न्याय योजना अर्थव्यवस्था को जंप स्टार्ट देगी। लाखों युवाओं को रोजगार देगी। हेल्थकेयर और एजुकेशन में हम बजट बढ़ाएंगे। नए सरकारी अस्पताल बनेंगे। नए सरकारी विद्यालय और विश्वविद्यालय बनेंगे। उनमें युवाओं को रोजगार मिलेगा और इन सबमें प्राइवेट सेक्टर का भी रोल रहेगा।

लोकतांत्रिक संस्थाओं पर प्रहार कांग्रेस का एक बड़ा मुद्दा है। इस बात की क्या गारंटी है कि अगली सरकार इसका अनुकरण नहीं करेगी? कैसे आप भरोसा देंगे?
-आप हमारा पिछला रिकॉर्ड देख लीजिए। हमने रिजर्व बैंक के सुझावों को नजरअंदाज करके नोटबंदी जैसा काम कभी नहीं किया। कांग्रेस के शासनकाल में सुप्रीम कोर्ट के चार जज प्रेस के सामने कभी नहीं आए। हमारी यह सोच ही नहीं है। हमारे पास आरएसएस जैसी सोच रखने वाले संगठन भी नहीं हैं।

आपने चुनाव में राफेल सौदे के भ्रष्टाचार को एक बड़ा मुद्दा बनाया। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन है कि यह बहुत बड़ा मुद्दा नहीं बन पाया। आखिर क्यों?
-राफेल मुद्दे ने नरेंद्र मोदीजी की सच्चाई देश के सामने खोलकर रख दी। आप नरेंद्र मोदीजी को इन दिनों करीब से देखिए। क्या वह अपने भाषणों में भ्रष्टाचार की बात करते हैं? नहीं करते। क्योंकि राफेल घोटाले ने उनकी छवि खराब कर दी है। संसद में उन्होंने भाषण दिया। मैंने चार सवाल पूछे थे। डेढ़ घंटा उन्होंने बोला। मुझसे आंख में आंख नहीं मिला पाए। मैं देख रहा था कि उनकी आंख मेरे से मिल जाए। जब भी मैं उनकी तरफ देखता था, तो वह इधर-उधर देखने लगते थे। पूरा देश देख रहा था उनको। देश उनकी आंख में यह देखना चाहता था कि हमारे प्रधानमंत्री सच बोल रहे हैं या झूठ। पूरे देश ने देखा कि नरेंद्र मोदीजी झूठ बोल रहे थे। अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपये का कांट्रैक्ट क्यों दिया गया? अनिल अंबानी जेल जाने वाले थे। जेल जाने से वह बचे क्योंकि उनके भाई ने उन्हें बचाया। फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति कहते हैं कि हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि एचएएल की जगह कांट्रैक्ट अनिल अंबानी को मिलना चाहिए। 1600 करोड़ रुपये की दर से लड़ाकू हवाई जहाज खरीदा जाना है, जहाज भारत के बजाय फ्रांस में बनेगार्। हिंदुस्तान की जनता को ‘मेक इन इंडिया’ का भाषण देते हैं और फ्रांस के राष्ट्रपति को कहते हैं ‘मेक इन फ्रांस!’ क्यों? क्योंकि अनिल अंबानी को मदद करनी थी। कागजातों से साफ है कि हिंदुस्तान के वायुसेना अधिकारियों ने लिखा है, रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने लिखा है कि प्रधानमंत्री जी फ्रांस से समानांतर बातचीत कर रहे थे। इसका मतलब क्या है। सच्चाई यह है कि राफेल ने प्रधानमंत्री जी की पूरी कलई खोल दी। उन्होंने अपनी जो साफ छवि बनाई थी वह खत्म हो गई। प्रधानमंत्री भी जानते हैं। आप उनका चेहरा देखिए। उनको मुझ पर इतना गुस्सा क्यों आ रहा है? मुझसे इतनी नफरत क्यों कर रहे हैं? क्योंकि मैंने राफेल की असलियत सबके सामने रख दी है। मैं पीछे नहीं हटा। मैं नहीं डरा।

प्रधानमंत्री ने आपके परिवार, खासकर आपके पिता राजीव गांधी पर कई आक्रामक आरोप लगाए हैं। क्या ये चीजें आपको सियासी रूप से परेशान नहीं कर रहीं?
-मैं परेशान नहीं होता। मुझे प्रधानमंत्री नफरत देंगे, मैं उनको प्यार दूंगा। मेरे दिल में नरेंद्र मोदीजी के लिए जरा भी नफरत नहीं है। मेरे दिल में आरएसएस के लिए भी नफरत नहीं है। मैं राजनीतिक लड़ाई लड़ रहा हूं, परंतु मैं प्यार से लड़ रहा हूं। उनमें नफरत है, वह मुझ पर आक्रमण करें। मेरे परिवार पर आक्रमण करें, यह उनका व्यक्तित्व है। मैं संविधान की रक्षा कर रहा हूं। कांग्रेस, नरेंद्र मोदीजी को हराएगी और प्यार से हराएगी।

लेकिन जिस तरह आज आक्रामक राजनीति चल रही है, क्या आपको लगता है कि प्यार से सियासत की रणनीति आगे बढ़ पाएगी?
-आपको लगता है कि मैं आक्रामक हूं। मैं तो प्यार से बोल रहा हूं। मैं नरेंद्र मोदीजी के गले मिला पर उनकी समझ में नहीं आया कि वह क्या करें। देश में जाकर देख लीजिए, पता लग जाएगा कि प्यार जीत रहा है या नफरत जीत रही है।

राजनीति को सकारात्मक दौर में ले जाने का आपका एजेंडा मौजूदा दौर में कितना व्यवहारिक है?
-हमारी कोशिश होगी कि जो भय का माहौल है उसे मिटा दें। हम सबकी आवाज सुनकर काम करते हैं और हम नफरत की जगह प्यार से काम करते हैं। जैसे मैंने आपसे बोला कि मैं नरेंद्र मोदीजी से भी नफरत नहीं करता। मैं नरेंद्र मोदीजी से गले मिला। जब नरेंद्र मोदीजी ने मेरे पिता के बारे में बोला तो मैंने ट्विटर पर उनको प्यार भरा संदेश भेजा। मैं अब भी उनसे नफरत नहीं करता। नफरत से नफरत कभी खत्म नहीं हो सकती। मैं नरेंद्र मोदीजी को नफरत से कभी नहीं हरा सकता। प्यार से ही नफरत को काट सकता हूं। प्यार से नफरत और नरेंद्र मोदी को हराया जा सकता है।

चुनाव आखिरी चरण में है। आपको नहीं लगता कि विपक्ष अगर एकजुट होता तो नतीजे शायद आपके लिए बेहतर होते?
-विपक्ष एकजुट है। तमिलनाडु में गठबंधन है। महाराष्ट्र में गठबंधन है। झारखंड में गठबंधन है। बिहार में गठबंधन है। जम्मू-कश्मीर में गठबंधन है। हमारा गठबंधन कहां नहीं है। उत्तर प्रदेश में सेक्युलर फोर्स जीतेगी, सपा-बसपा या कांग्रेस। बंगाल में भी सेक्युलर फोर्स जीतेगी। अच्छा, एक और बात बताता हूं, भाजपा के सहयोगी दल अंदर ही अंदर हमें मैसेज दे रहे हैं कि वे नरेंद्र मोदीजी को प्रधानमंत्री नहीं बनाने वाले।

इंटरव्यू का पहला भाग पढ़ें-  चुनाव नतीजों के साथ खत्म हो जाएगा मोदी का दौर : राहुल गांधी

 इंटरव्यू का अंतिम भाग पढ़ेंः 'चौकीदार चोर है और राफेल में चोरी हुई है', मैं इससे पीछे नहीं हटने वाला हूं : राहुल गांधी

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Posted By: Dhyanendra Singh

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