लोकसभा चुनाव केे छठेे चरण का मतदान आज खत्‍म हुआ है। सभी पार्टियां अपने-अपने तरीके से चुनावी रण में ताल ठोंक रही हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी के अध्‍यक्ष राहुल गांधी भी पार्टी की जीत के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। दिल्ली से इंदौर की करीब सवा घंटे की उड़ान के दौरान अपनी रणनीतिक टीम को जरूरी दिशा-निर्देश देने के बाद अपने विशेष विमान में राहुल गांधी ने ‘दैनिक जागरण’ के सहायक संपादक संजय मिश्र से लंबी बातचीत की। पेश है इस बातचीत के अंश : 

आप 2019 के चुनाव को भारत की मूल आत्मा के लिए निर्णायक धर्मयुद्ध की तरह मान रहे हैं। इसकी  वजह क्या है?

- अंग्रेजों के बाद पहली बार किसी एक संगठन ने हिंदुस्तान की संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश की है। नरेंद्र मोदी और आरएसएस हिंदुस्तान की संस्थाओं पर आक्रमण कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि एक संगठन हिंदुस्तान की सभी संस्थाओं को नियंत्रित करे। आपने देखा होगा, पहली बार हिंदुस्तान के इतिहास में सुप्रीम कोर्ट के चार जज जनता के सामने आकर कहते हैं कि हमें काम नहीं करने दिया जा रहा है। यह कौन सी शक्ति है जो हिंदुस्तान के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को काम नहीं करने दे रही। आप किसी भी मंत्रालय में चले जाइए, दिल्ली में हर मंत्रालय में स्पेशल ओएसडी है। यह आरएसएस द्वारा नियुक्त आदमी हैं जो मंत्रालयों को, हिंदुस्तान की संस्थाओं को रिमोट कंट्रोल से चला रहे हैं। आप योजना आयोग को देखिए, रिजर्व बैंक को देखिए। पहली बार हिंदुस्तान के महान वित्तीय संस्थानों को दरकिनार करके नरेंद्र मोदीजी ने नोटबंदी का दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय लिया और लाखों लोगों का नुकसान कर दिया। आरएसएस और भाजपा का यह आक्रमण सीधा संविधान पर है क्योंकि ये सब वे संस्थाएं हैं जो संविधान से संरक्षित हैं।’

लोकसभा चुनाव अब अपने अंतिम चरण में है। पार्टियों का अपना-अपना आकलन होता है। आप चुनाव नतीजों की दिशा का किस तरह आकलन कर रहे हैं?

-कांग्रेस सरकार बनाएगी यह एकदम साफ है। कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनाएगी। भाजपा सरकार बना ही नहीं सकती, नरेंद्र मोदी सरकार बना ही नहीं सकते। नरेंद्र मोदी का युग हिंदुस्तान की राजनीति में 23 मई को समाप्त हो जाएगा।’

आपने कहा कि नरेंद्र मोदी का युग 23 मई को समाप्त हो जाएगा। क्या यह आक्रोश है?

- मैं प्यार से कह रहा हूं नफरत से नहीं। नरेंद्र मोदीजी का जो विचार है कि हिंदुस्तान को नफरत से आगे ले जाया जा सकता है, 23 मई को खत्म हो जाएगा। हिंदुस्तान नफरत को प्यार से हराएगा।’

नरेंद्र मोदी और भाजपा को हराने के आपके विश्वास का आधार क्या है?

- हम नरेंद्र मोदी को नहीं हरा रहे हैं। हम जो उनमें नफरत की भावना है, उसको हरा रहे हैं। दुर्भाग्यवश नरेंद्र मोदीजी आज अपने कार्यों के कारण उसके प्रतीक बन गए हैं। हम उस भावना, उस शक्ति के खिलाफ लड़ रहे हैं जो हिंदुस्तान के संविधान और संस्थाओं को कमजोर और खत्म करना चाहती है। नरेंद्र मोदीजी उस शक्ति के एक प्रतीक हैं।’

आपके इस विश्वास का कोई आधार है कि वे हार रहे हैं। किस तरह आपने इसका आकलन किया है?

- दो-तीन चीजें हैं, एक तो आप देश का मूड देख लीजिए। दूसरी बात नोटबंदी, गब्बर सिंह टैक्स औ अर्थव्यवस्था की हालत। किसी से भी पूछ लीजिए, किसी दुकानदार से, किसी बिजनेस करने वाले से, किसी बेरोजगार युवा से पूछ लीजिए। तीसरी बात, आप देखिए नरेंद्र मोदी पहले रोजगार की बात करते थे, किसानों की बात करते थे, भविष्य की बात करते थे, ‘देखो मुझे प्रधानमंत्री बनाओ मैं भविष्य में हिंदुस्तान को ये-ये दूंगा।’ अब नरेंद्र मोदी भविष्य की बात ही नहीं कर रहे। अब नरेंद्र मोदी बीते हुए समय की बात कर रहे हैं। वह बीते हुए समय में जी रहे हैं। वह 30 साल पहले की बात करते हैं। जो बीते हुए समय में जी रहा है, वह इतिहास ही है, भविष्य तो हो नहीं सकता। वह भविष्य की बात इसलिए नहीं कर रहे हैं क्योंकि उनके पास इस देश के भविष्य को लेकर कोई नजरिया नहीं है, कोई योजना नहीं है।’

नई सरकार को लेकर विपक्ष में अभी से गतिविधियां तेज हो गई हैं। चंद्रबाबू नायडू आपसे मिले थे। क्या लगता है किस तरह की सरकार का स्वरूप विपक्ष दे सकता है?

- मैंने बोला है कि इस देश की मालिक हिंदुस्तान की जनता है। 23 मई को मालिक अपना निर्णय देश को बता देगा। उसके बाद किस प्रकार की सरकार बनेगी, कैसे बनेगी, ये सबको पता चल जाएगा। मालिक के बोलने से पहले मैं कुछ नहीं बोलना चाहता। मगर मैं यह बोल सकता हूं कि मालिक मुझे यह अहसास दिला रहा है कि भाजपा नहीं जीतने वाली है।’

इस चुनाव को भाजपा ने नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी बनाने का प्रयास किया है। जिस तरह का अब तक का आपका आकलन है, तो क्या यह माना जाए कि नरेंद्र मोदी पर राहुल गांधी भारी पड़ेंगे?

- राहुल गांधी कौन है? राहुल गांधी कुछ नहीं है। नरेंद्र मोदी को अगर कोई हराएगा तो जिसको मैंने मालिक बोला, हिंदुस्तान की जनता हराएगी। मैं तो सिर्फ जनता की आवाज सुन रहा हूं। मैं तो बस छोटा किरदार हूं। नरेंद्र मोदी भी एक किरदार ही हैं। मगर नरेंद्र मोदी सोचते हैं कि वह खुद डिसाइडिंग फैक्टर हैं। मेरे विचार से, मेरी समझ से यह थोड़ा गलत विचार है। डिसाइडिंग फैक्टर हिंदुस्तान की जनता है। हिंदुस्तान की जनता ने जो तय किया है, वही होगा।’

कांग्रेस का मुख्य चुनावी नरेटिव रोजगार, किसान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और भ्रष्टाचार पर प्रहार है। मगर चुनावी विमर्श ज्यादातर राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद पर रहे हैं। ऐसे में विपक्ष की बात जनता तक कहां तक पहुंची है?

- देखिए, मैं लगातार कह रहा हूं कि इस चुनाव में जनता के सबसे बड़े मुद्दे हैं- बेरोजगारी, किसान की हालत, संस्थाओं पर आक्रमण और भ्रष्टाचार। परंतु भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह कहना चाहते हैं कि 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी से देश मजबूत होता है, अगर आप मुझे बोल रहे हो कि जो हिंदुस्तान की सबसे बड़ी ताकत है अर्थव्यवस्था,उसके कमजोर होने से देश मजबूत होता है, अगर आप कह रहे हो कि नोटबंदी ने देश को मजबूत किया है, अगर आप मुझे कह रहे हो कि पांच अलग-अलग गब्बर सिंह टैक्स ने देश को मजबूत किया है तो फिर ठीक है, यह आपकी राय है। मोदीजी की राय है, मेरी राय तो नहीं है। मेरी राय यही है कि हिंदुस्तान की शक्ति है उसकी अर्थव्यवस्था, हिंदुस्तान की शक्ति उनके युवाओं में है और अगर हिंदुस्तान के युवाओं के पास कुछ करने को नहीं है, वे बेरोजगार हैं तो हिंदुस्तान की शक्ति का प्रयोग नहीं हो रहा है। हिंदुस्तान ऐसे में पिछड़ जाएगा, तरक्की की राह से भटक जाएगा।’

प्रधानमंत्री की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक के लगातार जिक्र के बाद कांग्रेस ने पूर्व में ऐसी कार्रवाई की बात कही। मगर प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की बात पर सवाल उठाते हुए मी टू के आरोप लगाए। इस पर आप क्या कहेंगे?

- मोदी सरकार सोचती है कि हिंदुस्तान की आर्मी, ‘मोदीजी की सेना है।’ यह उनकी सोच है, यह उनका एटिट्यूड है। मैंने साफ बोल दिया था पुलवामा के बाद, बालाकोट के बाद कि कांग्रेस सेना का पूरा साथ देगी,देश का पूरा सपोर्ट करेगी और सरकार का पूरा सपोर्ट करेगी। कांग्रेस इस मुद्दे के ऊपर राजनीतिक तू-तू, मैं-मैं नहीं होने देगी क्योंकि सेना देश की राजनीति से ऊपर है, उनका स्थान पवित्र है। हम सेना के ऊपर कभी राजनीति नहीं करते। परंतु नरेंद्र मोदी ऐसा नहीं सोचते। नरेंद्र मोदीजी के पास बचा क्या, अब जो सेना की उपलब्धि है वह उनसे छीनकर अपनी उपलब्धि बताना चाहते हैं। ठीक है कर लीजिए 10-15 दिन हैं, कर लीजिए मौज। मगर 23 मई को आपको पता चल जाएगा कि हिंदुस्तान ने क्या सोचा है, क्या नहीं सोचा है। अच्छा, एक बात बताइए यह जो मसूद अजहर है, उसको कंधार किसने भेजा? क्या कांग्रेस ने भेजा था? यह जैश-ए-मुहम्मद का जो ग्रुप है, उसको पैसे किसने दिए? किसका मंत्री कंधार गया था? क्या व  मंत्री कांग्रेस का था? पुलवामा में जो जैश-ए-मुहम्मद केद्वारा सीआरपीएफ पर हमला हुआ, क्या प्रधानमंत्रीजी देश को बताते हैं कि भाजपा ने कैसे उन आतंकवादियों को कंधार जाकर छोड़ा था। यह क्यों नहीं कहते कि भाजपा सरकार ने जैश-ए-मुहम्मद के सामने झुककर उनको पैसा दिया। हमारा कांग्रेस का कोई मंत्री कंधार नहीं गया। नरेंद्र मोदीजी इसकी कोई बात नहीं करते। नरेंद्र मोदी यह क्यों नहीं समझाते कि पुलवामा में हमारे सीआरपीएफ के लोग कैसे मारे गए? मैं समझता हूं कि पाकिस्तान बदमाशी करेगा, मगर यह हिंदुस्तान की सरकार की जिम्मेदारी है कि हमारे सीआरपीएफ के लोगों को बचाया जाए।

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Posted By: Prateek Kumar

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