ओडिशा लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों से गुजर रहा है। दो दौर का मतदान हो चुका है और दो का बाकी है। भाजपा सत्ताधारी बीजद के खिलाफ प्रमुख चुनौती बनकर सामने आई है। केंद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस व कौशल विकास मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कहते हैं कि ओडिशा के लोगों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति विश्‍वास बना है। दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख नितिन प्रधान से भुवनेश्‍वर में हुई बातचीत में प्रधान ने कहा कि ओडिशा बदलाव चाहता है। पेश है उनसे साक्षात्कार के प्रमुख अंश :-

मौजूदा आम चुनावों को आप कैसे देख रहे हैं। केंद्र और ओडिशा दोनों में पार्टी की कैसी संभावनाएं हैं?
केंद्र में तो हम सरकार बना ही रहे हैं, ओडिशा में भी बीजेपी सरकार बनाएगी। राज्य में हम ज्यादा से ज्यादा लोकसभा सीटों पर जीतेंगे।

ओडिशा में आप किन मुद्दों को लेकर चुनाव में उतरे हैं?
यहां लोकसभा और विधानसभा का एक साथ चुनाव हो रहा है। मूलत: यहां दो मुद्दे हैं। एक प्रधानमंत्री की  विश्वसनीयता और दूसरा नवीन पटनायक की सरकार का कामकाज। पिछले पांच साल में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जिस प्रकार के कार्यक्रम शुरू किये हैं, जिस प्रकार की योजनाएं बनाई है, उनसे गरीब लोगों के भीतर नई प्रकार की आस्था और उम्मीद पैदा हुई है। प्रधानमंत्री आवास योजना हो, शौचालय बनाने की बात हो या प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना। सभी में इस देश के गरीब लोग लाभान्वित हुए हैं। उज्ज्वला योजना के तहत ओडिशा में चालीस लाख बहनों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केंद्र सरकार के पैसे से राज्य में दस लाख से अधिक घरों का निर्माण कराया गया है। पचास लाख से ज्यादा शौचालय बने, 24 लाख घरों में बिजली पहुंची। तीन करोड़ 26 लाख लोगों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में सस्ता अनाज दिया जा रहा है। इन सभी कामों से जनता में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति विश्‍‍‍‍वास और भरोसा जगा है।

लेकिन राज्य की नवीन पटनायक सरकार भी गरीबों की मदद करने वाले कार्यक्रम लागू करने का दावा कर रही है?
इसे आप दावा ही कह सकते हैं। लेकिन, असल में लोगों को प्रदेश में कुछ मिला ही नहीं है। नवीन बाबू की सरकार को प्रदेश में 19 साल हो गये हैं। करीब दो दशक का समय प्रजातंत्र में बहुत बड़ी अवधि मानी जाती है। इतनी लंबी अवधि में सरकार चलाने के बावजूद नवीन बाबू की सरकार बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाने में असफल रही है। सिंचाई, पीने का पानी, डॉक्टर, स्वास्थ्य, शिक्षक, गरीब बच्चों को शिक्षा, रोजगार, ओडिशा की एक तिहाई जनता काम करने के लिए बाहर जाती है। इन लोगों के लिए इस सरकार ने कुछ नहीं किया। इसके कारण लोगों में निराशा है, नाराजगी है। लोग अब परिवर्तन चाहते हैं। इसीलिए इस चुनाव में मोदी जी के प्रति आस्था और स्थानीय सरकार के प्रति अनास्था इस चुनाव में प्रमुख मुद्दे बने हैं।

लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र की योजनाओं के मुकाबले प्रदेश में उसकी अपनी योजनाओं का लाभ लोगों को मिल रहा है।
देखिए पहला तो यह कि राज्य सरकार ने केंद्र की दो बड़ी योजनाओं को यहां लागू ही नहीं किया है। इनमें आय़ुष्मान भारत और पीएम किसान दोनों ही योजनाएं गरीब लोगों को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई हैं। इसके अलावा जितनी मात्रा में राज्य में शौचालयों का निर्माण होना चाहिए था, नहीं हुए। बीजू जनता दल ने प्रदेश में विकास के कामों को पूरी तरह अनदेखा किया है। केवल राजनीति की, विकास को पीछे छोड़ दिया। इस बात को लेकर लोगों में नाराजगी है।

लेकिन 19 साल से एक पार्टी यहां सरकार चला रही है। क्या सरकार विरोधी रुख यहां कभी नहीं बना?
इसकी प्रमुख वजह यही है कि यहां कोई विकल्प अब तक था ही नहीं। अब भाजपा ने लोगों को विकल्प दिया है। कांग्रेस और बीजेडी की यहां मिलीभगत है। कांग्रेस यहां बीजेडी की बी टीम के तौर पर काम करती है। राज्य सरकार के भ्रष्टाचार और गरीब विरोधी कदमों के खिलाफ कभी आवाज नहीं उठाती। पीसीसी अध्यक्ष और उनके भाई दोनों नवीन पटनायक के नेतृत्व में काम कर रहे है। पीसीसी अध्यक्ष के भाई नवीन पटनायक के बड़े सहयोगी हैं। यही वजह है कि लोगों के सामने कभी विकल्प उभरकर नहीं आया। लेकिन अब भाजपा के रूप में विकल्प लोगों के समक्ष है और लोग इसे समझ भी रहे हैं।

भ्रष्टाचार भी मुद्दा है क्या?
भ्रष्टाचार चरम पर है। चिटफंड घोटाला, खनन माफिया इस राज्य के मालिक बन चुके हैं। दर्जनों विधायक और एमपी जेल जाकर आ चुके हैं। अब जमानत पर हैं। तमिलनाडु का एक खनन माफिया प्रभाकरन एक प्रकार से राज्य का मुख्यमंत्री है। इस राज्य में दिवालियापन की पराकाष्ठा है, भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है। बिना रिश्‍वत के जनता का कोई काम नहीं होता। पूरी राज्य सरकार भ्रष्टाचार के बूते चल रही है। हम स्वच्छ और पारदर्शी सरकार और प्रशासन देकर जनता को राहत देना चाहते हैं। राज्य का चहुंमुखी विकास करना चाहते हैं।

भाजपा और बीजद के चुनाव प्रचार से स्पष्ट हो रहा है कि इस बार चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को केंद्र में रखकर लड़ा जा रहा है। क्या यह दो शख्सियतों के बीच का मुकाबला है?
हम तो चाहते ही यही हैं कि चुनाव प्रधानमंत्री बनाम नवीन पटनायक हो। हमने भी इसे मुद्दा भी बनाया है। इसका फायदा भी मिल रहा है। दरअसल चुनाव का मुद्दा विकास और गरीब कल्याण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र ने गरीब कल्याण की इतनी अधिक योजनाएं तैयार की हैं की पूरे देश के गरीबों को इनका लाभ मिल रहा है। लेकिन, कुछ स्कीमों या कार्यक्रमों को ओडिशा की सरकार ने लागू ही नहीं किया है। हम चाहते हैं कि लोगों को इस बात की जानकारी हो कि राज्य सरकार उन्हें किस प्रकार केंद्र की बेहतर स्कीमों से मिलने वाले लाभ से वंचित कर रही है। प्रदेश सरकार की स्कीमें भ्रष्टाचार की वजह से गरीबों तक पहुंच ही नहीं रही है। ऊपर से केंद्र की स्कीमों को लागू न कर जनता को लाभ मिलने नहीं दिया जा रहा है। यही बात हम बताना चाहते हैं कि ताकि जनता तय करे कि उनके लिए कौन बेहतर है।

Posted By: Prateek Kumar

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