आगरा, श्रवण शर्मा। मैनपुरी समेत ब्रज क्षेत्र की छह सीटों पर मंगलवार को होने वाले मतदान के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है। दुकान, चौराहा, सार्वजनिक स्थल हो या रेलवे-बस स्टेशन, सभी जगह चुनावी चर्चा चल रही है। किसकी सरकार बनेगी, यह तो 23 मई को तय होगा, फिलहाल जनता के दावों में तो पीएम बनने की रेस में मोदी ही आगे निकलते दिख रहे हैं। स्थानीय सांसद पर लोगों की ज्यादा राय नहीं दिखती, पर समूचा जोर केंद्र में सरकार बनने पर है। कोई राजग और कुछ दलों की सरकार बनने की बात करता है तो कोई यूपी में भाजपा और सहयोगियों की सीट कम होने के दावे करता है। चुनाव को लेकर सबकी राय और सोच अलग अलग है। ऐसे ही नजारों को देखने के लिए मैनपुरी से भोगांव जाती पैसेंजर में जागरण ने सफर किया। 

रविवार सुबह घड़ी की सुइयां नौ बजे की ओर हैं। मैनपुरी से भोगांव होकर फरुखाबाद जाने वाली पैसेंजर ट्रेन जंक्शन पर खड़ी है। सीटें तो सभी भर चुकी हैं। साढ़े नौ बजे ट्रेन आगे बढ़ने के लिए हॉर्न देती है तो कुछ और सवारी चढ़ आती हैं। जागरण रिपोर्टर भी इसी दौरान ट्रेन में सवार होता है। दो मिनट बाद ट्रेन आगे जाने के लिए चलती है तो प्लेटफार्म पर खड़े युवा दरवाजों पर आकर खड़े हो जाते हैं। कुछ दूरी पर जाकर अचानक ट्रेन रुकती है। दरवाजे पर खड़े युवक बताते हैं कि एक महिला बच्चों के साथ ट्रेन पकड़ने को दौड़ रही थी, गार्ड ने उसे चढ़ाने के लिए ट्रेन रोकी है। इसी के साथ एक बार हॉर्न देकर ट्रेन मंजिल की ओर चल देती है।

पैसेंजर गाड़ी के रफ्तार में आते ही पहले से बोगी में चल रहे राजनीतिक विश्लेषण की बात को बढ़ाया तो चर्चा शुरू हो गई।

भोगांव जाने वाले राहुल यादव ने मोदी सरकार की योजनाओं पर तंज कसते हुए कहा कि रेल सेवा तो आज तक यहां की ठीक नहीं हो सकी। इस पर फरुखाबाद जा रहे दिनेश कुमार ने सहमति जताई, तो विवेक ने कहा कि रेल सेवा का विस्तार आय पर होता है। यहां से सरकार को कोई फायदा नहीं होता, इसलिए ध्यान नहीं दिया जा रहा। फरुखाबाद और कासगंज को तो कई ट्रेनें भी मिल चुकी हैं। यह बात समाप्त हुई कि टिंडौली स्टेशन आ गया। पहले से खचाखच भरे डिब्बे में कई और यात्री आ गए। बातचीत का सिलसिला चला तो देवेंद्र ने मोदी सरकार पर लुभावनी योजनाओं के जरिये लोगों को भिखारी बनाने का इल्जाम लगा दिया। इस पर 80 साल के नौबत लाल फट पड़े। लला, तूने नैकऊ गरीबी नाय देखी। बीमारन कूं पांच लाख तक कौ इलाज दिवाय रह्यौ है।

तुमकौ का पतौ, इलाज करायवे में कितेक तकलीफ हौंते। मोहन सिंह की किसानों के लिए कुछ न करने की बात कर रहे राजनलाल का सटीक जवाब आया, हमाय खाते में दो बेर में चार हजार रुपये आय गए। अब मोदी फिर ते पीएम बनेगो तो सबन्ने इलाज दैगो। एक संग सबरे उज्जा (समस्याएं) कूं नाय सिमटाय दैगो।

पैसेंजर ट्रेन परौख, कचहरी और मोटा स्टेशन के बाद बाबा नींम करौली स्टेशन पर रुकते हुए सवारियों को लेकर भोगांव के लिए चलती रही तो बातचीत के दौरान सर्जिकल स्ट्राइक, विदेशों में धाक और भ्रष्ट्राचारियों पर कार्रवाई जैसे सवाल और जवाब के साथ गैस की लाइन समाप्त होने की बात पर जाकर थम गई। भोगांव आने से पहले स्थानीय प्यारेलाल ने इसे यूरिया संकट और बीज मिलने की दिक्कत दूर होने की बात कहकर विराम दिया।

रोजगार पर भी होती सर्जिकल स्ट्राइक

इसी ट्रेन से पढ़ाई के सिलसिले में फरुखाबाद जा रहे विशाल और श्याम केंद्र सरकार की योजनाओं को गरीब और मध्यम वर्ग के हित में बताते हुए पीएम की तारीफ करते हुए कहते हैं कि यह तो सब ठीक है, लेकिन रोजगार पर खास नहीं हुआ। एक सर्जिकल स्ट्राइक मोदीजी रोजगार पर भी कर देते तो शिक्षित बेरोजगारों को भी लाभ मिल जाता। वैसे बेराजगारों की भीड़ बढ़ाने के लिए वह परीक्षाओं में नकल और ग्रे¨डग सिस्टम को दोषी बताते रहे।

 

Posted By: Prateek Gupta

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