नई दिल्ली, एएनआइ। लोकसभा चुनाव के दौरान इवीएम की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठाने वालों को चुनाव आयोग ने करारा जवाब दिया है। चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जब इवीएम को सील करने की प्रक्रिया पार्टी के लोगों के सामने हुई है, फिर आरोप लगाना बेबुनियाद है।

चुनाव आयोग ने कहा कि सभी मामलों में पार्टियों के उम्मीदवारों के सामने EVM और VVPAT को ठीक से सील करने का काम किया गया है।  इस दौरान पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की गई है। इसके साथ ही स्ट्रॉन्ग रूम में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। सीएपीएफ की कड़ी सुरक्षा के बीच सारी सामग्री रखी हुई है। ऐसे में किसी तरह का आरोप निराधार है। चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों को स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी करने की भी अनुमति दी है।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने टेक्नोक्रेट्स के एक समूह द्वारा वीवीपैट को लेकर दायर एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली अवकाश पीठ ने चेन्नई स्थित एक संगठन द्वारा दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। दरअसल टेक्नोक्रेट्स के एक समूह द्वारा 23 मई को मतगणना के दौरान ईवीएम के साथ VVPAT पर्चियों के 100 फीसदी मिलान कराने की मांग की गई थी।

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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल पूछा कि जब मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक बड़ी पीठ ने पहले ही मामले को निपटा दिया है और एक आदेश पारित किया है, फिर आप दो-न्यायाधीशों की अवकाश पीठ के समक्ष इसे क्यों उठा रहे हैं। हम CJI के आदेश को ओवरराइड नहीं कर सकते।

बता दें कि शीर्ष अदालत ने 7 मई को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में 21 विपक्षी नेताओं द्वारा दायर एक समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि ईवीएम के साथ वीवीपीएटी पर्चियों का मिलान 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए। शीर्ष अदालत ने 8 अप्रैल को चुनाव आयोग को लोकसभा चुनावों में प्रति विधानसभा क्षेत्र में एक से पांच मतदान केंद्रों पर ईवीएम के साथ वीवीपीएटी पर्चियों के मिलान को बढ़ाने का निर्देश दिया।

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Posted By: Manish Pandey

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