जयपुर, नरेंद्र शर्मा। लोकसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो गया है। राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटों पर राजनीतिक दलों ने चुनाव अभियान तेज कर दिया। विधानसभा चुनाव के नतीजों और राज्य में बदले समीकरण का असर लोकसभा चुनाव में भी पड़ेगा। राज्य में कांग्रेस ने राज्य में एक बार फिर वापसी तो की है, लेकिन भाजपा और उसके मत प्रतिशत में मात्र .5 फीसदी का अतंर है। इस लिहाज से लोकसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने की संभावना है ।

उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे होने की वजह से प्रदेश के भरतपुर और धौलपुर-करौली संसदीय क्षेत्रों में बसपा,सपा का भी कुछ हद तक प्रभाव रहता है। उत्तरप्रदेश की हवा का असर इन दोनों संसदीय क्षेत्र में भी नजर आता है। यूपी में जिस तरह से कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की सक्रियता बढ़ी है,उसका असर भी इन दोनों मतदाओं पर नजर आने लगा है,चाहे वे मतदान किसी के पक्ष में करें। लेकिन प्रियंका गांधी की चर्चा अवश्य करते हैं।करीब तीन माह पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में बसपा एक अहम फैक्टर बनकर उभरी है। अब लोकसभा चुनाव में एक बार फिर बसपा की अहम भूमिका हो सकती है।

ये भी पढ़ें- भाजपा ने जारी की उम्‍मीदवारों की 12वीं लिस्‍ट, पांच राज्‍यों में इन्‍हें मिला मौका

भरतपुर सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि

भरतपुर लोकसभा सीट पर अब तक 7 बार कांग्रेस और 5 बार भाजपा का कब्जा रहा। इस सीट पूर्व राजपरिपवार का अच्छा खासा दबदबा माना जाता है। तीन बार राजपरिवार के पूर्व महाराजा विश्वेंद्र सिंह, एक बार उनकी पत्नी दिव्या सिंह चुनाव जीती है। दो बार नटवर सिंह और एक बार कृष्णेंद्र कौर दीपा सांसद चुनी गईं । विश्वेंद्र फिलहाल कांग्रेस में है और अशोक गहलोत सरकार में केबिनेट मंत्री है।

विश्वेन्द्र सिंह दो बार भाजपा से एक बार जनता दल से सांसद रहे है। परिसीमन के बाद यह सीट एससी के लिए आरक्षित हो गई। भरतपुर जिला पूर्वी राजस्थान में स्थित ब्रज क्षेत्र का हिस्सा है, जिसकी सीमाएं उत्तर प्रदेश से लगती है।इस क्षेत्र में यूपी के क्षेत्रीय दलों, खासकर बीएसपी का खासा प्रभाव नजर आता है। कुछ असर चौधरी अजीत सिंह का भी है।

ये भी पढ़ें- लोकसभा चुनाव: बिहार में इन सीटों पर होगा कड़ा मुकाबला, ताल ठोकेंगी बाहुबलियों की बीवियां

धौलपुर-करौली का राजनीतिक और सामाजिक इतिहास

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे धौलपुर के पूर्व राजपरिवार महारानी है । धौलपुर-करौली संसदीय क्षेत्र भी भरतपुर की तरह यूपी से सटा हुआ है। उत्तरप्रदेश की राजनीतिक हवा का असर इस संसदीय क्षेत्र में हमेशा नजर आता है । बसपा और सपा सालों से इस संसदीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका में रही है। इस सीट पर 1962 में निर्दलीय,1967,1971,1980 और 1984 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी । 1977 में जनता लहर में श्याम सुंदर लाल ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1989 से 2004 तक लगातार छह बार भाजपा ने जीत दर्ज कराई थी। इसके बाद 2009 में कांग्रेस और 2014 में फिर भालपा ने कब्जा किया। इस क्षेत्र में 22.52 प्रतिशत एससी,14.39 एसटी और शेष अन्य है । एससी में जाटव समाज का यहां काफी प्रभाव माना जाता है।  

चुनाव की विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Posted By: Preeti jha

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप