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आगरा, जागरण संवाददाता। सपा और रालोद से गठबंधन के बाद खुद को मजबूत मान रही बसपा को शनिवार को तगड़ा झटका लगा है। हाथी की राह में हाथ ने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। तीन पूर्व विधायक एक साथ जाने से सीकरी के सियासी समीकरण अचानक बिगड़ गए हैं।
पहले सीमा उपाध्याय को गठबंधन से सीकरी का प्रत्याशी बनाया गया। पूर्व सांसद सीमा के पति पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के बसपा में बड़े कद के कारण अन्य नेताओं की महत्वाकांक्षा दबी हुई थीं। अचानक सीमा के सीकरी से चुनाव न लडऩे के फैसले के बाद कई कद्दावर नेता सीकरी से टिकट मांगने लगे। इनमें पूर्व विधायक धर्मपाल सिंह, पूर्व विधायक सूरजपाल और पूर्व विधायक मधुसूदन शर्मा भी टिकट के दावेदारों में शामिल थे। लेकिन ऐन वक्ता बसपा ने दिल्ली के कारोबारी राजवीर सिंह के नाम का ऐलान कर दिया। ऐसे में बसपा खेमे में अंदरखाने से लेकर खुलकर विरोध भी शुरू हो गया। तीन पूर्व विधायकों धर्मपाल सिंह, भगवान सिंह कुशवाहा और सूरजपाल सिंह के एक साथ पार्टी छोड़कर कांग्रेस में जाने से बसपा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बसपा नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। सूत्रों का कहना है कि इन विधायकों के संपर्क में रहे कुछ लोग और बसपा छोड़ सकते हैं। ऐसे में मुश्किल और बढ़ सकती है।

दोस्‍ती निभा रहे पूर्व विधायक

भगवान सिंह कुशवाहा एक साल पहले ही बसपा से निष्कासित हो गए थे। बाकी दोनों पूर्व विधायक राजबब्बर से अपनी दोस्ती निभाने के लिए कांग्रेस में शामिल हुए हैं। जनता ने उन्हें दो-दो बार विधायक विकास कराने के लिए बनाया था, लेकिन इन लोगों ने जनता के साथ धोखा किया।
सुनील चित्तौड़, पश्चिम उत्तर प्रदेश प्रभारी, बसपा। 

Posted By: Prateek Gupta

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