लखनऊ, जेएनएन। गोरखपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद प्रवीण निषाद के भाजपा का दामन थामने के बाद सपा ने भी शुक्रवार को भाजपा के एक सांसद को तोड़ लिया। भाजपा को तगड़ा झटका देते हुए सपा ने मछलीशहर सीट के सांसद रामचरित्र निषाद को अपने पाले में कर लिया। वहीं गोरखपुर की पिपराइच सीट से पूर्व विधायक राजमती निषाद और उनके पुत्र अमरेंद्र निषाद ने फिर सपा का दामन थाम लिया। राजमती और अमरेद्र हाल ही में सपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे। इन तीनों को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी मुख्यालय पर सदस्यता ग्रहण कराई।

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखपुर सीट पर हुए उपचुनाव में सपा के टिकट पर सांसद चुने गए प्रवीण निषाद को भाजपा द्वारा अपने सिंबल पर संत कबीर नगर से चुनाव लड़ाने और निषाद पार्टी का समर्थन हासिल करने के बाद सपा ने भाजपा को उसी अंदाज में जवाब दिया है। रामचरित्र मछलीशहर सीट से अपना टिकट काटे जाने से भाजपा से नाराज थे। भाजपा ने यह टिकट मछलीशहर से पिछला लोकसभा चुनाव बसपा प्रत्याशी के रूप में लडऩे वाले वीपी सरोज को दिया है। सरोज ने हाल ही में बसपा छोड़ भाजपा को गले लगाया था।

उधर राजमती और उनके पुत्र अमरेंद्र भी टिकट की आस में हाल ही में सपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा में टिकट की गुंजायश न बनती देख उन्होंने अपने कदम वापस खींच लिए। अखिलेश ने राजमती और अमरेद्र का नाम लेकर कहा कि हमारे समाजवादी साथी कुछ दिनों के लिए हमसे अलग हो गए थे लेकिन अब फिर घर वापस आ गए हैं। वहीं उन्होंने रामचरित्र निषाद को लोकसभा चुनाव में सपा का प्रत्याशी बनाये जाने का इशारा किया। यह कहकर कि 'हम इन्हें जनता के बीच भेजना चाहते हैं।' सपा अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव में तेजी से आगे बढ़ रहे गठबंधन के कारवां को इन तीनों के आने से और मजबूती मिलेगी।

भाजपा छोड़ सपा में शामिल मछलीशहर के भाजपा सांसद रामचरित्र निषाद का जौनपुर में लंबा राजनीतिक सफर रहा। बस्ती जिले के मूल निवासी रामचरित्र निषाद दिल्ली में आवास बनाकर रहते हैं। वह 2009 में मछलीशहर (सु) लोकसभा सीट पर अपना दल से चुनाव लड़े और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। 2014 में वे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े और सांसद बने। निषाद जाति से ताल्लुक रखने वाले रामचरित्र मछलीशहर सीट अनुसूचित जाति से सुरक्षित होने के कारण विवादों में रहे और इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा भी विचाराधीन है। हालांकि वह दिल्ली राज्य के प्रमाण पत्र पर खुद को अनुसूचित जाति का होने की दलील देते रहे। लोकसभा 2019 चुनाव के दौरान मौजूदा सांसद का पार्टी छोड़ना बीजेपी के लिए झटका माना जा रहा है। निषाद को इस बार भाजपा ने मछलीशहर सीट से दोबारा टिकट नहीं दिया है।

Posted By: Umesh Tiwari