कोडरमा, [अनूप कुमार]। ना-ना करते प्यार मैं तुमसे कर...। अभ्रखांचल का मुख्य शहर झुमरीतिलैया के सियासी गलियारे में यह गीत अचानक खूब चल पड़ा है। एक जमाने से गीत-संगीत के लिए मशहूर रहे झुमरीतिलैया के मिजाज में ही गीत-संगीत है। मौसम चुनावी है तो गीतों की फरमाइश भी तेजी से बदलते सियासी उलटफेर के अनुसार बदलती जा रही है।

इसमें कुछ गीत अपनी प्रासंगिकता खोकर पुराने हो जा रहे, तो कुछ को नया कलेवर देकर सियासी बदलाव के अनुरूप ढाल दिया जा रहा है। वैसे भी मौसम चुनावी है तो गीत-गजल गढ़े ही जाएंगे। दो दिन पूर्व तक शहर में, इन्कार करना मुश्किल है..., इकरार करना मुश्किल है..., खूब चल रहा था।

उधर सोमवार शाम चार बजे मैडम के गले में भगवा चोला पड़ते ही, ना-ना करते प्यार...हाय मैं... बाजार में हिट हो गया। शहर की नब्ज टटोलेें तो इसके जेहन में ही खुशमिजाजी है। सियासत अपनी जगह है, पर आपसी संबंधों की मिठास यहां के प्रसिद्ध कलाकंद की तरह लोगों की जुबां पर रहती है। शाम ढलने के साथ ही जब चाय की चुस्की के साथ अलग-अलग विचारधारा से जुड़े लोग आपस में मिले तो अंत्याक्षरी ही शुरू हो गई।

ना-ना करते प्यार... वाले गीत के जवाब में भारी मन से अपनों ने तुरंत एक पुराना गीत- तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं, तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी... को नया कलेवर देकर गुनगुनाने लगे। बहरहाल, जैसे-जैसे चुनावी रंग परवान चढ़ेगा फिजां में गीतों की मस्ती उसी तरह छाएगी।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस