नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) के दूसरे चरण में यूपी का चुनावी रण खासा दिलचस्प है। दूसरे चरण में राज्य की आठ लोकसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। इसमें नगीना, अमरोहा, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा, आगरा और फतेहपुर सीकरी की सीटें शामिल हैं। मथुरा में भाजपा के टिकट पर हेमा मालिनी और फतेहपुर सीकरी में कांग्रेस के टिकट पर राज बब्बर दो बड़े चेहरे आज चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा दूसरे चरण में अमरोहा लोकसभा सीट पर चाचा शिवपाल यादव के उम्मीदवार, सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के प्रत्यासी को टक्कर दे रहे हैं। इसे सीधे तौर पर चाचा-भतीजे के बीच मुकाबले के तौर पर देखा जा रहा है।

चाचा-भतीजे के बीच मुकाबला
सपा अध्यक्ष व भतीजे अखिलेश यादव के रुख से नाराज होकर चाचा शिवपाल यादव ने पार्टी छोड़ी और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) नाम से अपनी अलग पार्टी बना ली। हाल में बनी उनकी पार्टी पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रही है। शिवपाल यादव ने सपा को टक्कर देने के लिए प्रदेश में केवल मैनपुरी सीट को छोड़कर बाकी सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इस तरह से पहले चरण में भी शिवपाल और अखिलेश के गठबंधन के उम्मीदवार आमने-सामने आ चुके हैं। हालांकि, दूसरे चरण में अमरोहा सीट पर चाचा-भतीके के बीच पहली कड़ी टक्कर मानी जा रही है। इस वजह से अमरोहा का चुनावी रण दिलचस्प हो चुका है।

ये भी पढ़ें- Bihar Lok Sabha Election Phase II Voting Live Update : नक्सल प्रभावित इलाकों में भी खूब हो रही वोटिंग

त्रिकोणीय मुकाबले में दलित-मुस्लिम निर्णायक
अमरोहा लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की उम्मीद है। कांग्रेस ने इस सीट पर पहले रशीद अल्वी को उतारा था, लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से ही मना कर दिया। इसके बाद कांग्रेस के टिकट पर सचिन चौधरी यहां से चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने इस सीट पर मौजूद सांसद कंवर सिंह तंवर पर फिर से भरोसा जताया है। वहीं सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की तरफ से बसपा के दानिश अली यहां से ताल ठोंक रहे हैं। ऐसे में यहां का मुकाबला त्रिकोणीय हो चुका है और इसमें मुस्लिम व दलित मतदाताओं की भूमिका काफी अहम होगी। अमरोहा लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें से तीन विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य हैं, जबकि दो पर हिंदू मतदाताओं का दबदबा है। अमरोहा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 5.70 लाख, एससी 2.75 लाख, जाट 1.25 लाख, सैनी 1.25 लाख और अन्य की संख्या लगभग पांच लाख है।

अमरोहा का संसदीय इतिहास
अमरोहा लोकसभा सीट पर 1952 से लेकर 1971 तक के शुरूआती तीन चुनावों में कांग्रेस का कब्जा रहा। इसके बाद दो बार सीपीआई ने इस सीट से दीज दर्ज की। इसके बाद जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच यहां कई बार शह-मात का खेल चला। 1977 व 1980 में जनता पार्टी ने इस सीट पर जीत हासिल की। इसके बाद 1984 में कांग्रेस ने यहां अपना परचम लहराया। 1989 में जनता दल ने फिर से इस सीट पर कब्जा कर लिया। 1996 में सपा ने यहां से जीत दर्ज की। 1998 में पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान ने भाजपा के टिकट पर यहां से जीत हासिल की तो अमरोहा लोकसभा क्षेत्र अचानक से सुर्खियों में आ गया। 2009 में रालोद ने भी यहां से जीत का स्वाद चखा। मुस्लिम और जाट बाहुल्य क्षेत्र होने के बावजूद अमरोहा लोकसभा सीट पर भाजपा के कंवर सिंह तंवर ने 2014 के चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की थी।

सबसे अमीर हैं अमरोह के भाजपा सांसद
अमरोहा लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार कंवर सिंह तंवर ने 2014 में बंपर जीत हासिल की। वह पहली बार सांसद बने थे। उन्होंने सपा के हुमैरा अख्तर को करीब एक लाख मतों से हराया था। कंवर सिंह तंवर को पिछले चुनाव में 5,28,880 (48.3 फीसद) वोट मिले थे। सपा के हुमैरा अख्तर को 3,70,666 (33.8 फीसद) और बसपा के फरहत हसन को 1,62,983 (14.9 फीसद) वोट मिले थे। कंवर सिंह तंवर देश के सबसे अमीर सासंदों में गिने जाते हैं। उन्हें महंगी गाड़ियों का शक है। उनके काफिले में लैंड क्रूजर और बीएमडब्ल्यू जैसी महंगी और आलीशान कारें हैं। चुनाव जीतने से पहले 2011 में उन्होंने अपने बेटे की भव्य शादी की थी। इस शादी को देश की सबसे महंगी शादियों में गिना जाता है। इसके बाद वह सुर्खियों में आए थे।

चुनाव की विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Posted By: Amit Singh

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप