नई दिल्ली, आइएएनएस। कर्नाटक में जदएस और कांग्रेस के अयोग्य ठहराए गए बागी विधायकों की बची-खुची उम्मीदों पर शनिवार को पानी फिर गया। चुनाव आयोग ने इनकी सीटों को रिक्त मानते हुए उन पर उपचुनाव कराने की घोषणा जारी कर दी। इसके साथ ही अब यह तय हो गया है कि अयोग्य विधायक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

उपचुनाव के एलान के साथ ही सत्तारूढ़ भाजपा सरकार की चुनौती भी बढ़ गई है। उसे अगर सत्ता में बने रहना है तो 15 सीटों पर होने वाले उपचुनावों में से छह सीटों पर हरहाल में जीत दर्ज करनी होगी। महाराष्ट्र और हरियाणा के साथ ही कर्नाटक की 15 विधानसभा सीटों पर 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। मतगणना 24 अक्टूबर को होगी। उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर है। 15 विधायकों द्वारा इस्तीफा देने के बाद राज्य की 14 महीने पुरानी एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जदएस गठबंधन सरकार इस साल जुलाई में गिर गई थी।

इस पूरे मामले में नाटकीय मोड़ तब आया था जब विश्वास मत से एक दिन पहले तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने 17 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। चुनाव आयोग ने दो सीटों पर उपचुनाव की घोषणा अभी नहीं की है। अयोग्य ठहराए गए बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उन्हें उस समय निराशा हाथ लगी जब पिछले दिनों न्यायमूर्ति एमएम शांतनगौदर ने कर्नाटक से आने का हवाला देते हुए कहा था कि उनकी अंतरात्मा उन्हें मामले को सुनने की अनुमति नहीं देती है।

बता दें कि 15 विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना के बाद कर्नाटक विधानसभा में विधायकों की संख्या 222 हो जाएगी। सत्तारूढ़ भाजपा को वर्तमान में 106 विधायकों का समर्थन हासिल है। समर्थन देने वालों में निर्दलीय विधायक एच नागेश भी शामिल हैं।

Edited By: Sanjeev Tiwari