बैंगलुरू। कर्नाटक चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस को राजनीतिक हाशिए पर लाकर छोड़ दिया है। कांग्रेस की हालात क्षेत्रीय पार्टियों से बदत्तर होती जा रही है। ऐसे में कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी को विपक्ष का चेहरा बनाने की कोशिशें जमींदोज हो गई हैं। कर्नाटक चुनाव के नतीजों के बाद मोदी विरोधी एक बार फिर से विपक्षी एकता का राग छेड़ने की एक वजह बन सकता है। लेकिन उसमें राहुल गांधी के कद को छोटा रखने की संभावना रहेगी। पिछले दिनों ममता बेनर्जी और चंद्रबाबू नायडू की ओर से पूर्व में विपक्षी एकता की कोशिश की गई। लेकिन उसमें भी कांग्रेस को ज्यादा तवज्जों नहीं दी गई थी। ममता बेनर्जी ने अपने दिल्ली प्रवास में विपक्ष के सारे नेताओं से चर्चा की। लेकिन कांग्रेस से दूरी बनाए रखी। दरअसल विपक्ष कांग्रेस के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करना चाहता है।

वहीं, इस विपक्षी एकता के मुद्दे पर सवाल उठता है कि जब राग में कोई साज नहीं है, तो ऐसे में साजिंदे कहां से जुटेंगे। सवाल यह भी है कि विपक्ष के विरोध का कार्यक्रम क्या होगा। क्या विपक्षी एकता केवल मोदी के विरोध में होगी या फिर विपक्ष एकता की कोई ठोस वजह होगी, जिसकी बुनियाद पर भाजपा विरोध को धार दी जाएंगी। दरअसल विपक्ष का विरोध मुद्दों पर न होकर एक व्यक्ति विशेष पर है। ऐसे में सामूहित एजेंडे का बातचीत कैसे बनेगी।

 

By Kamal Verma