रांची, [आरपीएन मिश्र]। Jharkhand Assembly Election 2019 - झारखंड विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण की सीटों पर सियासत की डगर शहरी मतदाताओं से होकर गुजरती है।  अपने गर्भ में कोयले की ऊर्जा का अथाह भंडार छिपाए रत्नगर्भा धरती पर हो रहा इस चरण का सत्ता संग्राम कई मायने में खास है। चुनाव के बहाने मतदाताओं के हाथ में एक और मौका है जब वह अपने वोट की ताकत से नया इतिहास लिख अपनी ऊर्जा को नए आयाम दे सकते हैं। सपनों को मंजिल का पता दे सकते हैं।

राज्य की सत्ता के केंद्र स्थल राजधानी रांची की सभी सीटों पर हो रहा चुनाव जहां इस चरण को विशिष्टता दे रहा है, वहीं पूरे देश को ईंधन और ऊर्जा की आपूर्ति करने वाले कोयले की डेढ़ दर्जन से अधिक परियोजनाओं का रांची रामगढ़, हजारीबाग, सिमरिया, बेरमो, गोमिया और धनवार इलाकों में होना यहां मौजूद क्षमता और संभावनाओं की भी कहानी कहता है। वहीं कोडरमा और हजारीबाग इलाके में पाए जाने वाले अभ्रख, कीमती पत्थर और अन्य रत्न भी झारखंड की चमक से दुनिया के विभिन्न इलाकों को रोशन करते हैं। अब इस चमक को वोट में तब्दील करने की बारी है।

आंदोलनों की तपिश महसूस करती रही है यह भूमि

सामाजिक-राजनीतिक और आजादी के आंदोलनों की तपिश करीब से महसूस करती रही इस धरती की धमक शुरू से ही दूर-दूर तक रही है। महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं ने भी इसकी अहमियत को समझा था। 1940 का कांग्रेस और फॉरवर्ड ब्लॉक का रामगढ़ राष्ट्रीय अधिवेशन इसका प्रमाण है। इस सम्मेलन में अंग्रेजों के खिलाफ चल रहे आजादी के संघर्ष को तेज करने पर चर्चा हुई थी।

यह भी कहा जाता है कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की भूमिका इसी अधिवेशन में लिख ली गई थी। उधर सुभाष चंद्र बोस ने भी यहां फॉरवर्ड ब्लॉक का एक समानांतर सम्मेलन कर नो कंप्रोमाइज (समझौता नहीं) का नारा दिया था। इसी तरह हजारीबाग जेल से जयप्रकाश नारायण की यादें जुड़ी हैं। वहीं रांची और रामगढ़ के इलाके 1857 के आंदोलन में शेख भिखारी और टिकैत उरांव के भी अंग्रेजों से संघर्ष लेने की भी गवाह रही है।

संस्कृतियों का समागम बढ़ाता है गौरव

सांस्कृतिक अहमियत की बात करें तो सिमरिया विधानसभा क्षेत्र का इटखोरी और भद्रकाली जहां बौद्ध, जैन और सनातन धर्म की त्रिवेणी के रूप में विख्यात है, वहीं रामगढ़ के भी कुछ इलाकों में बौद्धकालीन निशानियां बिखरी पड़ी  हैं। पुरातत्व और पर्यटन के लिहाज से भी सिमरिया के इटखोरी और हजारीबाग के सीतागढ़ा इलाके का महत्व बड़ा है। कर्दम ऋषि की तपस्थली कोडरमा का भी सांस्कृतिक रूप से अपना अलग महत्व है। इस गौरवमयी इतिहास को याद करते हुए हमें अपने वोट से सुनहरे भविष्य की पटकथा लिखनी है।

विस्थापन, पलायन और प्रदूषण हैं बड़े मुद्दे

समस्याओं और चुनौतियों की बात करें तो राजधानी रांची के सामने जहां अभी ढांचागत विकास के जरिये खुद को विकसित शहरों व राजधानियों की कतार में खड़ा करने की चुनौती है, वहीं अन्य इलाके भी लंबे समय से बुनियादी दिक्कतों से जूझ रहे हैं। रामगढ़, हजारीबाग, गोमिया और धनवार में विस्थापन और प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। यहां कोयले का कारोबार भले ही अरबों का हो, लेकिन खदानों के आसपास के इलाकों में रहने वाले ज्यादातर लोगों के हिस्से धूल ही आई है।

वहीं विस्थापित लोग मुआवजे से लेकर पुनर्वास तक के लिए दशकों से संघर्ष कर रहे हैं। ईचागढ़ में भी विस्थापन और जलसंकट का मुद्दा बड़ा है। खनिज संपदा और वन संपदा से भरपूर इन इलाकों से रोजगार के लिए लोगों का पलायन करना भी दुर्भाग्यपूर्ण है। हजारीबाग के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों का रुख करते हैं, जिनके वहां जाकर फंस जाने की खबरें लगातार आती रहती हैं। अच्छे प्रतिनिधि और अच्छी सरकार का चुनाव कर हम इन समस्याओं का भी समाधान कर सकेंगे।

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