जमशेदपुर, विश्वजीत भट्ट। Chakradharpur Jharkhand Election Result 2019 10 साल के वनवास के बाद सीटिंग विधायक शशिभूषण सामड का टिकट काट चक्रधरपुर से झामुमो से सुखराम उरांव को टिकट देने का हेमंत सोरेन का निर्णय सुखराम पक्ष में लहर बनाने में कामयाब रहा। 2009 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतने वाले सुखराम को जानने वालों के जेहन में उस जमाने की एक से बढ़कर एक बड़ी गाड़ियों का काफिला, साथ में कई बंदूकधारी, भारी तामझाम का अक्स उभरता है।

समय से सीख लेते हुए सुखराम ने अपने आपको बहुत तेजी से बदला। 10 वर्ष की गुमनामी झेलने वाले सुखराम के करीबी बताते हैं कि इस दौरान सुखराम ने गंभीरता, सादगी और राजनीति के एक कुशल खिलाड़ी के सभी दांव-पेंच बड़ी बारीकी से सीखा। यही सुखराम के काम आया। हेमंत के आश्वासन पर सुखराम ने लोकसभा चुनाव की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन गठबंधन में सीट कांग्रेस के खाते में चले जाने के बावजूद सुखराम घर नहीं बैठे। वे चुपचाप लगातार अपने क्षेत्र में सक्रिय सक्रिय रहे।

गिलुवा को झेलनी पड़ी जनता की नाराजगी
दूसरी ओर, लक्ष्मण गिलुवा लोकसभा चुनाव हार गए थे। इसके बाद ये बात सामने आई कि गिलुवा की हार का सबसे बड़ा कारण जनता की नाराजगी थी। कुछ ही दिनों में लोगों की नाराजगी दूर कैसे होगी, इसकी रणनीति न भाजपा ने बनाई और न ही गिलुवा ने। भाजपा के गढ़ कस्बाई इलाके में लोग वोट डालने निकले नहीं। यही कारण रहा कि शहर में मतदान का प्रतिशत 50 से ऊपर नहीं गया। दूसरी ओर कस्बाई इलाके के ही मुस्लिम और ईसाई बहुल इलाकों में बंपर मतदान हुआ और सुखराम को एकतरफा वोट मिला। इसके साथ ही शिबू व हेमंत को लेकर रघुवर की टिप्पणी को ग्रामीण इलाकों में झामुमो कार्यकर्ताओं ने हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।
भाजपा को आजसू से गठबंधन टूटने का नुकसान
इधर, भाजपा आजसू गठबंधन टूटने का सीधा-सीधा नुकसान भी गिलुवा को उठाना पड़ा। आजसू प्रत्याशी रामलाल मुंडा ने अच्छे-खासे वोट बटोरे। पूरे विधानसभा क्षेत्र में महतो और प्रधान वोटों में आजसू ने सेंध लगाई। सुखराम के मिशन मोड के सामने गिलुवा का अति आत्मविश्वास भी घातक साबित हुआ।
 

Posted By: Rakesh Ranjan

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