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रांची, रांची ब्यूरो। पूर्व में सत्ता सुख भोग चुके कई दलों का जनाधार हाल के वर्षों में भले ही सिमट गया हो, परंतु चुनावी जंग जीत लेने की दावेदारी में कहीं कोई कमी नहीं है। सभी दलों के अपने-अपने दावे हैं और जंग जीत लेने का आधार भी। इसे साबित करने की कड़ी में संबंधित दल शक्ति प्रदर्शन में जुट गए हैं। बूथ स्तरीय सम्मेलन से लेकर रैली और महाधिवेशन का दौर शुरू हो चुका है। घोषणाओं के पिटारे भी खुलने लगे हैं।

बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को साथ लेकर सरकार चला रही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू भले ही झारखंड में अपनी जमीन तलाश रही हो, परंतु भाजपा से दो-दो हाथ करने की जुगत में सभी 81 सीटों पर चुनाव लडऩे की बात दोहरा चुकी है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) विकास के बिहार मॉडल के बूते यह जंग जीतने की जुगत में है। हाल के वर्षों में सांगठनिक तौर पर क्रमिक रूप से कमजोर होते गए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की नजर झारखंड-बिहार की सीमा से सटे 11-12 सीटों पर है।

उसका दावा है कि दल इन क्षेत्रों में मामूली अंतर से मात खाता रहा है, जिसे दुरूस्त कर लिया गया है। बहरहाल, बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो), सीट शेयरिंग के मामले में अबतक चुप है। खुद को गठबंधन का पक्षधर बताने वाले झाविमो की अगली रणनीति क्या होगी, इंतजार करना होगा। चुनावी जंग में जीत-हार के मामले को जनता पर छोडऩे वाले बाबूलाल इतना जरूर कहते हैं, उनकी पार्टी टूटी नहीं, उसे तोड़ा गया। इससे इतर, उसका जनाधार आज भी मजबूत है।

इन सबसे हटकर हाल ही में राजद से अलग होकर गौतम सागर राणा के नेतृत्व में बने दल राजद लोकतांत्रिक ने चुनावी जंग लडऩे के सभी विकल्पों को खुला रखा है। 26 सीटों पर चुनाव लडऩे की बात करने वाले गौतम सागर ने गठबंधन की स्थिति में एनडीए और यूपीए दोनों से वार्ता किए जाने की बात कही है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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