सरायकेला, [प्रमोद सिंह]। Jharkhand Assembly Election 2019 - सरायकेला विधानसभा शिक्षितों और कृषकों का क्षेत्र मना जाता है। आदित्यपुर औद्योगिक कस्बा इसकी पहचान है। राजनगर प्रखंड क्षेत्र पूरी तरह कृषक बहुल है। पिछले कई वर्षों से इस क्षेत्र का नेतृत्व झामुमो के दिग्गज नेता चंपई सोरेन करते आ रहे हैं। अपने क्षेत्र में विकास योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए विधायक हमेशा सक्रिय दिखते हैं। विपक्षी पार्टी से विधायक होने के कारण उन्हें हर मोर्चे पर जूझना भी पड़ता है।

पिछले पांच साल के दौरान जितनी सड़कों का निर्माण शुरू हुआ था, बनकर तैयार हो गई हैं। हर सड़क गांव से जुड़ती है। इस कारण अब गांवों में पहुंचना आसान हो गया है। यही नहीं गांव में पुल पुलिया का जाल भी बिछ गया है, लेकिन खेतों तक अबतक पानी नहीं पहुंचा है। लोगों को बिजली और स्वास्थ्य सेवाएं भी ठीक से मयस्सर नहीं हैं। उधर सरकारी स्कूलों में शिक्षा की हालत भी खराब है। वहीं स्वास्थ्य, पेयजल व रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए क्षेत्र तरस रहा है।

चंपई सोरेन के इस कार्यकाल की सबसे बड़ी खासियत रही कि क्षेत्र में लगातार सक्रिय दिखे। ग्रामीणों के हर सुख-दुख में शमिल होते रहे। यही नहीं अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी भाजपा के जिला महामंत्री गणेश माहली के साथ वह शह और मत का खेल भी खेलते रहे। क्षेत्र में जो विकास के कार्य नहीं हो सके उसके लिए विधायक भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं और सरकार पर भेदभाव पूर्ण रवैया अख्तियार करने का आरोप लगाते हैं। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी व भाजपा के नेता उनके इन आरोपों को सिरे से खारिज कर विधायक पर ही विकास की अनदेखी का आरोप लगाते हैं।

आमने-सामने

जिन कार्यों को शुरू किया, उसे सरकार ने रोका : चंपई

पांच वर्षों में सरायकेला विधानसभा क्षेत्र में बहुत काम हुआ है। कई बड़े तालाबों का जीर्णोद्धार कराया। लगभग सभी गांवों को मुख्य पथ से जोड़ा। जगह जगह नालों पर पुल-पुलिया का निर्माण कराया, जिससे आवागमन सुगम हुआ है। विपक्षी दल का विधायक होने के बाद भी विकास को गति देने की कोशिश की, लेकिन सरकार ने मेरे द्वारा शुरू कराए गए कार्यों को आगे नहीं बढ़ाया। राजनगर प्रखंड के सोसोडीह में 50 बेड का मेसो अस्पताल भवन बनकर तैयार है।

मगर राज्य सरकार चालू नहीं कर रही है। यह ग्रामीण क्षेत्र में बना है। इससे आठ से 10 किलोमीटर की परिधि में रहनेवाले गरीबों को लाभ मिलता। इसी तरह राजनगर में खादी पार्क चालू होता तो करीब दस हजार महिलाओं को रोजगार मिलता। हमने सूत कताई और सिलाई के लिए 40 प्रशिक्षण केंद्र खोले थे। अभी फंड के अभाव में ये केंद्र धूल फांक रहे हैं।

इसी तरह कई नालों में शृंखलाबद्ध माइनर लिफ्ट इरिगेशन का काम भी रोका गया। गोविंदपुर से गम्हरिया प्रखंड को जोडऩे वाली सड़क भी 80 फीसद काम होने के बाद अधूरी है। सरायकेला वाया राजनगर ओडिशा को जोडने वाली सड़क भी मेरी अनुशंसा पर मंजूर हुई, लेकिन आज तक अपूर्ण है। इन अधूरे कार्यों को सरकार पूरा करा देती तो क्षेत्र की तस्वीर ही कुछ और होती।

चुनाव के समय ही क्षेत्र में आते हैं विधायक : गणेश महाली

चंपई सोरेन पिछले 25 वर्षों से इस क्षेत्र का नेतृत्व करते आ रहे हैं। लेकिन इतने वर्षों में विकास का कोई काम नहीं हुआ। आज विकास के मामले में यह सरायकेला विधानसभा क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। किसानों के खेत में पानी पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं हुई। सड़कों का हाल बेहाल है। कई गांवों में बिजली नहीं है। रोजगार के लिए युवा भटक रहे हैं। विधायक बनने के बाद चार साल तक क्षेत्र से चंपई सोरेन गायब रहते हैं।

क्षेत्र की जनता को उसके हाल पर छोड़ देते हैं। खराब ट्रांसफार्मर के चलते गांवों में लोग कई माह से अंधेरे में रहने को विवश हैं। लोग विधायक के दरवाजे पर समस्या लेकर जाते हैं, पर कोई ध्यान नहीं देते हैं। मैं विधानसभा क्षेत्र में पिछले 10 साल से जनता के बीच हमेशा रहा हूं। मैंने खुद यह अनुभव किया। सैकड़ों गांवों में विधायक नहीं रहते हुए भी मैंने ट्रांसफार्मर लगवाया।

जिला परिषद अध्यक्ष के मार्फत सड़क का निर्माण कराया। बेरोजगार लोगों को फैक्ट्रियों में रोजगार दिलाने का काम किया। युवाओं को नि:शुल्क आइटीआइ कराया। विधयाक की एक ही नीति है। जब चुनाव आता है तो क्षेत्र घूमने निकलते हैं। सालों से ईचा खरकई डैम रद करने का मुद्दा उठा कर आदिवासी मूलवासी को बरगलाते रहे हैं। चुनाव जीतने के बाद चुप हो जाते हैं। उन्हें विकास से कोई मतलब नहीं है। हर कोई जान चुका है।

पांच बड़े मुद्दे

1. सिंचाई की सुविधा नहीं

विधानसभा क्षेत्र में किसानों के खेत तक पानी कैसे पहुंचे इसके लिए अबतक कोई पहल नहीं हुई। पानी के अभाव में खेती नहीं हो पाती।

चंपई सोरेन : क्षेत्र में जितने पुराने निजी और सरकारी तालाब हैं, प्राय: सभी का जीर्णोद्धार हुआ है। कई जगह शृंखलाबद्ध चेकडैम बने हैं। माइनर लिफ्ट इरिगेशन सुविधा उपलब्ध है।

गणेश महाली : विधायक चाहते तो आज हर किसान के खेत में पानी पहुंचता। डीप बोरिंग और लिफ्ट इरिगेशन के माध्यम से खेतों में पानी जाता। किसान सूखे की मार नहीं झेलते।

2. बेरोजगारी की समस्या

राज्य की अन्य इलाकों की तरह इस क्षेत्र में भी युवा बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे हैं। रोजगार के लिए क्षेत्र से लगातार पलायन हो रहा है।

चंपई सोरेन : औद्योगिक क्षेत्र आदित्यपुर और जमशेदपुर के टाटा स्टील में यहां के लोगों को रोजगार मिल रहा है। खादी पार्क बन जाता तो हजारों गरीबों को रोजगार मिलता। भाजपा सरकार लोगों से रोजगार छीन रही है।

गणेश महाली : विधायक चाहते तो आज हर घर से कोई न कोई रोजगार से जुड़ा रहता। आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में कई कंपनियां हैं। जहां योग्यता के आधार पर युवाओं को नौकरी दिला सकते थे, लेकिन आइटीआइ से डिप्लोमा लेकर युवा भटक रहे हैं।

3. स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल

स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सिर्फ भवन हैं। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर बने उप स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से डॉक्टर व नर्स के अभाव में बेकार पड़े हैं।

चंपई सोरेन : सिर्फ सरायकेला ही नहीं पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल किसी से छिपा नहीं है। हमने विधानसभा क्षेत्र की पंचायतों में उप स्वास्थ्य केंद्र के लिए भवन बनवाया। लेकिन राज्य सरकार ने आज तक डॉक्टर और नर्स की पोस्टिंग नहीं की। सोसोडीह मेसो अस्पताल चालू नहीं करा पाई।

गणेश महाली : विधायक कभी इस क्षेत्र की जनसमस्याओं को विधानसभा में उठाते ही नहीं हैं। अगर मुद्दा उठाते तो समाधान भी होता। उन्हें जनता से कोई मतलब ही नहीं है।

4. भरपूर बिजली नहीं

विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में ही नहीं शहरी क्षेत्रों में भी लोग बिजली संकट से जूझ रहे हैं। यहां मात्र आठ से 10 घंटे ही लोगों को बिजली मिलती है।

चंपई सोरेन : पूरा प्रदेश बिजली समस्या से जूझ रहा है। भाजपा सरकार लोगों को 24 घंटे बिजली देने के वादे से मुकर गई है। कहा था वादा पूरा नहीं किया तो वोट नहीं मांगूंगा। जनता चुनाव में पूछेगी।

गणेश महाली : कई गांवों में ट्रांसफार्मर खराब होने के चलते महीनों लोग अंधेरे में रहते हैं। विधायक कभी ध्यान नहीं देते हैं। कभी बिजली विभाग से शिकायत नहीं करते हैं। कई गांवों में मैंने अपने प्रयास से बिजली समस्या से लोगों राहत दिलाई है।

5. मात्र एक डिग्री कॉलेज

विधानसभा क्षेत्र में मात्र एक काशी साहू कॉलेज ही डिग्री कॉलेज है। राजनगर क्षेत्र आदिवासी बहुल है। विधानसभा में सबसे बड़ा प्रखंड है। बावजूद यहां उच्च शिक्षा की व्यवस्था नहीं है। स्टूडेंट चाईबासा व जमशेदपुर पढऩे जाते हैं।

चंपई सोरेन : शिक्षा के प्रति राज्य सरकार गंभीर नहीं है। सरकार ने विधानसभा क्षेत्र के 550 प्राथमिक विद्यालयों को बंद कर दिया है। राज्य सरकार गरीबों को अनपढ़ ही बनाकर रखना चाहती है।

गणेश महाली : विधायक शिक्षा पर कभी ध्यान ही नहीं देते। चाहते तो विधानसभा में आवाज उठाकर राजनगर में तकनीकी कॉलेज व डिग्री कालेज खुलवा सकते थे। आइटीआइ व डिप्लोमा के लिए छात्रों को बाहर जाना पड़ता है।

जनता की राय

विधायक के कार्यकाल में विकास हुआ है। लेकिन किसानों के खेत तक पानी नहीं पहुंचा। विधायक जनता के सुख व दुख में हमेशा मदद करते हैं। -हराधन मंडल, नुवागढ़ टोला, धतकीडीह। 7/10 अंक।

विधायक ने अपने कार्यकाल में अनेक सड़क, पुल व पुलिया, सामुदायिक भवन का निर्माण कराया है। लेकिन रोजगार के लिए लोगों को पलायन करना पड़ता है। -भागीरथ कैवर्त, टंगरजोड़ा। 7/10 अंक।

विधायक गरीबों असहायों की मदद हमेशा करते हैं। जनता से उनका सीधा जुड़ाव रहता है, लेकिन विकास के मामले में कई मोर्चों पर विफल भी हैं। -संजय हांसदा, अंतुसाई। 8/10 अंक।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काम बाकी है। पेयजल समस्या का स्थाई निदान नहीं हो पाया। विद्युत संकट बरकरार है। बेरोजगारी के कारण युवा पलायन कर रहे हैं। -विजय प्रधान, टिटडीह। 6/10 अंक।

विकास तो हुआ है, लेकिन रफ्तार जो होनी चाहिए वैसी नहीं रही। खेतों में पानी नहीं मिला। चिकित्सा व बिजली के क्षेत्र में लोगों को निराशा हाथ लगी। पलायन अब भी जारी है। -कर्म किशोर महतो, ग्रामीण। 5/10 अंक।

क्षेत्र के युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा। गांव और शहर बिजली संकट से जूझ रहे हैं। सड़क, पुल पुलिया तो बन गया है, लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं हो रही है। - टुईलु बिरुली, तेंतला। 6/10 अंक।

मतदाताओं की संख्या

पुरुष- 161907

महिला- 153677

कुल- 315596

विधानसभा चुनाव 2014 का परिणाम

चंपई सोरेन (झामुमो) -- 94746

गणेश महाली (भाजपा) -- 93631

लोकसभा चुनाव 2019 में सरायकेला विधानसभा क्षेत्र में दलों का प्रदर्शन

लक्ष्मण गिलुवा (भाजपा) - 01 लाख 40 हजार

गीता कोड़ा (कांग्रेस) - 70,000

विधायक निधि का उपयोग

वित्तीय वर्ष -- खर्च का प्रतिशत

2015-16 -- शत प्रतिशत

2016-17 -- शत प्रतिशत

2017-18 -- शत प्रतिशत

2018-19 -- शत प्रतिशत

2019-20 -- कार्य शुरू।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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