रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास निश्चिंत हैं। उन्हें अपने काम पर भरोसा है। कहते हैं, सवा तीन करोड़ झारखंडवासियों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए जीता हूं और मुझे पूरा भरोसा है जनता अपने सेवक को और मजबूत करके कुर्सी पर बैठाएगी। विपक्ष ही नहीं, तमाम और लोग भी छटपटा रहे हैं क्योंकि प्रदेश में पांच साल से तबादला का उद्योग बंद है। पहले योजनाएं जनता के लिए नहीं, कुछ लुटेरों की जेबें भरने के लिए बनती थीं, वे बेरोजगार हो गए हैं। हर झारखंडी जानता है, पहले चौदह साल तक मुख्यमंत्री आवास से लेकर सचिवालय तक ऐसे ही लोगों का कब्जा था, लेकिन पिछले पांच साल में सब कुछ बदल गया है।

रघुवर दास ने कहा- मेरी सिर्फ और सिर्फ एक चिंता है योजनाएं समाज के आखिरी व्यक्तितक कैसे पहुंचे। डबल इंजन सरकार में यह बखूबी हुआ है, लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। मैं झारखंडी हूं, झारखंड को विकसित राज्य बनाऊंगा। झारखंड समृद्धि के रास्ते पर चल चुका है, अगले पांच साल में यह देश के सबसे विकसित राज्यों में शुमार होगा। नक्सलवाद दम तोड़ चुका है। जिन इलाकों में लोग दिन में भी गुजरने से परहेज करते थे, वहां अब रात में भी कारोबार हो रहा है। राज्य की छवि देश-दुनिया में बेहतर हो रही है और यह सिलसिला अब रुकने वाला नहीं है। मतदाता किसी के बरगलाने में आने वाले नहीं हैं।

रघुवर ने कहा कि भाजपा वंशवादी नहीं है। यहां एक मजदूर का बेटा मुख्यमंत्री बना है। यहां कोई भी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक बन सकता है, लेकिन क्या विपक्ष में भी इतना लोकतंत्र है। एक परिवार झारखंड में, दूसरा दिल्ली में और तीसरा बिहार में वंशवाद की वेल बढ़ा रहा है। भाजपा की ताकत कार्यकर्ता हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के लिए संगठन और समाज के लिए पूरी प्रतिबद्धतता से काम करते हैं।

पांच साल पहले प्रदेश में क्या हालात थे इससे सभी वाकिफ हैं। अब हर गांव में बिजली है। हर घर में शौचालय हैं। सदियों से खुले आसमान और झोपडिय़ों में रहने वाले गरीबों-आदिवासियों को पक्का मकान मिल रहा है। हर घर में गैस है। हर गरीब के पास आयुष्मान कार्ड है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों, मजलूमों, आदिवासियों के मसीहा हैं। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार हर किसी के चेहरे पर खुशी लाने के लिए दिन-रात काम कर रही है।

आदिवासियों का मसीहा बनने का ढोंग करने वाले नकली नेताओं को इस बार आदिवासी ही सबक सिखा देंगे। लोकसभा में कुछ पेड़ गिरे थे, इस बार वह जड़ से उखड़ जाएंगे। रघुवर दास किसी से डरता नहीं है। जो आरोप लगा रहे हैं वह सुबूत दें। घूम-घूमकर झूठ बोलने से झूठ सच नहीं हो सकता। मैं दावे से कह सकता हूं, विपक्ष के पास एक भी सबूत नहीं है क्योंकि मेरी पांच साल की सरकार बेदाग है।

यहां विस्‍तार से पढ़ें, सीएम रघुवर दास से चुभते सवाल और उनके बेबाक जवाब

सवाल: विधानसभा चुनाव को लेकर गतिविधियां चरम पर है। आपका दावा 65 प्लस का है। इसे हासिल करने के लिए भाजपा ने क्या रणनीति बनाई है?

जवाब: दो चुनाव हुए हैैं पार्लियामेंट के, 2014 और 2019 के। इसके बाद से देश व राज्य में विकास की राजनीति चल रही है। केंद्र व राज्य सरकार की योजना जनता तक मजबूती से पहुंच रही है। नतीजा, जनता में नकारात्मकता नहीं दिख रही है। सभी जगह संतोष का भाव है। शासन और सरकार पर जनता का विश्वास बढ़ा है। मैैं जन आशीर्वाद यात्रा में पूरे राज्य के भ्रमण पर था तो यह दिखा। जो विकास कार्य हुए हैैं राज्य की जनता में उसको लेकर संतोष का भाव है। उसी काम के आधार पर हमारा पूरा भरोसा है कि इस बार 65 प्लस का आंकड़ा पार करेंगे।

सवाल: पहली बार आपके नेतृत्व में बहुमत की सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर रही है। स्थिरता एक बड़ा मुद्दा रहा है। इसपर आपकी क्या राय है?

जवाब: चेहरे पर थोड़ी पीड़ा झलकती है, कहते हैं, 14 साल यहां की जनता ने मिलीजुली सरकारों को देखा है और इसका कुपरिणाम भुगता है। कांग्रेस ने इस राज्य को प्रयोगशाला बनाकर रख दिया था। सरकारें कमजोर और मजबूर थी। सरकार बनाना, फिर गिराना इनका खेल था। बैड गर्वर्नेंस देखने को मिला। कई घोटाले हुए राज्य में। विकास पूरी तरह बाधित हुआ। बिचौलिये और दलाल उपर से लेकर नीचे तक हावी थे। कमीशनखोरी-दलाली चलती थी। पांच साल स्थिर सरकार का आदेश झारखंड की जनता ने 2014 के विधानसभा चुनाव में दिया। पांच साल की सरकार हमने बेदाग चलाई। एक दाग नहीं सरकार पर। झारखंड बढऩे लगा हर क्षेत्र में। विकास की ओर राज्य उन्मुख हुआ। लोग वोट देने के पहले इसे देखेंगे कि कैसे एक बहुमत वाली बेदाग सरकार ने उनके लिए विकास का काम किया।

सवाल: आप जन आशीर्वाद यात्रा के माध्यम से राज्य के ज्यादातर क्षेत्रों का भ्रमण कर चुके हैं। लोगों का मूड देखा होगा। सरकार की योजनाओं को लेकर कितना उत्साह दिखा?

जवाब: मैैंने पांच साल बगैर रुके-थके काम किया है। लोगों की अपेक्षाएं भी काफी बढ़ी है। अपेक्षा बढऩे का कारण है कि हम काम कर रहे हैैं। लोगों का इसी की वजह से हमारी तरफ झुकाव है और यात्रा के दौरान लोगों का प्यार-आशीर्वाद भी इसी वजह से मिला। मैंने काफी पहले चौपाल लगाकर लोगों से संवाद का सिलसिला शुरू किया। उनके अनुसार योजनाएं बनाई। पहली बार पंचायत में बैठकर गांवों के लिए योजनाएं तय की गई। यह अनूठा प्रयोग था, जिसका लाभ लोगों को मिला।

सवाल: आपने कई नीतिगत फैसले लिए। स्थानीय नीति, नियोजन नीति बनाई। पहले की सरकारें इसपर क्यों फैसला नहीं ले पाती थी?

जवाब: यही राज्य का दुर्भाग्य रहा। स्थानीय नीति के नाम पर झारखंड नामधारी पार्टियां सिर्फ राजनीति करती रही। अपना वोट बैैंक बनाने का काम करती रहीं। तमाम झारखंड नामधारी पार्टियों ने सिर्फ राज्य के लोगों को ठगा-छला। झूठ का व्यापार किया सिर्फ वोट बैैंक बनाए रखने के लिए। हमने जब काम आरंभ किया तो पाया कि हर जगह स्थानीय नीति नहीं रहने के कारण दिक्कत हो रही थी। शिक्षकों की बहाली करनी थी। अफसरों ने बताया कि नीति नहीं है। आप ही बताएं कि ऐसे में रिक्त पदों को कैसे भरता? हमने स्थानीय नीति बनाई। 13 शिड्यूल एरिया वाले जिलों में 10 साल के लिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पद स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित किए। आप पता लगा लीजिए, किसी राज्य में ऐसी नीति नहीं है। गैर अधिसूचित जिलों के जनप्रतिनिधि मुझसे मिले। आग्रह किया कि वहां भी यह प्रावधान होना चाहिए। हमने इस नीति को उन जिलों में भी लागू करने का निर्णय किया। 31 हजार शिक्षक बहाल किए। 9000 शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है अभी।

सवाल: लेकिन विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन का आरोप है कि आपने 14 हजार स्कूल बंद करा दिए?

जवाब: हेमंत सोरेन के पास बोलने के लिए कोई मुद्दा नहीं है। सरकारी स्कूलों में कौन पढ़ता है आप ही बताइए। गांव के गरीब बच्चे पढ़ते हैं सरकारी स्कूलों में। मैं भी सरकारी स्कूल में पढ़ा हूं। हमने कम छात्रों वाले स्कूलों को दूसरे स्कूल से मिला दिया जो दो-तीन किलोमीटर के दायरे में थे। अब हमारी योजना है कि आठवीं और नौवीं कक्षा के बच्चों को साइकिल देंगे स्कूल जाने के लिए। सरकारी स्कूलों में आठवीं-नौवीं के 400 छात्रों का चयन कर उन्हें मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रतियोगिता परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए कोचिंग भी कराएंगे। ऐसे बच्चे तैयारी नहीं कर पाते, अब उन्हें मौका मिलेगा। यही सब देखकर ये भ्रम फैला रहे हैैं। पढ़ाई का स्तर बढ़ाना मेरी सरकार का एजेंडा था। गुणवत्तायुक्त शिक्षा सबका अधिकार है।

सवाल: चुनाव की प्रक्रिया जब शुरू होती है तो बड़े पैमाने पर नेता दल बदलते हैं। क्या लगता है आपको कि राजनीति में अवसरवादिता पराकाष्ठा पर है?

जवाब:  मुस्कुराते हैं...। देखिए, लोकसभा हो या राज्यों का चुनाव, हर चुनाव में लोग इधर-उधर आते-जाते हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि भागमभाग मची है। हर बार ऐसा होता है।

सवाल: भाजपा ने कई सीटिंग विधायकों के टिकट काटे हैैं, इसका क्या आधार है?

जवाब: भाजपा में यह सबकुछ प्रक्रिया के आधार पर ही होता है। हमने कार्यकर्ताओं से प्रत्याशियों के बारे में फीडबैक लिया हैै। राज्य से लेकर केंद्रीय संगठन के स्तर से सर्वे हुआ है। एक-एक सीट पर टिकट का फैसला इसी आधार पर हुआ है। कांग्रेस-झामुमो ने भी अपने कुछ विधायकों के टिकट काटे हैैं। सभी दल यह कवायद करते हैैं।

सवाल: हाल ही में हरियाणा-महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी संख्या में दूसरे दलों से आए नेताओं को टिकट दिए थे, लेकिन जनता ने ऐसे दल-बदलुओं को नकारा ही है। बहुत कम लोग ही चुनकर विधानसभा पहुंच पाए। दूसरे दलों से आए नेताओं को टिकट देने से पहले इसका आंकलन किया गया? 

जवाब: देखिए हर जगह हार-जीत का अलग-अलग गणित होता है। विपक्षी दलों ने भी अपने प्रत्याशियों को लेकर बदलाव किए हैैं। पार्टी ठोक बजाकर जीतने वाले घोड़ों पर ही दांव लगाती हैै।

सवाल: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ओबीसी आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने की वकालत की है?

जवाब: हम यह पहल कर चुके हैं। तीन माह पहले ही सभी जिलों के उपायुक्तों को सर्वेक्षण करने का आदेश दिया गया है कि वे अपने जिले में ओबीसी की संख्या का सर्वेक्षण कर भेजें। हमारी सरकार बनी तो हम सबसे पहला काम ओबीसी आरक्षण बढ़ाने का ही करेंगे। हमारी सरकार ने गरीब सवर्णों को भी दस फीसद आरक्षण दिया है।

सवाल: आदिवासियों की सरना धर्मकोड लागू करने की मांग बहुत पुरानी है। इसपर आपकी पार्टी का क्या स्टैंड है?

जवाब: हमने विधानसभा में इसकी घोषणा की है। जब सदस्यों ने सदन के भीतर यह मामला उठाया तो हमने कहा कि 2022 में जब जनगणना होगी तो हम केंद्र सरकार को इसकी अनुशंसा करेंगे कि आदिवासियों के लिए अलग से एक कालम सरना धर्म का दिया जाए। मेरी घोषणा सदन की कार्यवाही का हिस्सा बन चुकी है। इसपर हम तत्परता से अमल करेंगे।

Posted By: Alok Shahi

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