रांची, जागरण स्‍पेशल। बड़ी अजीब दास्तां है। दो साथियों की पुरानी दोस्ती टूट के कगार पर पहुंच गई है और अब यह हाल है कि दोनों न तो खुलकर दोस्ती तोडऩे की बात कर रहे हैं और न ही दुश्मनी छोडऩे की। साथ निभाना तो ऐसा है कि जहां एक दिखता है वहां दूसरे ने अपने आदमी तैनात कर दिए हैं तो जहां दूसरा है वहां पहले की सेना तैनात है। दोनों में से कोई भी दोस्ती तोडऩे की बात सरेआम नहीं कह रहे हैं और दुश्मनी भी जाहिर नहीं होने दे रहे। ऐसे में चुनाव प्रचार की तैयारी कर चुके राम खिलावन अब संकट में हैं और यही सोच रहे हैं कि कैसे किसी एक का साथ दिया जाए। उनके साथी राम पुकारन तो साफ कह रहे हैं कि अब दोनों दोस्त मैदान में गए भी तो एक-दूसरे की पीठ में छुरा ही घोपेंगे, साथ क्या देंगे यह तो खुदा ही जाने।

Posted By: Alok Shahi

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