जमशेदपुर, वीरेंद्र ओझा। Jharkhand Assembly Election 2019 चरण स्पर्श करना अपने यहां संस्कृति के साथ परंपरा में भी शामिल हो गया है। इसमें कोई खराबी भी नहीं है, लेकिन जब यह खास मौके पर खास व्यक्ति के साथ किया जाता है, तो चर्चा का विषय बन जाता है। ऐसा ही वाकया शुक्रवार शाम को देखने को मिला। जैसे ही राज्य के खासमखास पुष्पक की सवारी करके उतरे, वहां मौजूद भीड़ में से दो लोग लपककर चरण स्पर्श कर लिए। करने वाले भी खास हैं, तो इनका मकसद भी खास है। इनकी अंतिम इच्छा बहती गंगा में वैतरणी पार करना है।

जाहिर सी बात है कि ऐसे मौके पर जो केवट गंगा पार करा सकता है, चरण स्पर्श उसी का करना होगा। इनके चरण स्पर्श की चर्चा इसलिए आम हो गई, क्योंकि इससे पहले ये इसी खासमखास को गुलदस्ता भेंट करते रहे हैं। पहली बार चरण स्पर्श किया है। मजे की बात है कि ऐसा करने वाले दोनों दाढ़ी रखते हैं। एक की दाढ़ी तरतीब है, तो दूसरे की बेतरतीब। तरतीब दाढ़ी वाले की मंशा है कि केवट बस गंगा की सैर कराते रहें तो भी काफी है। वे समय-समय पर किनारा ढूंढ लेते हैं और आगे भी ढूंढ लेंगे, बस केवट की कृपा बनी रहे। बेतरतीब दाढ़ी वाले को किनारा दिख रहा है, बस केवट को लंगर डालना है। बेचारे पांच साल से असली गंगा के किनारे तैरते रहे हैं। वहां केवट को कई घाट दिखाए, जिसका आशीर्वाद मांग रहे हैं। उनके चरण स्पर्श का इशारा शायद केवट समझ भी गए हैं।

उधर नेताजी पका रहे खिचड़ी, इधर कुलबुला रही अंतड़ी

अपने यहां एक धुरंधर नेताजी हैं, जिन्हें हर खेल में उस्ताद माना जाता है। इन दिनों जहां हर नेता टाइप का शख्स जमीन पकड़कर रखने में व्यस्त है, वे आलाकमान के पास बैठकर खिचड़ी पका रहे हैं। पहले यही कहा जा रहा था कि इनकी हांडी तीसरी बार नहीं चढ़ेगी, लेकिन ऐसा दिख रहा है कि इनकी हांडी तो चढ़ने वाली है ही, वे आलाकमान से अपने एक चहेते की हांडी भी चढ़वाकर लौटना चाहते हैं। इनके चहेते चक्रव्यूह में फंस गए हैं, इसलिए ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है। चहेते लंबे समय से पड़ोसी हैं, लिहाजा संकट से उबारेगा फर्ज भी है। दोनों साथ-साथ सीडी-डीवीडी वायरल कर चुके हैं। यह अलग बात है कि इसमें सफलता तो मिली नहीं, दोनों को बैकफुट पर भी आना पड़ा। बहरहाल, मामला अब सीडी लीक प्रकरण से आगे बढ़ चुका है। पड़ोसी एक डॉक्टर पुत्र के जाल में फंसा है। जाहिर सी बात है कि कोई मकड़ी जैसा दिमाग वाला ही उन्हें निकाल सकता है, सो अपने नेताजी वही काम कर रहे हैं।

दो नाव में सवार नेताजी से समर्थक भी नाराज

जमशेदपुर पश्चिम में एक नेताजी काफी दिनों से दो नाव पर सवार हैं। इसके कारण उनकी अपनी पार्टी के समर्थक भी नाराज हैं। नेताजी ऐन वक्त पर पाला बदलने के लिए मशहूर हैं। पिछले दिनों नेताजी ने अपने क्षेत्र में कई होर्डिग लगाए, लेकिन किसी में झंडे या पंजे का निशान नहीं था। चर्चा थी कि नेताजी एक बार फिर पाला बदलने की तैयारी में है। यदि रातों-रात भी कोई झंडा थमा देगा तो शिफ्ट हो जाएंगे। इससे मौजूदा दल का झंडा ढोने वाले काफी नाराज हैं। दो नाव की सवारी करने वाले नेताजी का खामियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि उनकी दुकान बंद है। आखिर चंदा मांगे तो किसके नाम पर।

 

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