रांची, राज्य ब्यूरो। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी को झारखंड में हो रहे विधानसभा चुनाव में इस बार खाता खोलने की चुनौती है। बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नीतीश अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व विधानसभा में दिला पाएंगे या नहीं। पार्टी के पास गिने-चुने पुराने नेता हैं। ऐसे में वह पुराने चेहरों पर ही अपना दांव लगाएगी। पार्टी विभिन्न चरणों में अपने प्रत्याशियों की घोषणा करेगी। रविवार को पहले चरण की सीटों पर प्रत्याशी की घोषणा हो सकती है।

जदयू ने इस बार अकेले सभी 81 सीटों पर चुनाव लडऩे की घोषणा की है। हालांकि यह भी देखना होगा कि इतनी सीटों पर प्रत्याशी देने के लिए पार्टी के पास कितने नेता उपलब्ध हो पाते हैं। पार्टी का बिहार में तो भाजपा के साथ गठबंधन है, लेकिन झारखंड में भाजपा उसे कोई तवज्जो ही नहीं दे रही है। हालांकि लोकसभा चुनाव में जदयू ने गठबंधन नहीं होते हुए भी भाजपा को समर्थन दिया था।

विधानसभा चुनाव की बात करें तो पार्टी बिहार की तरह विकास के नीतीश मॉडल को झारखंड में लागू करने के वादे के साथ चुनाव मैदान में जा रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सालखन मुर्मू, पूर्व मंत्री सुधा चौधरी, लालचंद महतो तथा पूर्व विधायक खीरू महतो आदि का चुनाव लडऩा तय है। बाकी नए चेहरे होंगे। बता दें कि पार्टी के समक्ष झारखंड में अपने अस्तित्व बचाने की चुनौती है, क्योंकि झारखंड में कभी सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाली इस पार्टी के वर्तमान में एक भी विधायक नहीं है।

राज्य गठन के बाद यहां हुए पहले विधानसभा चुनाव में जहां पार्टी के टिकट पर लडऩेवालेपांच नेता विधानसभा पहुंचे थे, वहीं 2009 में यह संख्या घटकर महज दो हो गई थी। 2014 में हुए चुनाव में पार्टी का खाता ही नहीं खुला।

Posted By: Alok Shahi

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप