रांची, राज्‍य ब्‍यूरो। Jharkhand Assembly Election 2019 - अपने आज तक के राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखने वाले झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री व झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी बुधवार को प्रस्तावित जनादेश समागम को लेकर खासा उत्साहित हैं। उन्होंने कहा है कि यह समागम झारखंड की राजनीति को नया दिशा देगा। झाविमो के पिछले 13 वर्षों के इतिहास को याद कर बाबूलाल कहते हैं, राजनीति में आना-जाना, जीत-हार लगा रहता है।

आप मानकर चलिए जो आज है, वह कल नहीं रहेगा। समय परिवर्तनशील है। हम अपने कर्तव्य पथ पर बढ़े जा रहे हैं, जनता हमारे साथ है। बाबूलाल ने झारखंड की मौजूदा राजनीति और झाविमो की भविष्य की रणनीति पर खुलकर बातें की। प्रस्तुत है दैनिक जागरण के साथ उनकी हुई बातचीत के मुख्य अंश :-

प्रश्न : विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने शेष हैं। झाविमो चुनाव के लिए कितना तैयार है?

-देखिए एक राजनीतिक कार्यकर्ता होने के नाते हमारा एक-एक पल आम जनता के लिए समर्पित है। हम उन्हीं के बीच रहते हैं। विशेष तैयारी तो उन्हें करनी पड़ती है, जो सत्ता के लिए किसी भी हद से गुजरने से बाज नहीं आते। हम छल प्रपंच की राजनीति नहीं करते हैं। हमने जिस सुखी और समृद्ध झारखंड की परिकल्पना के साथ झाविमो की नींव रखी थी, हम आज भी उस पर कायम हैं।

प्रश्न : क्या आपको ऐसा नहीं लगता, आपकी राजनीतिक और सांगठनिक ताकत कमजोर हुई है?

-देखिए यह राजनीति है, कब-क्या होगा, नहीं कहा जा सकता है। यह सही है कि हमारी पार्टी से कई लोग चले गए, परंतु कई लोग आए भी। कुछ लोग अति महत्वाकांक्षी होते हैं, मैं तो यही कहूंगा, भगवान उन्हें सद्बुद्धि दें। इस जमात में बड़े-बड़े थैलीशाह भी हैं, खरीद-फरोख्त जिनका पेशा है। अब हमारे ही दल के छह विधायकों को ले गए। वे तो यहां तक कह रहे कि झाविमो का अस्तित्व ही मिट गया। इससे इतर, जबतक जनाधार है, हम हैं। यकीन मानिए झाविमो का आज भी वृहद जनाधार है।

प्रश्न : आपने जनादेश समागम का आयोजन किया है। इसके माध्यम से आप क्या प्रदर्शित करना चाहेंगे?

-यह तो राजनीति का हिस्सा है। हमने परिवर्तन रैली निकाली थी। कुटे में अधिवेशन किया था। लोगों को याद होगा, ये दोनों ही कार्यक्रम ऐतिहासिक थे, जनादेश समागम भी इतिहास रचने वाला साबित होगा। जनता वर्तमान सरकार से क्षुब्ध है। यह पूंजीपतियों की सरकार है। लोगों को झाविमो से बहुत उम्मीद है और हम उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की भरपूर कोशिश करेंगे।

प्रश्न : झारखंड की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति के बारे में क्या कहेंगे? सरकार को कितना अंक देंगे।

-खुद को डबल इंजन की सरकार कहते नहीं अघाने वाली इस सरकार को काम पर कम, ब्रांडिग पर अधिक भरोसा है। आप ही बताएं, राज्य में कितने उद्योग धंधे लगे, क्या पलायन बंद हो गया, सरकार विस्थापितों के साथ न्याय कर पाई, स्थानीय को रोजगार मिल रहा है, आदिवासियों की समस्याएं समाप्त हो गईं। नेशनल स्टाफ सलेक्शन कमीशन जहां आवेदन के एवज में 100 रुपये का शुल्क लेता है, वहीं झारखंड स्टाफ सलेक्शन कमीशन 1000 रुपये वसूल रहा है। समस्याएं घटने के बजाय बढ़ी हैं। अपराध का ग्राफ बढ़ा है, मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में आप ही उन्हें अंक दें।

प्रश्न : आप महागठबंधन के पक्षधर रहे हैं, लेकिन इसका नेता ही तय नहीं है। गत लोकसभा चुनाव में भी विपक्ष बिखरा-बिखरा नजर आया था, जिसका परिणाम आपके सामने है। आसन्न चुनाव में इसके स्वरूप को लेकर आपका क्या नजरिया है?

-देखिए समय और परिस्थिति के हिसाब सबकुछ बदल जाता है। समय का इंतजार कीजिए, नेता भी तय हो जाएंगे और गठबंधन का स्वरूप भी आकार ले लेगा। भाजपामुक्त सरकार के लिए हम मिलकर प्रहार करेंगे।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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