रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Assembly Election 2019 झामुमो ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के कार्यक्रमों तथा उनके वक्तव्यों पर पैनी नजर रखने की गुजारिश भारत निर्वाचन आयोग से की है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने इस बाबत भेजे गए पत्र में कहा है कि केंद्रीय मंत्री ने वन अधिकार अधिनियम 1927 में संशोधन से संबंधित ड्राफ्ट वापस लेने की घोषणा दिल्ली में की थी। झामुमो का दावा है कि यह घोषणा झारखंड राज्य विधानसभा चुनाव को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित एवं प्रबुद्ध मतदाताओं के बीच प्रलोभन एवं दिग्भ्रमित करने के उद्देश्य से किया गया है।

रविवार को मीडिया से मुखातिब झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा इसी वर्ष वन कानून में संशोधन से संबंधित प्रस्ताव राज्य सरकारों को भेजा गया था। इस संशोधन द्वारा वन क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोगों के वनाधिकार पर सीधा हमला करने की तैयारी थी। इससे देश के वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों एवं मूलवासियों के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लग जाता। लिहाजा संबंधित राज्यों के आदिवासियों और मूलवासियों ने इसका प्रखर विरोध किया था।

उन्होंने कहा कि जनाक्रोश को देखते हुए वन मंत्रालय ने इसे वापस लेने की घोषणा ऐसे समय में की, जब झारखंड में चुनाव होने वाले हैं और यहां आचार संहिता प्रभावी है। झारखंड विधानसभा चुनाव के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं पांचवें चरण के चुनावों में वन क्षेत्र में रहने वाले प्रबुद्ध मतदाताओं की एक बड़ी आबादी निवास करती है। उन्होंने आशंका जताई है कि प्रबुद्ध मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए इस तरह की घोषणा की जा रही है।

Posted By: Alok Shahi

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप