रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Assembly Election 2019 एक ओर राष्ट्रीय दलों का तामझाम, प्रचार के प्रचुर संसाधन, स्टार प्रचारकों की बड़ी तादाद, तो दूसरी तरफ इकलौते रणनीतिकार से लेकर प्रचारक और टिकट बांटने तक की जवाबदेही। ऐसे तीन क्षेत्रीय क्षत्रप हेमंत सोरेन, सुदेश महतो और बाबूलाल मरांडी झारखंड के चुनावी महासमर में धूम मचा रहे हैैं। इसमें से दो मुख्यमंत्री रह चुके हैैं और एक को उप मुख्यमंत्री की कुर्सी मिल चुकी है। सत्ता के समीकरण में ये पहले भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैैं। इस बार भी इसकी पूरी कवायद कर रहे हैैं कि मतों के ध्रुवीकरण में ये सफल हो सकें। सुबह  से लेकर देर रात तक ये राजनीतिक मोर्चे पर जूझ रहे हैैं। ऐसे में इन्हें अपने दल का वन मैन आर्मी कहा जा रहा है। 

हेमंत सोरेन तीन दलों झामुमो, कांग्रेस और राजद के चुनावी गठबंधन के प्रमुख हैैं, जबकि सुदेश महतो और बाबूलाल मरांडी अकेले चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैैं। सुदेश महतो की पार्टी आजसू का भाजपा से गठबंधन टूट चुका है, हालांकि भाजपा ने उनके खिलाफ सिल्ली से प्रत्याशी नहीं दिया और उन्होंने जमशेदपुर पूर्वी में मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा है। उधर, बाबूलाल मरांडी अकेले खम ठोक रहे हैैं। उन्होंने 81 सीटों पर प्रत्याशी दिए हैैं। पिछली दफा आठ सीटें जीतने के बाद उनके छह विधायक छिटक गए थे। चुनाव घोषित होने के बाद एक अन्य विधायक ने भी उन्हें अलविदा कह दिया। 

हेमंत सोरेन, कार्यकारी अध्यक्ष, झामुमो

तीन दलों के विपक्षी गठबंधन के प्रमुख, सीएम पद के अहम दावेदार, अकेले कर रहे अपने दल के लिए चुनाव प्रचार, साथी दलों राजद और कांग्रेस प्रत्याशी के लिए भी करते हैैं प्रचार। 43 सीटों पर झामुमो ने प्रत्याशी खड़े किए हैैं। 

सुदेश महतो, अध्यक्ष, आजसू पार्टी

सुदेश महतो आजसू पार्टी के प्रमुख हैैं और उन्होंने अबतक 52 सीटों पर प्रत्याशी दिए हैैं। पहले भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर सक्रिय थे, लेकिन अपेक्षा के मुताबिक सीटें नहीं मिलने के कारण अलग राह पकड़ी। चुनाव बाद सरकार के समीकरण में होगी अहम भागीदारी। अकेले कर रहे चुनाव प्रचार। खुद के लिए भी सीट जीतने की कवायद। 

बाबूलाल मरांडी, अध्यक्ष, झाविमो

कभी भाजपा में रहे बाबूलाल मरांडी का राजनीतिक ग्राफ उठता-गिरता रहा है। झारखंड का पहला मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला, लेकिन ज्यादा वक्त तक सत्ता नहीं चला पाए। संगठन से दूरियां बनी, तो खुद का दल झारखंड विकास मोर्चा खड़ा किया। 2009 के विधानसभा चुनाव में 11 और 2014 में आठ सीटें जीती। 2014 में चुनाव जीतने के बाद विधायक छिटक गए। अकेले चुनाव प्रचार से लेकर रणनीति में जुटे हैैं। 81 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए हैैं।

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