रांची, राज्य ब्यूरो। राजनीति का शगल ही कुछ ऐसा है। इसके ग्लैमर से कोई अछूता नहीं है। एमएलए-एमपी का रुतबा हुक्मरानों को भी आकर्षित करता है, जो वीआइपी कल्चर में शुरू से ढले होते हैैं। झारखंड के भी ब्यूरोक्रेट्स इस ट्रेंड से अलग नहीं हैैं। यहां के साहबों को राजनीति का चस्का पुराना है। बिहार-झारखंड में कई बड़े पदों पर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने राजनीति में बड़े नाम किए। पूर्व आइपीएस अधिकारी रामेश्वर उरांव ने भी लंबी राजनीतिक पारी खेली है और अभी भी चुनावी राजनीति में सक्रिय हैैं। इसमें अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी समेत राज्य प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारी शुमार हैैं।

दरअसल, राजनीति का आकर्षण इन्हें खींचता है। कई करियर को बीच में छोड़कर राजनीति की राह पकड़ते हैैं, तो कई रिटायर होने के ऐन पहले या बाद में पसंदीदा राजनीतिक दलों की शरण में जाते हैैं। इनमें से कुछ ऐसे भी अफसर हैैं, जिनकी मुराद पूरी नहीं हो पाती और वे राजनीतिक पारी आरंभ करते-करते रह जाते हैैं।

विधानसभा चुनाव में ये आजमाएंगे किस्मत

जेबी तुबिद : पिछले विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इस बार फिर चाईबासा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी घोषित किए गए हैैं। बतौर आइएएस अधिकारी तुबिद बिहार-झारखंड में कई अहम पदों पर रह चुके हैैं।

रामेश्वर उरांव : इस पूर्व आइपीएस अधिकारी ने बिहार में तैनाती के दौरान रथ यात्रा निकालने वाले पूर्व उप प्रधानमंत्री एलके अडवाणी को गिरफ्तार किया था। कांग्रेस के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष हैैं। लोहरदगा से सांसद रह चुके हैैं। इस बार वहीं से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैैं।

राजीव कुमार : झारखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार कांग्रेस के टिकट पर कांके विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाए गए हैैं। उनका यह पहला चुनाव होगा।

लक्ष्मण प्रसाद सिंह : वीआरएस लेकर राजनीति के मैदान में कूदे हैं। भाजपा ने दोबारा इन्हें धनवार विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया है। 1984 में बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा के टॉपर रहे लक्ष्मण प्रसाद सिंह को पिछले विधानसभा चुनाव में कामयाबी नहीं मिल पाई थी।

रेजी डुंगडुंग : हाल ही में वीआरएस लेकर राजनीति में नई पारी आरंभ की है। वे झापा की टिकट पर सिमडेगा से चुनाव लड़ रहे हैैं।

झाप्रसे अधिकारी भी रहे कतार में

राज्य प्रशासनिक सेवा (झाप्रसे) के अधिकारी रहे सुखदेव भगत ने लंबी राजनीतिक पारी खेली है। उनका अनुभव पुराना है। वे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैैं। दो दफा लोहरदगा से विधायक रहे हैैं। हाल ही में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली है। भाजपा ने उन्हें लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया है। एक अन्य अधिकारी लंबोदर महतो गोमिया से उपचुनाव लड़ चुके हैैं। पिछला चुनाव हार चुके हैैं। फिर से वे चुनाव मैदान में हैैं।

Posted By: Alok Shahi

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